अमेरिका और यूरोप के जिम्‍मेदार लोगों ने इमरान पर क्षेत्रीय अस्‍थिरता का आरोप लगाया

भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत टिम रोमर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया है। उन्होंने आग्रह किया है कि भारत के साथ रणनीतिक संबंधों पर अमेरिकी नीति स्थिर बनी रहनी चाहिए। इसके साथ ही आतंकवाद-विरोधी सहयोग पर वास्तविक परिणामों के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए। बताते चलें कि रोमर अमेरिका-भारत साझेदारी को व्यापक बनाने और गहरा करने के लिए जिम्मेदार थे।
न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित इमरान के लेख को टैग करते हुए रोमर ने एक ट्वीट में लिखा- पाकिस्तान के पीएम इमरान खान कश्मीर की स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी पर हमला करते हैं, और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाते हैं। अमेरिकी नीति को भारत के साथ रणनीतिक संबंधों की ओर स्थिर रहना चाहिए, सीटी सहयोग पर जोर देना चाहिए, और वास्तविक परिणामों के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए। बताते चलें कि उस लेख में इमरान ने कश्मीर मसले पर परमाणु युद्ध के साथ दुनिया को धमकी दी है।
दूसरी ओर यूरोपियन संसद के एक सदस्य ने कहा है कि अनुच्छेद 370 के खत्म होने से कश्मीर में सक्रिय कई आतंकवादी संगठनों को जड़ से उखाड़ने में मदद मिलेगी। यूरोपीय संसद के मासिक समाचार पत्र ईपी टुडे में प्रकाशित एक लेख में मेंबर ऑफ यूरोपियन पार्लियामेंट टॉमस जेडकोवस्की ने कहा कि ऐसे आतंकवादी समूह कश्मीर घाटी और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा फैला रहे हैं।
ये सशस्त्र समूह कथित रूप से जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक संगठनों से जुड़े व्यक्तियों पर हमलों के लिए जिम्मेदार थे, जिनमें राजनीतिक दल के कम से कम छह कार्यकर्ताओं और एक अलगाववादी नेता की हत्या हुई है। अक्टूबर 2018 में स्थानीय चुनावों में इन सशस्त्र समूहों ने उन कश्मीरियों को धमकी दी थी, जो चुनाव में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे।
इसके साथ ही चुनाव में खड़े होने वाले नेताओं को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने तुरंत अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया और अपने इस काम के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो उन्हें गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। टॉमस ने कहा कि सशस्त्र समूहों ने पिछले चुनावों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को छिटपुट धमकी दी थी, लेकिन साल 2018 में हमलों की संख्या सबसे अधिक है।
पाकिस्तान आधारित सशस्त्र समूह ज्यादातर कश्मीर में काम करते हैं। वे PoK में राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता-समर्थक राजनीतिक कार्यकर्ताओं को परेशान करते रहते हैं और लोगों को धमकाते हैं। पिछले साल 2 अगस्त को एक अज्ञात सशस्त्र समूह के सदस्यों ने गिलगित-बाल्टिस्तान के डायमर जिले में कम से कम 12 स्कूलों पर हमला कर उन्हें जला दिया था।
इस साल 14 फरवरी को पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए एक आत्मघाती हमला किया गया था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। लेख में लिखा गया है कि भारत ने समूह की गतिविधियों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन से इस बात पुष्टि की थी कि जेएमएम के संस्थापक मोहम्मद मसूद अजहर पाकिस्तान में मौजूद था।
-एजेंसियां

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