तीन बैंकों के प्रस्‍तावित मर्जर से प्रभावित होंगे रिटेल कस्‍टमर्स

मुंबई। बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के प्रस्तावित मर्जर से न केवल उनकी बैलेंस शीट और बैंकिंग सिस्टम, बल्कि उनके रिटेल कस्टमर्स पर भी असर पड़ेगा। अगर आपका अकाउंट इन बैंकों में से किसी के साथ है तो आपको किन बदलावों का सामना करना पड़ सकता है इसके बारे में हम यहां आपको जानकारी दे रहे हैं।
अकाउंट नंबर, कस्टमर ID में हो सकता है बदलाव
आपको एक नया अकाउंट नंबर और कस्टमर ID मिल सकता है। यह पक्का करें कि आपका ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर बैंक के पास अपडेटेड हो, जिससे किसी बदलाव के बारे में आपको तुरंत जानकारी मिल सके। आपके सभी अकाउंट एक ID के साथ टैग होंगे। उदाहरण के लिए, अगर आपका एक अकाउंट विजया बैंक और एक अन्य देना बैंक के साथ है तो दोनों अकाउंट के लिए एक कस्टमर ID अलॉट की जाएगी।
यह भी संभव है कि नई एंटिटी सिक्योरिटी की एक और परत जोड़ दे। Pwc इंडिया के पार्टनर (रिस्क एश्योरेंस), विवेक अय्यर ने बताया, ‘समान बैंक के साथ एक से अधिक अकाउंट के लिए कस्टमर ID एक ही होगी। हालांकि, जॉइंट होल्डर के लिए एक अलग यूजर ID जेनरेट की जा सकती है जिससे वह केवल संबंधित अकाउंट तक ही पहुंच सके।’
थर्ड पार्टीज के साथ डिटेल्स अपडेट करनी होंगी
जिन कस्टमर्स को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड अलॉट किए गए हैं, उन्हें इन डिटेल्स को विभिन्न थर्ड पार्टी एंटिटीज के साथ अपडेट करना होगा। इनमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरेंस कंपनियां, म्यूचुअल फंड और नैशनल पेंशन सिस्टम (NPS) शामिल हैं। आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के चीफ एक्चुरियल ऑफिसर, अनिल कुमार सिंह ने कहा, ‘कस्टमर्स अपने पॉलिसी अकाउंट के जरिए ऑनलाइन या ब्रांच जाकर नए अकाउंट की डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं।’
नए ECS, SIP निर्देश
मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ECS) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लीयर करना होगा। अपने बैंक, फंड हाउस और इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क कर नए ECS निर्देश जारी करें। जरूरत होने पर आपको ECS से जुड़ा फॉर्म ऑनलाइन या अपनी ब्रांच के जरिए भरना होगा। ऑटो डेबिट या सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के लिए आपको नया SIP रजिस्ट्रेशन और इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है। ऐसा ही लोन की ईएमआई के लिए भी करना होगा। कस्टमर्स को आमतौर पर 6-12 महीनों के लिए बाकी के चेक और मौजूदा चेक बुक का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है।
बंद हो सकती है लोकल ब्रांच
बैंक की कई ब्रांच बंद हो सकती हैं और कस्टमर्स को नई ब्रांच में जाना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, आपकी मौजूदा होम ब्रांच ऐसी स्थिति में बंद हो सकती है जब एक्वायर करने वाले बैंक की अपनी ब्रांच पास में हो। अपनी ब्रांच के लिए लागू नए IFSC और MICR कोड का ध्यान रखें क्योंकि आपको फंड ट्रांसफर और अन्य फाइनैंशल ट्रांजैक्शंस के लिए इनकी जरूरत होगी। कंज्यूमर वॉयस के एडवाइजर, गोपाल रवि कुमार ने कहा, ‘SBI के सहयोगी बैंकों के मर्जर में एकाउंट नंबर नहीं बदले थे, लेकिन होम ब्रांच बदल गई थी और एक नया ब्रांच कोड लागू हुआ था।’
डिपॉजिट, लेंडिंग रेट में जल्द बदलाव नहीं
कोटक महिंद्रा बैंक के प्रेसिडेंट (रिटेल लायबिलिटीज एंड ब्रांच बैंकिंग), विराट दीवानजी ने बताया, ‘ऑफिशल मर्जर की तिथि पर एक्वायर करने वाले बैंक की ओर से ऑफर किया जाने वाला फिक्स्ड डिपॉजिट रेट लागू होगा।’ हालांकि, मौजूदा फिक्स्ड डिपॉजिट पर मैच्योरिटी तक पहले से तय इंटरेस्ट मिलेगा। इसी तरह लोन पर इंटरेस्ट रेट भी वास्तविक एग्रीमेंट के अनुसार जारी रहेगा। होम लोन के लिए मौजूदा इंटरेस्ट रेट तब तक बरकरार रहेगा जब तक नई एंटिटी इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करती।
-एजेंसियां

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