चैंपियन ऑफ द अर्थ पुरस्कार ग्रहण कर पीएम मोदी ने कहा, दुनिया ने भारत के योगदान को स्‍वीकारा

Receiving Champion of the Earth award PM Modi said, World accept India's contribution
चैंपियन ऑफ द अर्थ पुरस्कार ग्रहण कर पीएम मोदी ने कहा, दुनिया ने भारत के योगदान को स्‍वीकारा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को दिल्ली के प्रवासी भारतीय केंद्र में एक समारोह में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित और सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार चैंपियन ऑफ द अर्थ से नवाजा गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेस ने अपने हाथों से पीएम मोदी को अवॉर्ड दिया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय दर्शन में प्रकृति के महत्व का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता और किए जा रहे कामों को गिनाया।
‘यह भारत की सवा सौ करोड़ जनता का सम्मान’
पीएम मोदी ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन भारत में होना गर्व की बात है। उन्होंने इसे भारत की सवा सौ करोड़ जनता का सम्मान बताया। पीएम मोदी ने कहा, ‘यह सम्मान पर्यावरण के संबंध में भारत की सवा सौ करोड़ जनता की प्रतिबद्धता का सम्मान है। भारत की नित नूतन और पुरातन संस्कृति का सम्मान है, जिसने प्रकृति में परमात्मा को देखा है।….यह जंगलों में रह रहे उन आदिवासी भाइयों का सम्मान है, जो जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं। यह मछुआरों का सम्मान है जो समंदर से इतना ही लेते हैं, जितना अर्थोपार्जन के लिए जरूरी है। वे स्कूल कॉलेज में नहीं गए होंगे, लेकिन वे मछलियों के प्रजनन के समय अपने काम को रोक लेते हैं। यह भारत के उन करोड़ों किसानों का सम्मान है जिनके लिए ऋतुचक्र ही जीवनचक्र है। यह उस महान भारतीय नारी का सम्मान है, जिसके लिए रीयूज और रीसाइकल रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। जो चींटी को भी अन्न देना पुण्य मानती है। यह भारत में प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित अनाम भारतीयों का सम्मान है।’
‘क्लाइमेट और कैलामिटी का सीधा रिश्ता’
पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत के लिए दोहरे सम्मान का मौका है क्योंकि कोच्चि एयरपोर्ट को भी सस्टेनेबल एनर्जी के लिए सम्मान मिला है। क्लाइमेट (जलवायु) और कैलामिटी (आपदा) के सीधे रिश्ते का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैं पर्यावरण और प्रकृति को लेकर भारतीय दर्शन की बात इसलिए करता हूं क्योंकि क्लाइमेट और कैलामिटी का सीधा रिश्ता है। क्लाइमेट जबतक कल्चर का हिस्सा नहीं होगा, तबतक कैलामिटी से बचना मुश्किल है।’
‘हजारों वर्षों से पर्यावरण सुरक्षा हमारी जिंदगी का हिस्सा’
पीएम मोदी ने कहा, ‘आज दुनिया भारत के योगदान को स्वीकार कर रही है। हजारों वर्षों से पर्यावरण सुरक्षा हमारी जिंदगी का हिस्सा है। जैसे सुषमाजी ने बताया कि भारत में लोग उठने से पहले धरती को प्रणाम करते हैं क्योंकि हम उन पर अपना भार डालने वाले हैं। भूमि की हम पूजा करते हैं।’ उन्होंने इस दौरान धरती की पूजा के जिक्र वाला श्लोक भी पढ़ा।
‘प्रकृति की हम पूजा करते हैं’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमने प्रकृति को हमेशा सजीव माना है और सहज जीव भी माना है। प्रकृति के साथ इस भावात्मक रिश्ते के साथ ही पूरे ब्रह्मांड की भलाई की कामना की जाती है।…जब स्वयं ईश्वर को अपना परिचय देना होता है तो वह यह कहते हैं कि मैं ही जलाशय हूं, मैं ही नदी हूं, मैं ही समंदर हूं।’
‘क्लाइमेट जस्टिस समय की जरूरत’
प्रधानमंत्री मोदी ने क्लाइमेट जस्टिस का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सबको गरिमापूर्ण जीवन देना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हर साल करोड़ों लोग भीषण गरीबी से बाहर आ रहे हैं। विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए हम समर्पित हैं। इसलिए नहीं कि हमें किसी से मुकाबला करना है, बल्कि हमें सबको गरिमापूर्ण जीवन देना है, जो हमारा कर्तव्य है।’
पीएम मोदी ने कहा, ‘सूखे और बाढ़ की गंभीरता साल दर साल बढ़ रही है और इससे सबसे ज्यादा परेशान गरीब हो रहा है, जिसके पास सीमित संसाधन हैं। बहुत बड़ी आबादी को प्रकृति पर बोझ डाले बिना विकास की रफ्तार से कदमताल के लिए सहारा की जरूरत है, हाथ बढ़ाने की जरूरत है। मैंने पैरिस में क्लाइमेट जस्टिस का जिक्र किया।…मुझे खुशी है कि पैरिस समझौते में दुनिया ने इस बात को माना है और क्लाइमेट जस्टिस को लेकर प्रतिबद्धता जताई। लेकिन जमीन पर उतारने के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।’
‘सबका विकास में प्रकृति का विकास भी शामिल’
पीएम मोदी ने कहा, ‘जब मैं सबका विकास की बात करता हूं तो उसमें प्रकृति भी शामिल है। हमारी अर्थव्यवस्था के लिए गांव और शहर दोनों महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। रोजगार का एक बड़ा हिस्सा गांव से जुड़ा है तो मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस के हब शहर हैं। हमारे गांव हमेशा से ही पर्यावरण के प्रति सचेत रहे, वे प्रकृति से जुड़े रहे। बीते 4 दशकों में हमारे गांवों ने इस शक्ति का और विस्तार किया है। गांवों में भी बॉयोवेस्ट को ऊर्जा में बदलने के प्रयास शुरू हुए हैं।…आर्गैनिक खेती और सॉइल हेल्थ कार्ड को बढ़ावा दिया जा रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘जब हम इंडस्ट्री और मैन्यूफैक्चरिंग की बात करते हैं कि ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ हमारा मंत्र है। जब हम खेती की बात करते हैं तो ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ हमारा मंत्र है।’
पर्यावरण के बहाने अपनी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाई
प्रधानमंत्री मोदी ने सौर ऊर्जा और स्वच्छ ईंधन की दिशा में अपनी सरकार के कामकाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘आज भारत में 100 स्मार्ट सिटीज का काम तेजी से चल रहा है। स्थानीय लोगों के सुझावों के आधार पर कटिंग एज टेक्नॉलजी और रीन्यूएबल एनर्जी इस योजना का आधार है। ग्रीन कॉरिडोर विकसित हो रहा है। नए हाइवेज के साथ ऊर्जा जरूरतों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है।…मेट्रो को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है। वॉटर कंजर्वेशन की दिशा में काम किया जा रहा है। ….घर के किचन से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्शन को भी स्वच्छ ईंधन से संचालित करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। बीते 4 सालों में 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए गए, इनमें से 4 करोड़ कनेक्शन तो उज्जवला योजना के तहत गरीबों को मुफ्त दिए गए हैं।’
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि एयर पलूशन को कम करने के लिए प्रोग्राम चल रहा है। वाहनों के लिए बीएस-4 से सीधे बीएस-6 मानक का ईंधन लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए हमारी प्रतिबद्धता पहले से भी और बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि अगले 2 सालों में उत्सर्जन का लेवल 2005 के लेवल से 25 प्रतिशत कम हो। उन्होंने कहा, ‘पर्यावरण के प्रति लगाव हमारी आस्था के साथ-साथ आचरण में भी परिलक्षित हो रहा है। भारत 2022 तक सिंगल यूज वाले सभी तरह के प्लास्टिक से मुक्त होगा।’
-एजेंसियां

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