रेपो रेट में RBI ने नहीं किया बदलाव, अर्थव्यवस्था में रिकवरी के संकेत

भारतीय रिजर्व बैंक RBI ने आज रेपो रेट को 4 प्रतिशत पर ही रहने देने का फ़ैसला किया है. रेपो रेट उस ब्याज़ दर को कहते हैं जिस पर रिज़र्व बैंक ( या किसी भी देश का सेंट्रल बैंक) कॉमर्शियल बैंकों को कर्ज़ देता है.
अगर रिज़र्व बैंक अपनी ब्याज दरों में कटौती करता है तो उसका फायदा, बैंकों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को हो सकता है. घर ख़रीदने के लिए लोन लेने वालों की इस पर नज़र होती है.
मॉनेटरी पॉलिसी में इसका इस्तेमाल मंहगाई दर को काबू में रखने के लिए भी किया जाता है.
कोविड महामारी से धीमी पड़ी देश की अर्थव्यवस्था में अब रिकवरी के कुछ संकेत नज़र आ रहे हैं लेकिन बैंक दरों को अपरिवर्तित रखकर आरबीआई ने इकॉनमी पर उदार रुख़ बनाए रखा है.
यह लगातार आठवीं बार है जब आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया है.
इससे पहले आरबीआी ने 22 मई 2020 को रेटो रेट में बदलाब किया था.
मौद्रिक नीति समिति के इस निर्णय का अर्थ है कि अब रेपो रेट 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 3.55 प्रतिशत पर बना रहेगा.
जब कॉमर्शियल बैंक अपना पैसा रिज़र्ब बैंक में रखते हैं तो उन्हें उस पर जो ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.
-एजेंसियां

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