RBI ने रेपो रेट घटाकर किया 4 फ़ीसदी, EMI चुकाने में 3 महीने की और छूट

नई दिल्‍ली। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को रेपो रेट 4.4 से घटाकर चार फ़ीसदी कर दिया. ऐसा उन्होंने कोरोना वायरस और लॉकडाउन में आई मंदी को लेकर किया है ताकि अर्थव्यवस्था को गति मिल सके.
रेपो रेट का मतलब उस दर से है, जिस पर RBI से व्यावसायिक बैंकों को छोटी अवधि का लोन मिलता है. इससे बैंकों के पास नक़दी बढ़ेगी.
लॉकडाउन के कारण देश में बेरोज़गारी बढ़ी है और कारोबार को भी बहुत नुक़सान हुआ है. रिवर्स रेपो रेट में भी 40 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई है. रिवर्स रेपो रेट का मतलब उस दर से होता है जिस दर पर व्यावसायिक बैंक RBI के पास अपने पैसे रखते हैं. अब रिवर्स रेपो रेट 3.75 से घटाकर 3.35 कर दिया गया है. शक्तिकांत दास ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के पाँच सदस्यों ने रेपो रेट कम करने के पक्ष में वोट किया था.
RBI ने तय समय में क़र्ज़ चुकाने की अवधि भी तीन महीने के लिए बढ़ा दी है. यानी EMI चुकाने में तीन और महीने की छूट दी गई है.
इससे पहले इसी साल मार्च 27 को कोरोना संकट को देखते हुए रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी. रिवर्स रेपो रेट में भी 90 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी.
आर्थिक सुस्ती को देखते हुए बीते साल RBI ने पांच बार पॉलिसी रेट में बदलाव किए थे.
किसे मिलेगा फ़ायदा?
RBI ने बैंकों का लोन चुका रहे लोगों को राहत देते हुए लोन चुकाने की मियाद को और तीन महीनों के लिए आगे बढ़ाने की घोषणा की है.
रेट में कटौती से बैंकों से मिलने वाले क़र्ज़ पर पड़ता है. इसका असर ब्याज दरों पर पड़ता है. रेपो रेट कटौती का फ़ायदा होम लोन, कार लोन के अलावा भी अन्य लोन में मिलता है. उम्मीद की जा रही है कि इसका फायदा अलग-अलग EMI भरने वाले करोड़ों लोगों को मिलेगा.
इसके साथ RBI गवर्नर ने कहा कि कोरोना महामारी का बड़ा असर जीडीपी पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि साल 2020-21 में जीडीपी निगेटिव रहे.
उन्होंने कहा कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए RBI ने एक्सपोर्ट क्रेडिट की अवधि एक साल से बढ़ा कर 15 महीने तक करने का फ़ैसला किया है.
साथ ही एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक के लिए 15 हज़ार करोड़ रुपये के क्रेडिट की व्यवस्था का भी ऐलान किया है.
-BBC

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