अक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम से एंजाइना या फिर हार्ट अटैक का खतरा

Acute Coronary Syndrome (अक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम) एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें कोरोनरी आर्टरी में ब्लड का फ्लो अचानक ही कम हो जाता है। इस वजह से ब्लड पर्याप्त मात्रा में हार्ट तक नहीं पहुंच पाता। इसके परिणास्वरूप व्यक्ति को स्ट्रोक, एंजाइना या फिर हार्ट अटैक आ सकता है। यह आमतौर पर कोरोनरी आर्टरी की दीवारों पर फैट जमा होने की वजह से होता है। इन्हीं आर्टरी की वजह से हार्ट को जरूरी पोषक तत्वों और ऑक्सीजन पहुंचती है। अगर हार्ट तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचे तो हार्ट मसल्स के सेल्स की मृत्यु हो सकती है। ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक की संभावना अधिक होती है।
1- छाती में दर्द होता है, जिसे एंजाइना भी कहा जाता है। कई बार छाती में दर्द के अलावा, दबाव और जलन भी महसूस होती है।
2- यह दर्द छाती से होता हुआ कंधों, बाजुओं और गर्दन तक पहुंच जाता है।
3-उल्टी आने लगती है और पाचन सही तरह से नहीं हो पाता।
4- सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
5- अचानक ही खूब पसीना आने लगता है और थकान होने लगती है।
हालांकि ये लक्षण व्यक्ति की उम्र, लिंग और मेडिकल कंडीशन के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं।
इसके कारण क्या हैं और किन्हें खतरा है?
जब कोरोनरी आर्टरी की दीवारों पर फैट जमा हो जाता है, तो वे ब्लॉक हो जाती हैं। इससे हार्ट तक न तो सही तरह से ब्लड का फ्लो हो पाता है और न ही पोषक तत्व वहां तक पहुंच पाते हैं। ऐसी स्थिति में हार्ट मसल्स की कोशिकाओं की मृत्यु तो हो ही जाती है, लेकिन अगर मृत्यु न भी हो तो भी ये कोशिकाएं इतनी कमजोर हो जाती हैं कि सही तरीके से काम नहीं कर पातीं।
इलाज
अक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम के इलाज के लिए पहले इसका पता लगाया जाना जरूरी है। इसके लिए ईसीजी किया जाता है, जिसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा ब्लड टेस्ट और कार्डिएक परफ्यूजन स्कैन के जरिए भी इस सिंड्रोम का पता लगाया जाता है। इन टेस्ट के आधार पर ही डॉक्टर यह निर्णय लेते हैं कि लक्षण एंजाइना के हैं या फिर हार्ट अटैक के। फिर इसी हिसाब से इलाज शुरू किया जाता है।
बता दें कि अक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम एक मेडिकल इमर्जेंसी है। यानी इसके लिए तुरंत इलाज की जरूरत होती है। अगर किसी भी व्यक्ति में ऊपर बताए गए लक्षण दिखें तो उसे जल्द से जल्द इलाज डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टरी इलाज के अलावा डायट में बदलाव करके भी अक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम से बचा जा सकता है। इसके लिए:
स्मोकिंग न करें और शराब भी न पीएं।
हेल्दी डायट लें और कम फैट का सेवन करें
जंक फूड और फैड डायट से दूरी बनाएं। फल, सब्जियों के अलावा लीन प्रोटीन खाएं।
नियमित रूप से अपना कलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर का लेवल चेक करें।
फिटनस पर ध्यान दें। रोजाना एक्सर्साइज करें और बॉडी को ऐक्टिव रखें।
अपना वजन भी समय-समय पर चेक करते रहें और उसे कंट्रोल में रखें।
-एजेंसियां

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