चीन के महंगे रेस्त्राओं में मिलता है भुना हुआ कोबरा और भालू के भुने हुए पंजे

भुना हुआ कोबरा सांप, भालू के भुने हुए पंजे, बाघ की हड्डियों से बनी शराब जैसी डिश चीन के महंगे रेस्त्राओं में मिलती है.
चीन के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे रेस्त्रां हैं जहां पर बैट सूप यानी चमगादड़ का सूप परोसा जाता है. इन सूप के कटोरों में आपको एक साबुत चमगादड़ मिलता है.
कई सूपों में बाघ के अंडकोष और पाम सिवेट के शरीर के अंग शामिल होते हैं.
जानवरों को बेचने वाले कुछ बाज़ारों में चूहे, बिल्लियां, सांप समेत कुछ दुर्लभ चिड़ियों की प्रजातियां भी बेची जाती हैं.
चीन में कुछ जानवरों को जहां उनके स्वाद की वजह से खाया जाता है वहीं कुछ जानवरों का इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं में किया जाता है.
गौरतलब है कि चीन में कोरोना वायरस से अब तक सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं.
दुनिया भर के दूसरे देशों में भी इस वायरस से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये वायरस चीनी शहर वुहान के समुद्री जीवों को बेचने वाले बाज़ार से निकला है.
ये बाज़ार जंगली जीवों जैसे सांप, रैकून और साही के अवैध व्यापार के लिए चर्चित था.
इन जानवरों को पिंजड़े में रखा जाता था और इनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों और दवाइयों के रूप में किया जाता था.
ख़ूबे प्रांत पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से इस बाज़ार पर भी प्रतिबंध लग गया है.
चीन दुनिया में जंगली जानवरों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है जहां ये व्यापार वैध और अवैध ढंग से चलाया जाता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, इस वायरस के प्राथमिक स्रोत चमगादड़ हो सकते हैं.
ये भी कहा जा रहा है कि ये वायरस इंसानों में आने से पहले किसी अन्य जानवर में गया होगा, जिसकी पहचान अब तक नहीं की जा सकी है.
चीन में जानवरों के व्यापार पर जांच करने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था से जुड़े एक इंवेस्टिगेटर बताते हैं, “चीन में ‘येवै’ का विचार (चीनी भाषा में इस शब्द का अनुवाद जंगली टेस्ट होता है) घर-घर में बोला जाने वाला टर्म है जो कि चीन में सांस्कृतिक रूप से एडवेंचर, साहस, खोजी प्रकृति और विशेषाधिकार को बताता है.”
जानवरों के अंगों से बनी पारंपरिक चीनी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर माना जाता है कि जानवरों के अंगों में कई बीमारियां जैसे कि पुरुष नपुंसकता, आर्थराइटिस और गठिया जैसे रोगों को दूर करने की क्षमता होती है.
चीन में पेंगोलिन जानवर के कवच की मांग ज़्यादा होने की वजह से चीन में ये जानवर लगभग विलुप्त हो चुका है.
अब दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ये सबसे ज़्यादा शिकार किया जाने वाला जानवर बन चुका है.
चीनी दवाओं में गेंडे के सींग का अत्यधिक इस्तेमाल होता है और इस चलन की वजह से गेंडा भी एक संकटग्रस्त जानवर बन चुका है.
चीन में ये सब तब हो रहा है जबकि लोगों को पता है कि 70 फ़ीसदी नए वायरस जानवरों, विशेषत: जंगली जानवरों से आए हैं.
कोरोना वायरस ने एक बार फिर चीन में जंगली जानवरों के धड़ल्ले से चल रहे व्यापार को सबके सामने ला दिया है. वन्यजीव संरक्षण संस्थाए इसकी लगातार आलोचना करती हैं. क्योंकि इस व्यापार के चलते जानवरों की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं.
कोरोना वायरस फैलने के बाद चीनी सरकार ने वन्य जीवों के व्यापार पर फौरी तौर पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि इस वायरस को फैलने से रोका जा सके.
लेकिन वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाएं इस कोशिश में है कि इस मौक़े का इस्तेमाल इस व्यापार को पूरी तरह से रोकने में किया जाए.
क्या चीन वन्य जीव संरक्षकों की बात सुनेगा?
क्या कोरोना वायरस के संक्रमण से वन्यजीवों के अवैध व्यापार रोकने के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों को बल मिलेगा और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए पैदा होने वाले ख़तरों को टाला जा सकेगा?
विशेषज्ञों की मानें तो ये बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है और ऐसा होना लगभग असंभव जान पड़ता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ ख़तरनाक वायरस सार्स और मर्स भी चमगादड़ों से आए थे.
लेकिन वे भी इंसानों में आने से पहले सिवेट कैट और ऊंटों से होकर आए.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़े डॉ. बेन इमबारेक ने बताया, “हम उन वन्य जीवों की प्रजातियों के संपर्क और उनके प्राकृतिक आवास में पहुंच रहे हैं जिनका हमसे पहले कोई संबंध नहीं था. ऐसे में हम नई बीमारियों का सामना कर रहे हैं जो कि पहले इंसानों में नहीं देखी गई हैं. ये बीमारियों ज्ञात वायरसों, बैक्टीरिया और परजीवियों में भी नहीं देखी गई हैं.”
हाल में किया गया एक विश्लेषण बताता है कि ज़मीन पर चलने वाले हड्डीधारी वन्यजीवों की कुल 32 हज़ार प्रजातियों में से 20 फ़ीसदी प्रजातियों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में वैध और अवैध ढंग से ख़रीदा-बेचा जा रहा है.
इसका मतलब ये हुआ कि स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसर्पों और उभयचरों की 5,500 से ज़्यादा प्रजातियों की ख़रीद-फरोख़्त जारी है.
दुनिया में जानवरों का अवैध व्यापार 20 अरब डॉलर का है. और ये ड्रग्स, मानव तस्करी और नक़ली सामान के बाद चौथे नंबर पर आता है.
-BBC

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