NGT को भेजी गई रिपोर्ट: गोमती के किनारे मॉर्निंग वॉक करना भी सेहत के लिए घातक

NGT को भेजी गई रिपोर्ट: गोमती के किनारे मॉर्निंग वॉक करना भी सेहत के लिए घातक
NGT को भेजी गई रिपोर्ट: गोमती के किनारे मॉर्निंग वॉक भी सेहत के लिए घातक

लखनऊ। गोमती का पानी पीना, डुबकी लगाना या आचमन करना तो दूर, उसके किनारे घूमना भी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति की तरफ से NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) को भेजी गई रिपोर्ट में शहर वालों को रिवर फ्रंट समेत गोमती के किनारों पर मॉर्निंग वॉक से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि नदी के कचरे की सड़न के कारण हवा भी बिगड़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक इसे रोकने में मुख्य सचिव समेत प्रदेश सरकार के आला अधिकारी पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं। समिति के सचिव और पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह ने नदी के इस हाल के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया है।
अनुश्रवण समिति की रिपोर्ट में लखनऊ के अलावा 10 जिलों में भी गोमती में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बताया गया है।
पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर-खीरी, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, फैजाबाद, सुलतानपुर, प्रतापगढ़ और जौनपुर के लोगों को भी गोमती में स्नान करने या उसके पानी से आचमन न करने की सलाह दी गई है। प्रदेश सरकार को सुझाव दिया गया है कि इन जिले के लोगों को इस बारे में जागरूक करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को दी जाए। गोमती सफाई में जल निगम की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक सीवरेज पंपिंग स्टेशन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट रोजाना 24 घंटे चलाने का दावा पूरी तरह से झूठा पाया गया। इसके लिए जल निगम पर तीन करोड़ रुपये का पर्यावरणीय हर्जाना लगाने की सिफारिश की गई है।
4 माह किया गोमती का अध्ययन
सफाई को लेकर गोमती ऐक्शन प्लान, नमामि गंगे और रिवर व्यू समेत तमाम परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये बहाने के बाद भी गोमती गंदी क्यों? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने इसी साल 23 जनवरी को कमिटी बनाई थी। इस कमेटी ने चार महीने तक गोमती नदी और उसमें फैल रहे प्रदूषण के अलग-अलग बिंदुओं पर अध्ययन के बाद सोमवार को अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंप दी। रिपोर्ट के मुताबिक गोमती नदी के कई हिस्सों से लिए गए पानी के नमूनों में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य पाई गई है। NGT के निर्देश पर उप्र ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने शहर के अलग-अलग हिस्सों से गोमती नदी के पानी के नमूने एकत्र किए। उसमें रासायनिक तत्वों की जांच, नागरिकों के साथ बैठकें और निरीक्षण करवाने के बाद 81 पन्नों की यह रिपोर्ट तैयारी की गई।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम पर जुर्माने की सिफारिश
NGT को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक गोमती नदी को साफ रखने में उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह से फेल साबित हुआ है। इसके लिए भारतीय दंड संहिता और पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986 के तहत प्रदूषण बोर्ड पर 6 करोड़ 84 लाख 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। वहीं, लखनऊ नगर निगम पर दो करोड़ रुपये का पर्यावरणीय हर्जाना लगाने की बात कही गई है। इससे पहले भी नगर निगम पर पांच करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया जा चुका है जो अब तक जमा नहीं हुआ है। ऐसे में एनजीटी अगर हर्जाने की सिफारिश मान लेता है तो निगम पर कुल 7 करोड़ रुपये का हर्जाना बकाया हो जाएगा।
कमेटी की अन्य सिफारिशें
जिलाधिकारी, जल निगम और संबंधित विभाग नमामि गंगा परियोजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के डीपीआर भेजें। इन डीपीआर पर 9 महीने के भीतर फैसला हो।
लखनऊ के अलावा 10 जिलों के नगर निगम और नगर पालिका पर एक-एक करोड़ रुपये का पर्यावरणीय हर्जाना लगाया जाए।
गोमती नदी के दोनों ओर 150 मीटर के दायरे में कोई निर्माण न किया जाए।
यूपी सरकार 100 करोड़ रुपये की गांरटी जमा करे। दो साल के भीतर नदी में गिरने वाले नालों के लिए एसटीपी नहीं बनने पर यह जब्त कर लिया जाए।
नगर आयुक्त, जिला मैजिस्ट्रेट, अधिशासी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि गोमती में गिरने वाले नालों के मुहाने पर स्टील की जाली लगाई जाए।
-एजेंसियां

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