रिपोर्ट से खुलासा: आर्य भारत के ही मूल निवासी, नहीं आए बाहर से

हरियाणा के राखीगढ़ी में खुदाई में मिले नरकंकालों के अवशेषों के अध्यन्न से कई अहम खुलासे हुए हैं। इस रिपोर्ट में उन दावों को पूरी तरह खारिज किया गया है, जिसमें कहा गया था कि आर्य बाहर से भारत में आए थे। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि शिकार करना, खेती और पशुपालन भारत के मूल निवासियों ने सीखा था।

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली टीम के प्रमुख प्रोफेसर वसंत शिंदे ने कहा, ‘ये पेपर्स इस तरफ इशारा करते हैं कि आर्यन हमले और आर्यन्स के बाहर से आने दावे निराधार हैं। इसके अलावा यह भी साफ है कि शिकार-संग्रह से आधुनिक समय के सभी विकास यहां के लोगों ने खुद किए थे।’

#Exclusive interview with Prof Vasant Shinde, VC Deccan College. Harappan’s were the Vedic people. No Aryan invasion/migration took place #watch

इस स्टडी को पूरा करने में 3 साल का समय लगा है। स्टडी करने वाली टीम में भारत के पुरातत्वविद और हारवर्ड मेडिकल स्कूल के डीएनए एक्सपर्ट शामिल हैं।
इस टीम ने ही गुरुवार को साइंटिफिक जनरल ‘सेल अंडर द टाइटल’ नाम से रिपोर्ट पब्लिश की है।
हरियाणा के राखीगढ़ी से मिले एक नरकंकाल के अध्यन्न के आधार पर यह रिपोर्ट ली गई है।
रिपोर्ट में तीन बिंदुओं को मुख्य रूप से दर्शाया गया है। पहला, प्राप्त कंकाल उन लोगों से ताल्लुक रखता था, जो दक्षिण एशियाई लोगों का हिस्सा थे। दूसरा, 12 हजार साल से एशिया का एक ही जीन रहा है। भारत में विदेशियों के आने की वजह से जीन में मिक्सिंग होती रही। तीसरा, भारत में खेती करने और पशुपालन करने वाले लोग बाहर से नहीं आए थे। हड़प्पा सभ्यता के बाद आर्यन बाहर से आए होते तो अपनी संस्कृति साथ लाते।
-एजेंसियां

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