सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के गठजोड़ में दरार

रियाद। लंबे समय से हर मुद्दे पर साथ रहने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के इस मजबूत गठजोड़ में दरार पड़ती दिख रही है। यमन के अदेन शहर पर यूएई के समर्थन वाले सशस्त्र समूहों के नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद उभर आए हैं।
दुनिया के इस्लामिक देशों की बात की जाए तो सऊदी अरब और संयुक्त राष्ट्र अमीरात की अकसर तमाम मुद्दों पर एकराय रहती है। दोनों की दोस्ती ऐसी है कि ईरान को जवाब देने, कतर को अलग करने से लेकर यमन में युद्ध छेड़ने तक दोनों की एक राय रही है। यही नहीं खाड़ी के इन दोनों देशों के नेताओं के नाम भी एक से हैं, जैसे मोहम्मद बिन सलमान और मोहम्मद बिन जाएद। हालांकि दोनों देशों के इस मजबूत गठजोड़ में दरार पड़ती दिख रही है। यमन के अदेन शहर पर यूएई के समर्थन वाले सशस्त्र समूहों के नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद उभर आए हैं।
यमन में दोनों देश मिलकर लड़ रहे
यमन में 2015 से ही गृह युद्ध के हालात हैं। पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सलेह का समर्थन पाने वाले हुथी विद्रोहियों ने कैपिटल सिटी सना पर कब्जा जमा लिया था। हुथियों को ईरान का समर्थन प्राप्त था। यमन के घटनाक्रम में ईरान के शामिल होने से सऊदी अरब और यूएई को आशंका थी कि इससे उनके प्रतिद्वंद्वी का कद बढ़ जाएगा। इसके बाद दोनों देशों ने अपने गठजोड़ में बहरीन को भी शामिल किया और तीनों ने मिलकर हुथी विद्रोहियों से मिलने के लिए एक सेना का गठन किया। यहां तक कि इस सेना को अमेरिका ने मिलिट्री इंटेलिजेंस की सुविधा भी दी।
अब तक 91,600 लोग मारे गए
हालांकि 4 सालों के बाद भी अब तक किसी भी पक्ष को निर्णायक जीत नहीं मिली है। एक संगठन के आंकड़ों के मुताबिक बीते 4 सालों में यमन में 91,600 लोग सैन्य संघर्ष में मारे गए हैं। इनमें से 11,700 नागरिक सीधे निशाना बनाए जाने की वजह से और करीब 67 पर्सेंट लोग सऊदी-यूएई के एयरस्ट्राइक में मारे गए हैं। इसके अलावा 30 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अब तक के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक माना है।
यूएई के समर्थन वाली सेना के कब्जे में अदेन शहर
अदेन शहर को यूएई के समर्थन वाले सशस्त्र बल ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। इस शहर से ही यमन के राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी की सरकार संचालित होती है। यूएई के समर्थन वाले सशस्त्र बल साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ने इस पर कब्जा जमा लिया है। हादी ने यूएई पर इस फोर्स के सपॉर्ट में एयर स्ट्राइक करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सऊदी से अपील की है कि वह यूएई को ऐसा करने से रोके।
सऊदी से अलग गेम खेल रहा है UAE
विदेश नीति के एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूएई के राष्ट्राध्यक्ष मोहम्मद बिन जायद कैलकुलेटेड गेम खेल रहे हैं। उनका मानना है कि यूएई को ईरान के साथ सीधी जंग से बचना चाहिए। वह खुद को सऊदी अरब के जमाल खशोगी हत्याकांड से भी बचाने की कोशिश में हैं। वह खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका का विश्वस्त सहयोगी बनकर रहना चाहते हैं। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच असहज संबंधों का भी वह लाभ उठाने की कोशिश में हैं।
…तो दुनिया को बदलना होगा दृष्टिकोण
यूएई अब भी सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन का हिस्सा है। यदि वह इससे बाहर निकलता है या अपनी भागीदारी को सीमित करता है तो दुनिया को सऊदी अरब और यूएई को एक साथ देखने की अपनी नीति पर दोबारा विचार करना होगा।
-एजेंसियां

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