यूरोप की आर्थिक स्‍थिति सुधारने के लिए रिकवरी पैकेज़ राशि पर सहमति

यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच कई दिनों की बातचीत के बाद कोरोना वायरस रिकवरी पैकेज़ की राशि को लेकर एक सहमति बन गई है.
इसके तहत 27 देशों का संगठन 750 अरब यूरो यानी 64,115 अरब रुपये का कोष जुटाएगा. इस कोष की मदद से कोरोना वायरस के चलते होने वाले आर्थिक नुकसान से उबरने के लिए अनुदान और कर्ज दिए जाएंगे.
इस सम्मेलन के चेयरमैन चार्ल्स माइकल ने कहा है कि ये यूरोप के लिए एक “अहम लम्हा” था.
जब सामने आई एक दरार
इस बातचीत के दौरान कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देशों और कमजोर अर्थव्यवस्था वाले यूरोपीय देशों के बीच एक दरार सी पैदा होती हुई भी दिखी.
समाचार न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी द्वारा देखे गए समझौते से जुड़े एक दस्तावेज़ के मुताबिक़ इस समझौते के केंद्र में 390 अरब यूरो का अनुदान है जो महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों को दिया जाएगा.
इसके साथ ही यूरोपीय संघ के अगले सात सालों के बजट पर भी सहमति बन गई है जो कि 1.1 ट्रिलियन यूरो होगा.
बीते शुक्रवार शुरु होने वाले इस सम्मेलन में 90 घंटे की बातचीत हुई.
साल 2000 में फ्रांस के नाइस शहर में पांच दिनों तक चलने वाली बैठक के बाद ये यूरोपीय संघ के इतिहास की सबसे लंबी बैठक है.
ये सब कैसे हो पाया?
यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने 27 देशों के नेताओं के बीच सहमति बनने के बाद मंगलवार लगभग 03:15 GMT को ट्वीट किया जिसमें सिर्फ एक शब्द था– डील.
कई दिनों तक चली इस बातचीत के दौरान नेताओं के बीच बातचीत के दौरान आक्रामकता भी नज़र आई.
यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच एक दरार बनती भी दिखी है जिसके एक ओर आर्थिक रूप से कमजोर यूरोपीय देश थे और एक ओर इस महामारी से बुरी तरह प्रभावित देश थे.
महामारी से प्रभावित देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सुधारने के प्रति सजग थे लेकिन कमजोर अर्थव्यवस्थाओं वाले देश रिकवरी प्लान की राशि को लेकर चिंतित थे.
स्वघोषित कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश स्वीडन, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड समेत फिनलैंड ने 500 बिलियन यूरो को अनुदान के रूप में देने का विरोध किया.
इस समूह ने ही असल में डेनमार्क के राष्ट्रपति मार्क रुटे के नेतृत्व में 375 बिलियन यूरो की सीमा तय की थी. इशके साथ ही अनुदान के निवदेनों को ख़ारिज करने की शर्तें भी रखें.
अन्य सदस्य देश जैसे स्पेन और इटली 400 बिलियन यूरो से कम खर्च नहीं करना चाहते थे.
एक लम्हा ऐसा भी आया जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कथित रूप से अपना घूंसा मेज पर मारते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि ‘फ्रूगल फोर’ (कमजोर अर्थव्यवस्थाओं वाले चार देश) यूरोपीय परियोजना को ख़तरे में डाल रहे हैं.
390 बिलियन यूरो की राशि को एक समझौते के रूप में सुझाया गया था. और कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों ने बजट में छूट के मुद्दे पर बढ़त हासिल की.
यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रियाएं
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा कि ये“यूरोप के लिए एक ऐतिहासिक दिन”है.
बेल्जियम की प्रधानमंत्री सोफी विल्मेस ने ट्वीट किया है,“यूरोपीय संघ ने इससे पहले भविष्य में इस तरह निवेश नहीं किया है.”
मिचेल ने कहा कि ब्लॉक ने “हमारी सामुहिक ज़िम्मेदारी और एक साझे भविष्य में हमारे भरोसे” को दिखाया है.
-BBC

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