RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, देश के सच्चे मुसलमानों को संघ से डर नहीं लगता

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सच्चे मुसलमानों को संघ से डर नहीं लगता। संघ राजनीतिक दल इसलिए नहीं है क्योंकि राजनीति समाज को तोड़ती है। वे बृहस्पतिवार को विवि के कुलपतियों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों से चर्चा कर रहे थे।
पांच दिवसीय दून प्रवास के चौथे दिन शिक्षाविदों से चर्चा के दौरान उन्होंने कई प्रश्नों के उत्तर दिए। शिक्षाविदों ने पूछा कि संघ एक राजनीतिक दल क्यों नहीं है। इसके उत्तर में उन्होंने कहा कि राजनीति समाज को तोड़ती है। संघ का कुछ दलों का विरोध के प्रश्न पर संघ प्रमुख ने कहा कि यह उनसे पूछना चाहिए। स्वार्थ अथवा अज्ञान के कारण वे ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत विचारधारा वाली कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, मुस्लिम लीग के लोगों की भी संघ सहायता करता है।
मुसलिम संघ को लेकर असहज क्यों हैं और वे भय क्यों खाते हैं, इस प्रश्न के उत्तर में संघ प्रमुख ने कहा कि सच्चे मुसलमानों को संघ से डर नहीं लगता। शिक्षाविदों ने उनसे पूछा कि संघ अपने कार्यों का प्रचार क्यों नहीं करता? जवाब में भागवत ने कहा कि संघ अपना कर्तव्य समझकर मातृभूमि की सेवा करता है, प्रसिद्धि के लिए नहीं।
उन्होंने असम के एक प्रचारक का उल्लेख किया कि वे वृद्ध हो गए तो वे असम में ही रहे। नागपुर के लोगों ने उनका अभिनंदन करना चाहा, लेकिन वे नहीं गए। पिछले पांच दशकों में जनसंख्या वृद्धि का उपलब्ध संसाधनों पर दबाव का विश्लेषण होना चाहिए। उन्होंने जनसंख्या संतुलन पर जोर दिया।
संघ प्रमुख ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा व्यवसाय हो गई है और इसमें आमूलचूल बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा देने की वकालत की जिससे वे कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बन सकें। साथ ही अभिभावकों से भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि संघ ने विद्या भारती, विद्यार्थी परिषद, भारतीय शिक्षक मंडल, शैक्षिक महासंघ के प्रयोग किए।
विकेंद्रित योजना से शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार लाए जा सकते हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर कहा कि एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम 13 वर्ष पुराना है। मीडिया की शिक्षण संस्थानों को लेकर यह धारणा है कि लड़के वहां तोड़फोड़ करते हैं, इस पर संघ प्रमुख ने कहा कि जो एक प्रतिशत खराब हैं, उन्हें 99 प्रतिशत सही लोग रोकेंगे।
आरएसएस ने समाज के हर वर्ग के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। सबको न्योता है कि वह संघ के भीतर आएं, देखें और जानें कि ये संगठन क्या कर रहा है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सबके लिए दरवाजे खोलने का औचित्य बेहद रोचक ढंग से सामने रखा।
देहरादून पहुंचे भागवत ने कार्यक्रम में शामिल लोक कलाकारों और साहित्यकारों को एक कहानी सुनाई। इसका मूल मंत्र था कि बिना देखे बोला जाएगा तो वह गलत ही दिखेगा। संघ प्रमुख ने कहानी सुनाई। कहा-दो दोस्त थे, उनमें से एक नेत्रहीन था जबकि दूसरा सामान्य। एक दिन सामान्य दोस्त ने कहा कि उसने खीर खाई है। नेत्रहीन ने पूछा खीर कैसी होती है।
जवाब मिला-सफेद। उसने कहा-सफेद कैसा होता है, जवाब मिला-बगुले की तरह। बगुले के बारे में पूछा तो दोस्त ने उसे किसी तरह समझाया। नेत्रहीन ने आखिर में कहा-खीर बगुले की तरह टेढ़ी होती है तो फिर गले में अटकी तो नहीं। संघ प्रमुख ने कहा कि इसी तरह का मामला आरएसएस का है।
लोगों को संघ के बारे में कुछ पता नहीं होता और फिर तरह तरह की गलत बातें विस्तार पाती हैं इसीलिए संघ ने समाज के सभी वर्गों के लिए अपने दरवाजे खोलने का निर्णय लिया है। संघ के भीतर आएं और उसे विस्तार से समझें और जाने, उसके बाद प्रतिक्रिया दें।
संघ प्रमुख मोहन भागवत का सुबह चार बजे उठने का नियम है। देहरादून में उन्होंने इसमें कहीं तब्दीली की गुंजाइश नहीं रखी है। इसके बाद उन्होंने योग और पूजा-अर्चना का अपना क्रम जारी रखा। बैठकों के बीच में मिले समय में वह व्यक्तिगत तौर पर कई लोगों से मिले। हालांकि राजनीतिक लोगों की संघ प्रमुख से मुलाकात नहीं हो पाई। भाजपा के कई नेता संघ कार्यालय के आस-पास तो दिखाई दिए, लेकिन भीतर जाने का साहस नहीं जुटा पाए।
-एजेंसियां

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