अमेरिका की ‘स्पेस फोर्स’ के जवाब में रूस तैयार कर रहा है ‘रोबोकॉप’ आर्मी

मॉस्को। भविष्य की जंग के लिहाज से अमेरिका जहां स्पेस फोर्स खड़ी कर रहा है वहीं रूस ने ‘रोबोकॉप’ आर्मी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रूस ने रोबोकॉप एक्सो-स्केलिटन कवच का टेस्ट करना भी शुरू कर दिया है। हाल में प्रदर्शित अपने इस सुपर सोल्जर स्केलिटन को लेकर रूस का दावा है कि इस बख्तरबंद ढांचे को पहनने वाले कमांडो की ताकत सामान्य सैनिक से कई गुना बढ़ जाएगी।
एक हाथ से चला सकेंगे मशीन गन
मेल ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक देखने में यह सूट बिल्कुल ‘स्टार वॉर्स’ फिल्म में दिखाए गए सैनिकों की तरह लगता है। इस प्रोटोटाइप मिलिटरी एक्सो-स्केलिटन के बारे में रूस का कहना है कि इससे पैदल चलने वाले सैनिक एक हाथ से ही मशीन गन चला सकेंगे और उनका निशाना कंप्यूटर की तरह सटीक होगा।
यह है भविष्य के सोल्जर का सूट
यह सूट पहनकर जवान भारी वजन उठा सकते हैं और सामान्य से कहीं ज्यादा तेज दौड़ भी सकते हैं। मिलिटरी फर्म TsNiiTochMash ने रत्निक-3 ‘भविष्य का सोल्जर’ सूट तैयार किया है जिसे हाल ही में मॉस्को में आर्मी 2018 इंटरनैशनल मिलिटरी ऐंड टेक्निकल फोरम में दिखाया गया।
गोली और छर्रों का कोई असर नहीं
टाइटैनियम से तैयार इस सूट को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे पहनने वाले की ताकत और स्टैमिना को बढ़ाया जा सके। खास बात यह है कि इसे पहनने वाले कमांडो पर किसी गोली और बम के छर्रों का कोई असर नहीं होता है। रूसी कंपनी का दावा है कि 2025 तक जंग के मैदान के लिए यह सूट तैयार हो जाएगा। फिलहाल बैटरी की कुछ समस्या आ रही है।
जानिए इस रूसी ‘आयरनमैन’ की खास बातें
– इसमें बुलेटप्रुफ नेक प्रटेक्टर लगाया गया है, जिससे गोली गले में न घुस सके।
– डिजिटल हेलमेट, जिसमें स्क्रीन पर टारगेट के बारे में सूचना मिलती है। इसके साथ ही सोल्जर का हेल्थ डेटा भी मिलता रहता है।
– फेस प्रटेक्शन मास्क लगा है और सांस लेने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
– सूट का तापमान अपने हिसाब से घटाया-बढ़ाया जा सकता है। यह वॉटर-रेजिस्टेंट होने के साथ ही फ्लेम-प्रूफ भी है।
– सूट के साथ टॉर्च, बैटरी पैक और रात के लिए विडियो कैमरा भी दिया गया है।
– राइफल में दो बैरल्स है जो अलग-अलग साइज की गोलियां फायर करती हैं।
– कंप्यूटर कंट्रोल्ड होने के कारण सोल्जर भारी हथियार लंबे समय तक लिए रह सकता है।
– बूट्स ऐसे डिजाइन हैं जिससे बुलेट, मलबे या लैंड माइंस का असर न हो। इसमें माइन डिटेक्शन सेंसर्स भी लगाए गए हैं।
-एजेंसियां

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