अमरीकी हमले से इस्लामिक स्टेट को नुक़सान का खंडन

Rejecting the loss to the Islamic State From American attack
अमरीकी हमले से इस्लामिक स्टेट को नुक़सान का खंडन

इस्लामिक स्टेट की समर्थक एजेंसी ‘अमाक’ द्वारा जारी किए गए एक बयान में अमरीकी हमले से आईएस को किसी भी तरह का नुक़सान होने का खंडन किया गया है.
अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि अमरीका के ‘मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स’ कहे जा रहे हथियार से किए गए हमले में तथाकथित इस्लामिक स्टेट गुट के 36 चरमपंथी मारे गए हैं और उनका ठिकाना ध्वस्त हो गया है.
अमरीका ने शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार में अपना अब तक का सबसे बड़ा ग़ैर-परमाणु बम गिराया था.
अमरीका ने हमले को सही बताया
अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना के प्रमुख जनरल जॉन निकॉल्सन ने कहा है कि ये बम पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में स्थित चरमपंथियों के ठिकाने के लिए सबसे मुफ़ीद हथियार था.
उन्होंने कहा कि इस हमले में 300 मीटर लंबी सुरंग और गुफाओं का नेटवर्क ध्वस्त कर दिया गया है.
जनरल निकॉल्सन ने कहा कि घटनास्थल पर अमरीकी सुरक्षाबल मौजूद हैं और आम नागरिकों के हताहत होने के सबूत और ख़बरें नहीं मिली हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के चीफ़ एक्जेक्यूटिव अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने पुष्टि की है कि ये हमला उनकी सरकार के साथ तालमेल से किया गया और इसमें ‘आम नागरिकों को किसी भी तरह का नुक़सान नहीं होने देने के लिए काफ़ी ध्यान रखा गया’.

अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में अपना सबसे बड़ा ग़ैर परमाणु बम गिराया है , लेकिन इसके लिए अमरीका ने यही समय क्यों चुना है?

कई सालों से युद्ध की मार झेल रहे अफ़ग़ानिस्तान में शांति लाने के मक़सद से रूस ने कई देशों के एक सम्मेलन का आयोजन किया है और इससे ठीक पहले अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान के नांगरहार में बम गिराया.

ये वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच बड़ी भूराजनीतिक होड़ का संकेत है.
-BBC

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