मसालों से ही व्यंजन बनता है स्वादिष्ट: पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा

टी.क्यू.एस. ग्रुप चिली के निदेशक पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा ने संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं को बताए होटल मैनेजमेंट के गुर

मथुरा। मसाले भोजन को स्वादिष्ट तो बनाते ही हैं, उसे पौष्टिकता भी प्रदान करते हैं। खाने में बहुतायत से प्रयोग होने वाले मसाले भोजन को सुगंधित और लजीज बनाने के साथ ही सेहत को भी दुरुस्त रखते हैं। खासकर हमारे जिगर के लिए तो ये मसाले किसी जड़ी-बूटी से कम नहीं होते। अतीत में दिल और दिल से संबंधित कई बीमारियों को ठीक करने के लिए कई खास मसालों का इस्तेमाल किया जाता था।

यह विचार टी.क्यू.एस. ग्रुप चिली के निदेशक पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा ने संस्कृति यूनिवर्सिटी के टूरिज्म एण्ड हॉस्पिटैलिटी के छात्र-छात्राओं से व्यक्त किए। पैट्रिको फैरो ने विद्यार्थियों को चिली के मसालों की विस्तार से न केवल जानकारी दी बल्कि कुछ व्यंजन बनाकर छात्र-छात्राओं को भी चखाया।

पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा ने छात्र-छात्राओं को बयाया कि मसालों का आयुर्वेद चिकित्सा में आज भी बहुत बड़ा योगदान है। इन दिनों मसालों पर हुए कई शोधों में वैज्ञानिकों ने न केवल मसालों की स्वास्थ्य उपयोगिता को माना है, बल्कि उन्हें दवाओं में शामिल किए जाने की वकालत भी की है। इस अवसर पर चिली की ही डायरेक्टर आफ इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट सिल्विया नोइमी डालर्स ने कहा कि भोजन में मसाले का प्रयोग ज्यादातर लोग उसका स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं, लेकिन इन मसालों में भोजन का स्वाद बढ़ाने के अलावा और भी कई प्राकृतिक गुण छिपे होते हैं, जो भोजन के पाचन में मदद तो करते ही हैं साथ ही हमारे स्वास्थ्य और सेहत को भी सही रखते हैं। सिल्विया नोइमी डालर्स ने कहा कि चिली के मसालों को भारतीय मसालों में मिलाकर व्यंजन को और स्वादिष्ट तथा स्वास्थ्यवर्धक बनाया जा सकता है। संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति सचिन गुप्ता और ओ.एस.डी. मीनाक्षी शर्मा ने चिली से आए आगंतुकों का तहेदिल से स्वागत किया। कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने कहा कि बच्चों आपने पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा और सिल्विया नोइमी डालर्स से जो कुछ सीखा है उस पर अमल करना भी जरूरी है।

संस्कृति यूनिवर्सिटी के टूरिज्म एण्ड हॉस्पिटिलिटी के विद्यार्थियों ने पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा और सिल्विया नोइमी डालर्स से होटल मैनेजमेंट से जुड़े कई सवाल किए, जिनका चिली के आगंतुकों ने समाधान किया। छात्रों ने उनसे चिली में खानपान निर्माण में प्रयुक्त होने वाली मशीनों, उपकरण, विधियों, उत्पाद, मेनू आदि की जानकारी भी हासिल की। पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा और सिल्विया नोइमी डालर्स ने विद्यार्थियों को हॉस्पीटैलिटी प्रोफेशनल बनने के गुर भी बताए। प्राध्यापक रोहन धमीजा और असिस्टेंट प्रोफेसर योगेश कुमार ने पैट्रिको फैरो सेफुल्वेदा और सिल्विया नोइमी डालर्स के अनुभवों को छात्र-छात्राओं के लिए काफी उपयोगी माना है।

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