इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में बड़े बदलाव की सिफारिश

नई दिल्‍ली। डायरेक्ट टैक्स में सुधार के लिए बनी टास्क फोर्स ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। टास्क फोर्स ने जहां आम आदमी के लिए इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में बड़े बदलाव की सिफारिश की है। वहीं कॉर्पोरेट के लिए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) और मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स (मैट) को भी पूरी तरह से हटाने की सिफारिश की है। टास्क फोर्स का मानना है कि मौजूदा इनकम टैक्स छूट, इसकी दरें और स्लैब मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। सालाना 55 लाख से कम आदमनी वाले टैक्सपेयर्स को बड़ी राहद दी जा सकती है।
इस टास्क फोर्स के प्रमुख सीबीडीटी के सदस्य अखिलेश रंजन हैं। 21 महीने में कुल 89 बैठकों के बाद टास्क फोर्स ने यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट को जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद आम लोगों के साथ एक्सपर्ट से भी राय ली जाएगी। राय के आधार पर इसको अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार सहमति बनने के बाद इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार बजट में डायेक्ट टैक्स में बड़े बदलाव की घोषणा कर सकती है। यह ड्राफ्ट कानून, मौजूदा आयकर कानून का स्थान लेगा।
ITR हो आसान
सूत्रों के अनुसार टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इनकम टैक्स छूट, दरों और स्लैब में बदलाव की जरूरत है। इसमें समय-समय पर बदलाव की जरूरत पड़ती है। ऐसे में जरूरी है कि इसकी समीक्षा के लिए कोई मशीनरी विकसित की जाए। समीक्षा, आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई के आंकड़ों और इकनॉमिक ग्रोथ के आधार पर की जाए। इसके बाद समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर इनकम टैक्स की छूट, दरों और स्लैब में बदलाव पर फैसला लिया जाए। मौजूदा समय में इनकम टैक्स छूट, दरों और स्लैबों में बदलाव आम बजट में किया जाता है।
सरकार इंडस्ट्री और अन्य एक्सपर्ट से बात करने के बाद वित्तीय घाटे की स्थिति को देखते हुए इनकम टैक्स में किसी भी प्रकार की छूट आम टैक्सपेयर्स को देती है। टास्क फोर्स ने इनकम टैक्स रिटर्न को आसान बनाने की सिफारिश की है। इसके अलावा टास्क फोर्स ने कहा है कि टैक्स विवादों का निपटारा जल्द होना चाहिए। एक समय-सीमा तय होनी चाहिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी, कस्टम, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट और इनकम टैक्स के बीच जानकारी के लेन-देन की खास व्यवस्था करने की जरूरत है। इससे टैक्स चोरी पर लगाम लग सकती है।
कंपनियों पर खास मेहरबानी
टास्क फोर्स ने रिपोर्ट में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) को पूरी तरह से हटाने की बात कही है। जब कंपनियां डिविडेंड देती हैं 15 पर्सेंट डीडीटी लगता है। डीडीटी के ऊपर 12 पर्सेंट सरचार्ज और 3 पर्सेंट एजुकेशन सेस लगता है। इस तरह कुल मिलाकर डीडीटी की प्रभावी दर 20.35 पर्सेंट हो जाती है। इसके अलावा टास्क फोर्स ने मैट को भी पूरी तरह से हटाने की सिफारिश की है। मौजूदा समय में कंपनी के बुक प्रॉफिट पर 18.5 पर्सेंट मैट लगता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115जेबी के तहत मैट लगाया जाता है। टास्क फोर्स ने सभी के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर 25 पर्सेंट करने की सिफारिश है।
क्या होगा फायदा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर टास्क फोर्स की सिफारिशें मान ली गईं तो इससे आम टैक्सपेयर्स को काफी राहत मिलेगी। टैक्स एक्सपर्ट सुशील अग्रवाल के अनुसार अगर टास्क फोर्स ने इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में बदलाव की सिफारिश की है तो इसका मतलब है कि वह आम टैक्सपेयर्स को और छूट देने के पक्ष में है। जब कांग्रेस की यूपीए सरकार थी तो डीटीसी पर कमेटी का गठन किया था। उस वक्त वित्त की संसदीय कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा था कि इनकम टैक्स छूट में भारी बढ़ोत्तरी करने की जरूरत है। डीटीसी पर बनी कमेटी को इसी दिशा में काम करना चाहिए। 2017 में मोदी सरकार ने डायरेक्टर टैक्स पर कमिटी बनाई थी। अब इस कमिटी ने अगर डीडीटी और मैट को हटाने की बात की है तो यह अच्छा कदम होगा। इससे कंपनियों के पास ज्यादा पैसा उपलब्ध होगा।
-एजेंसियां

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