RD Burman की कहानी को किसी एक खांचे में नहीं बांध सकते

नई दिल्‍ली। 27 जून 1939 को कलकत्ता में जन्‍में RD Burman यानि पंचम दा ने अपनी अंतिम सांस 4 जनवरी 1994 को ली थी, उनका देहांत 54 साल की उम्र में हुआ था। 1960 के दशक से 1990 के दशक तक आरडी बर्मन ने 331 फिल्‍मों में संगीत दिया। पंचम दा को हमेशा अगली पीढ़ी का संगीतकार कहा जाता रहा और उनसे प्रेरणा लेकर कई संगीतकार आगे बढ़े हैं।

त्रिपुरा सरकार ने आरडी बर्मन के यादगार कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया है।

पंचम दा का पूरा नाम राहुल देव बर्मन था. एक संगीतकार के तौर पर आरडी की पहली रिलीज फिल्‍म कॉमेडियन महमूद की पहली प्रोडक्‍शन 1961 की ‘छोटे नवाब’ थी. वहीं संगीतकार के तौर पर उनकी पहली हिट फिल्‍म 1966 में ‘तीसरी मंजिल’ रही।

उनकी निजी जिंदगी की बात करें तो 1980 में उन्‍होंने गायिका आशा भोंसले से शादी रचा ली थी। इससे पहले दोनों ने कई फिल्‍मों में जबरदस्‍त हिट गाने देने के साथ ही कई स्‍टेज प्रोग्राम भी किए थे।

पंचम दा की कहानी को किसी एक खांचे में नहीं बांध सकते. कामयाबी, नाकामयाबी, शोहरत, एकाकीपन… सब कुछ इसमें मिलेगा। कलकत्ता में उनका जन्म हुआ था। जीनियस पिता के जीनियस पुत्र होने के लक्षण बचपन में ही दिखने लगे थे। पिता ने नाम रखा था टबलू लेकिन एक दिन उन्हें रोते देखा तो अशोक कुमार ने कहा कि ये तो पंचम में रोता है. नाम पड़ गया पंचम।

गुरुदत्त की ‘प्यासा’ (1957) के गाने ‘सर जो तेरा चकराए’ की धुन भी आरडी ने बनाई थी।

RD Burman ने उस्ताद अली अकबर खान (सरोद) और सामता प्रसाद (तबला) से प्रशिक्षण लिया। वे संगीतकार सलिल चौधरी को भी अपना गुरु मानते थे। पिता के सहायक के रूप में भी उन्होंने काम किया है।

राहुल देव बर्मन को सबसे पहले निरंजन नामक फिल्मकार ने ‘राज’ के लिए 1959 में साइन किया था। आरडी ने दो गाने रिकॉर्ड भी किए। पहला गाना आशा भोसले और गीता दत्त ने तथा दूसरा शमशाद बेगम ने गाया था। यह फिल्म बाद में बंद हो गई।

आरडी को पहला अवसर मेहमूद ने दिया जिनसे आरडी की अच्छी दोस्ती थी। मेहमूद ने पंचम से वादा किया था कि वे स्वतंत्र संगीतकार के रूप में उन्हें जरूर अवसर देंगे। ‘छोटे नवाब’(1961)के जरिये मेहमूद ने अपना वादा निभाया।

अपनी पहली फिल्म में ‘घर आजा घिर आए बदरा’ गीत आरडी, लता मंगेशकर से गवाना चाहते थे और लता इसके लिए राजी हो गईं। आरडी चाहते थे कि लता उनके घर आकर रिहर्सल करें। लता धर्मसंकट में फँस गईं क्योंकि उस समय उनका कुछ कारणों से आरडी के पिता एसडी बर्मन से विवाद चल रहा था। लता उनके घर नहीं जाना चाहती थीं। लता ने आरडी के सामने शर्त रखी कि वे जरूर आएँगी, लेकिन घर के अंदर पैर नहीं रखेंगी। मजबूरन आरडी अपने घर के आगे की सीढि़यों पर हारमोनियम बजाते थे और लता गीत गाती थीं। पूरी रिहर्सल उन्होंने ऐसे ही की।

आरडी बर्मन को पहला बड़ा मौका विजय आनंद निर्देशित फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ से मिला। फिल्म के हीरो शम्मी कपूर और निर्माता नासिर हुसैन नहीं चाहते थे कि आरडी संगीत दे। निर्देशक के जोर देने पर उन्होंने तीन-चार धुनें सुनीं और सहमति दे दी। फिल्म का संगीत सुपरहिट रहा और आरडी के पैर बॉलीवुड में जम गए।

‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’ से राजेश खन्ना और किशोर कुमार सफलता की सीढ़ी चढ़ गए। ‘आराधना’ फिल्म के इस गीत की धुन बनाते समय सचिन देव बर्मन बीमार थे। कहा जाता है कि इसकी धुन राहुल देव बर्मन ने ही बनाई थी।

-एजेंसी

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