सिद्धार्थ विवि में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रिफ्रेसर कोर्स

संत कबीर नगर/सिद्धार्थ नगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : विविध परिप्रेक्ष्य” विषय पर आयोजित सात दिवसीय रिफ्रेसर कोर्स के उद्घाटन अवसर पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र के कुलपति प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य कौशल युक्त नागरिक पैदा करना है।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कि जो भी प्रावधान प्रस्तावित है उसमें प्रत्येक भारतीय की इच्छा सन्निहित है। ग्राम समिति से लेकर भारत के बड़ी संख्या में शिक्षाविदों के विचार आमंत्रित कर समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को प्रस्तुत किया है ।हम सब जानते हैं की स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व और उसके उपरांत भारत में शिक्षा व्यवस्था के संचालन के लिए अनेक समितियां बनाई गई और स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत समय-समय पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वास्तव में राष्ट्र उन्मुख श्रेष्ठ ज्ञानवान नागरिक बनाने में सर्वथा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शिक्षा मात्र आज आजीविका का साधन नहीं है उसे मानव एवं समाज के उद्धार में से अनुप्रमाणित होना चाहिए। शिक्षा मनुष्य के अंतर्निहित पूर्णता को साकार स्वरूप प्रदान करने में सहायक की भूमिका निभाने वाली होनी चाहिए। इस उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का महत्व सर्वाधिक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस बात का प्रयास किया गया है कि शिक्षा केवल सूचना संप्रेषण का माध्यम तक सीमित ना रह जाए बल्कि मानविय प्रज्ञा को उन्मुख करने में प्रभावी भूमिका निभाएं ।मनुष्य के विभिन्न इच्छाओं को पूर्ण करने में समर्थ हो।

कुल मिलाकर कहा जाए कि शिक्षा पुरुषार्थ को प्राप्त करने में प्रमुख स्तंभ के रूप में होनी चाहिए ।पहली बार इस शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षकों की भूमिका को तय करते हुए उसे शिक्षण और अनवर अन्वेषण करने का अवसर उपलब्ध कराने वाला बनाया गया है ।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अंग्रेजों द्वारा स्थापित और स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारतवर्ष में लंबे समय तक संचालित मैकाले की शिक्षा व्यवस्था के तिलिस्म को पूरी तरीके से नस्ते नाबूत करने में सक्षम है।भारत के मातृभाषा और भारत की भाषा में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा और अनुसंधान करने का अवसर यहां के विद्यार्थियों को शिक्षकों को प्राप्त होगा। इस दृष्टि से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विविध आयामों को समझना और उसके अनुसार शिक्षा की संपूर्ण व्यवस्था का संचालन महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह रिफ्रेशर कोर्स अत्यंत समीचीन और उपयोगी है।

Siddharth University Kapilavastu's VC surendra dubey
Siddharth University Kapilavastu’s VC surendra dubey

इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा बहुत ही संपन्न और समृद्ध रही है । यद्यपि की गुलामी के काल खंडों में विशेष रूप से अंग्रेजी शासन व्यवस्था ने इसे कमजोर करने का अनवरत प्रयास किया और इसी नाते के भारत वर्ष में मैकाले की शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से अंग्रेजी शासन व्यवस्था की स्थापना और भारत के लोगों में आत्म हीनता का भाव पैदा करने में सफल रही है । दुर्भाग्य से स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत मैकाले द्वारा स्थापित उसी शिक्षा व्यवस्था में बरसों तक भारतीय समाज दुष्प्रभावित होता रहा लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 हम सब को अवसर प्रदान कर रहा है कि हम अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता और अपनी सोच जिस परिवेश में हम रहते हैं उसके अनुसार हम अध्ययन अध्यापन कर सके। वास्तव में भारत के युवाओं को सर्वांगीण विकास का अवसर उपलब्ध कराने वाली शिक्षा नीति है। शिक्षक की भूमिका और दायित्व भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक उस मूर्तिकार की भूमिका में होना चाहिए जिस प्रकार से पत्थर को तलाशते हुए मूर्तिकार मूर्ति को स्वरूप देता है उसी प्रकार शिक्षक को भी विद्यार्थी के के अंदर ज्ञान के भंडार को जागृत कर उसे योग्य और सफल नागरिक निर्मित करने की महती भूमिका में होना चाहिए। शिक्षक की भूमिका बालक के अंदर जिज्ञासा और रचनात्मकता की प्रवृत्ति को उभारने और उसे समाधान तक ले जाने के दोहरे दायित्व का निर्वहन के लिए हमेशा सचेत रहना चाहिए। शिक्षक विद्यार्थी को दृष्टि प्रदान करने वाला होता है। मातृभाषा में शिक्षा का अवसर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है। इसी के साथ अंतर विषयक अध्ययन का अवसर प्रदान कर रहा है ।वास्तव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लोकल से वह लोकल तथा स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय अवसर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएगा । कार्यक्रम में स्वागत भाषण सहायक कुलसचिव दीनानाथ यादव एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ पूर्णेश नारायण सिंह ने दिया ।

कार्यक्रम का संचालन एवं विषय प्रस्तावना रिफ्रेसर कोर्स के संयोजक अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के कार्यकारी अधिकारी प्रोफेसर सुशील कुमार तिवारी तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक एवं विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सहभागिता किया।
– नवनीत मिश्र

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