आदमकद रोबोट को लेकर अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा रूसी यान

मॉस्को। मानव की तरह दिखने वाले एक आदमकद रोबोट को लेकर गया रूस का अंतरिक्ष यान मंगलवार को सफलतापूर्वक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंच गया। इसके पहले सप्ताहांत में यह कोशिश नाकाम रही थी। नासा टीवी के उद्घोषक ने रूस के यान के पहुंचने की पुष्टि की। इस आदमकद रोबोट का नाम ‘फेडोर’ (फाइनल एक्सपेरीमेंटल डिमॉन्स्ट्रेशन ऑब्जेक्ट रिसर्च) है। अंतरिक्ष में रवाना होने से पहले ही यह रोबोट दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था।
अंतरिक्ष यात्रियों की मदद के लिए तैयार किए गए रोबोट
फेडोर की खासियत है कि यह इंसानी गतिविधि की नकल करता है और यह एक ऐसा गुण है जो इसे यहां कार्य करने में मदद करेगा। 7 सितंबर तक फेडोर अंतरिक्ष में रहेगा। इस आदमकद आकार के रोबोट की दुनिया में काफी चर्चा होती रही है। इस रोबोट का एक इंस्टाग्राम और ट्विटर अकाउंट भी है। कुछ दिन पहले इस अकाउंट से तस्वीर शेयर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि फेडोर पानी की बोतल खोलने की कला सीख रहा है।
फेडोर के हाथ में रूस का राष्ट्रीय ध्वज
रूस अभी तक सोयूद एमएस-14 यान के साथ अंतरिक्ष यात्रियों को ही भेजता था। इस बार अंतरिक्ष यात्री की जगह पर फेडोर को बिठाया गया। फेडोर के हाथ में रूस का राष्ट्रीय ध्वज भी था। रूस के पहले अंतरिक्ष यात्री ने भी यान के रवाना होने से पहले रूसी भाषा में ‘चलो, चलते हैं’ कहा था। फेडोर ने भी ठीक उसी तरह यान रवाना होने से पहले चलो चलते हैं कहा।
फेडोर से पहले नासा ने अंतरिक्ष में भेजा है रोबोट
यह यान बृहस्पतिवार को सोयूज एमएस-14 अंतरिक्ष यान के जरिए दक्षिणी कजाखस्तान स्थित एक रूसी प्रक्षेपण केंद्र से रवाना हुआ था। अब यह 7 सितंबर तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहेगा। यह यान वहां अंतरिक्षयात्रियों की मदद करना भी सीखेगा। अंतरिक्ष में जानेवाला ‘फेडोर’ पहला रोबोट नहीं है। 2011 में नासा ने ‘रोबोनॉट 2’ भेजा था। इसमें आई तकनीकी खामी की वजह से यह 2018 में धरती पर वापस आ गया था।
जापान भी भेज चुका है अंतरिक्ष में रोबोट
2013 में जापान ने एक छोटा रोबोट किरोबो भेजा था। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र 1998 में अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। तब से यह 17,500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है। किरोबो को जापान के पहले अंतरिक्ष यात्री अपने साथ लेकर गए थे।
-एजेंसियां

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