रूस ने कश्मीर पर फिर किया भारत का समर्थन, द्विपक्षीय मुद्दा बताया

नई दिल्‍ली। रूस ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मुद़्दे पर फिर एक बार भारत का समर्थन किया है। भारत में पदस्थ रूसी राजदूत निकोलाय कुदाशेव ने आज कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है। भारत और पाकिस्तान को यह विवाद द्विपक्षीय वार्ता से सुलझाना होगा। यह बयान प्रधानमंत्री के रूस दौरे से एक हफ्ते पहले आया है।
मोदी व्लादिवोस्तोक में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। इसी महीने की शुरुआत में रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला भारत के संविधान के दायरे में लिया गया है।
सिविल न्यूक्लियर एनर्जी पर हो सकता है समझौता
कुदाशेव ने कहा कि अगले हफ्ते मोदी के दौरे से भारत और रूस के संबंधों में और गहराई आएगी। दोनों देश रक्षा से लेकर व्यापार, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और हाईड्रोकार्बन्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे। इसके अलावा दोनों नेता अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने के मौके तलाशेंगे।
एक रूसी अधिकारी ने बताया कि दोनों नेता भारत में छह और सिविल न्यूक्लियर रिएक्टर्स लगाने के समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। यह समझौता कुडानकुलम प्रोजेक्ट से अलग होगा। दरअसल, कुडानकुलम प्रोजेक्ट के तहत रूस पहले ही भारत में छह न्यूक्लियर रिएक्टर बना रहा है।
कश्मीर को भारत का संवैधानिक मामला बता चुका है रूस
रूस ने इसी महीने की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर पर भारत का समर्थन किया था। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि कश्मीर के विशेष दर्जे में बदलाव और उसे दो हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला भारत के संविधान के दायरे में लिया गया है। रूस ने उम्मीद जताई है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान में किसी भी तरह से हालात बिगड़ने नहीं देगा। बयान में कहा गया था कि रूस हमेशा भारत-पाक के बीच सामान्य रिश्तों का पक्षधर रहा है और उम्मीद है कि दोनों देश किसी भी विवाद को राजनीतिक और राजनयिक संवाद और द्विपक्षीय तरीकों से सुलझाएंगे।
-एजेंसियां

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