प्रमुख नीतिगत दरों में रिजर्व बैंक ने नहीं किया कोई बदलाव

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रीपो रेट 6.5 प्रतिशत और रिवर्स रीपो रेट 6.25 प्रतिशत यथावत रखा गया है। इससे पहले लगातार 2 मौद्रिक नीति समीक्षा में रीपो रेट में बढ़ोत्तरी की गई थी। कच्चे तेल में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों को बढ़ाया जा सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी शोध रिपोर्ट इकोरैप में कहा था कि रिजर्व बैंक को रुपये की गिरावट थामने के लिए ब्याज दर में कम से कम 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करनी चाहिए। वहीं, मॉर्गन स्टेनली ने भी कहा था कि उसे अक्टूबर की समीक्षा बैठक में रिजर्व बैंक द्वारा अल्पावधि ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद है। हालांकि आरबीआई ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है।
क्या है रीपो रेट
बैंकों को अपने दैनिक कामकाज के लिए अकसर ऐसी बड़ी रकम की जरूरत होती है जिनकी मियाद एक दिन से ज्यादा नहीं होती। इसके लिए बैंक जो विकल्प अपनाते हैं, उनमें सबसे सामान्य है केंद्रीय बैंक (भारत में रिजर्व बैंक) से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेना। इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे ही रीपो रेट कहते हैं।
रीपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और इसलिए बैंक ब्याज दरों में कमी करते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज के तौर पर दी जा सके। रीपो दर में बढ़ोत्तरी का सीधा मतलब यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से रात भर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। साफ है कि बैंक दूसरों को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करते हैं, वह भी उन्हें बढ़ाना होगा।
रिवर्स रीपो रेट
नाम के ही मुताबिक रिवर्स रीपो रेट ऊपर बताए गए रीपो रेट से उलटा होता है। बैंकों के पास दिन भर के कामकाज के बाद बहुत बार एक बड़ी रकम शेष बच जाती है। बैंक वह रकम अपने पास रखने के बजाय रिजर्व बैंक में रख सकते हैं, जिस पर उन्हें रिजर्व बैंक से ब्याज भी मिलता है। जिस दर पर यह ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रीपो रेट कहते हैं।
अगर रिजर्व बैंक को लगता है कि बाजार में बहुत ज्यादा नकदी है, तो वह रिवर्स रीपो रेट में बढ़ोत्तरी कर देता है, जिससे बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपना धन रिजर्व बैंक के पास रखने को प्रोत्साहित होते हैं और इस तरह उनके पास बाजार में छोड़ने के लिए कम धन बचता है।
-एजेंसियां

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