धार्मिक मान्‍यताओं को तर्कों की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता: Justice Bobde

Principal Secretary to Prime Minister PK Mishra presents the warrant of appointment to Chief Justice of India-designate Justice Sharad Arvind Bobde in New Delhi
Principal Secretary to Prime Minister PK Mishra presents the warrant of appointment to Chief Justice of India-designate Justice Sharad Arvind Bobde in New Delhi

नई दिल्‍ली। भारतीय सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश Justice शरद अरविंद बोबडे का मानना है कि हर धर्म में ऐसी मान्यताएं होती हैं जिनके पीछे कोई तर्क नहीं होता और न ही उन्हें तर्कों की कसौटी पर कसा जा सकता है. Justice बोबडे ने ये बात अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिंदू’ को दिए एक साक्षात्कार में कही है.
उन्होंने कहा, “हर धर्म की अपनी प्रथाएं और मान्यताएं होती हैं जो रहस्य जैसी होती हैं. इन आस्थाओं के पीछे कोई तर्क नहीं होता है. अगर हम प्रार्थना को ही देखें तो हर धर्म में प्रार्थना करने के अलग-अलग तरीके हैं.”
सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत धर्म और आस्था से जुड़ी याचिकाओं की संख्या बढ़ने के बारे में जस्टिस बोबडे ने कहा कि इन याचिकाओं को देखकर पता चलता है कि लोग अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहा है.
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 हर भारतीय नागरिक को उसके अधिकारों के हनन पर सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार देता है.
‘द हिंदू’ ने जस्टिस बोबडे के इस इंटरव्यू को पहले पन्ने पर जगह दी है.
जस्टिस बोबडे का एक इंटरव्यूइंडियन एक्सप्रेसमें भी प्रकाशित हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस ने इस इंटरव्यू को पहले पन्ने पर एंकर स्टोरी बनाकर छापा है.
इस साक्षात्कार में जस्टिस बोबडे ने कहा है कि अयोध्या मामले की सुनवाई का हिस्सा बनने को वो अपनी ख़ुशकिस्मती और ‘लाइफ़ टाइम मौक़ा’ मानते हैं.
जस्टिस शरद अरविंद बोबडे भारत के सुप्रीम कोर्ट के 47वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. वो 18 नवंबर को शपथ लेंगे. सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.
-BBC

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