रविशंकर प्रसाद ने बताया, कब और कैसे दर्ज होगा तीन तलाक पर केस

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में लटके तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने वाले बिल को कानूनी रूप देने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल के अहम पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस बिल से मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिलेगा। जानिए तीन तलाक कानून में मुस्लिम महिलाओं को क्या पावर दी गई है-
कब दर्ज होगा 3 तलाक का केस
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है।
समझौते कि लिए क्या है शर्त
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए है। कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है। पत्नी की पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मैजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ।
बेल के लिए क्या है शर्त
कानून के तहत मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है, लेकिन पत्नी का पक्ष सुनने के बाद। केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह पति-पत्नी के बीच का निजी मामला है। पत्नी ने गुहार लगाई है इसलिए उसका पक्ष सुना जाना जरूरी होगा।
गुजारे के लिए क्या है प्रावधान
तीन तलाक पर कानून में छोटे बच्चों की कस्टडी मां को दिए जाने का प्रावधान है। पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार मैजिस्ट्रेट तय करेंगे, जिसे पति को देना होगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने तीन तलाक बिल को निरस्त किया था। दो जजों ने इसे असंवैधानिक कहा था, एक जज ने पाप बताया था। इसके बाद दो जजों ने इस पर संसद को कानून बनाने को कहा था। संसद में यह बिल लोकसभा से तो पास हुआ, लेकिन राज्यसभा में अटक गया। इसके बाद इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए सरकार ने अध्यादेश का रास्ता चुना है। हालांकि 6 महीने के अंदर इस पर संसद की मुहर लगनी जरूरी है। सरकार के लिए यह फिर बड़ी चुनौती होगी।
सरकार ने बताए 3 तलाक के आंकड़े
सरकार ने अध्यादेश पर जानकारी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब तक तीन तलाक के आंकड़े भी जारी किए। प्रसाद ने बताया कि जनवरी 2017 से 13 सितंबर 2018 तक 430 तीन तलाक की घटनाएं मिली हैं। इनमें से 229 सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से पहले के हैं, जबकि 201 जजमेंट के बाद के हैं। 3 तलाक के सबसे ज्यादा मामले यूपी में आए। यूपी में जनवरी 17 से पहले 126 केस आए। फैसले के बाद 120 केस सामने आए।
कांग्रेस पर हमला
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर तीन तलाक बिल को संसद से पास नहीं होने देने का आरोप लगाया। प्रसाद ने कहा, ‘कांग्रेस ने वोटबैंक की राजनीति के कारण राज्यसभा से इस बिल को पास नहीं होने दिया। मैंने इसे पास कराने के लिए राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलामनबी आजाद से 5 बार आग्रह किया लेकिन उन्होंने ऊपर से बात करने की बात कहकर इसे टाल दिया। फिर कांग्रेस ने कहा कि इस पर बाकी पार्टियों की भी राय ली जाए।’ कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के होने बाद भी महिलाओं पर दमनकारी तीन तलाक चलता रहा और वह चुप रहीं। प्रसाद ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी जैसी एक वरिष्ठ महिला नेता और कांग्रेस की मुख्य लीडर होने के बाद भी वोटबैंक की राजनीति के कारण अमानवीय तीन तलाक को खत्म करने के लिए संसद से कानून बनाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम मुल्कों में तीन तलाक पर रोक है लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होते हुई भी इसपर रोक नहीं लगा पा रहा था। कांग्रेस ने वोटबैंक की राजनीति के कारण इसे रोका।
बताया तीन तलाक के कितने मामले
प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक पर अध्यादेश लाना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि इसे लाना बेहद जरूरी था। देश की मुस्लिम महिलाएं इससे परेशान हैं। एससी ने तीन तलाक को रद्द करते हुए कहा था कि इस मामले पर छह महीने में केंद्र कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से पहले 229 तीन तलाक के मामले सामने आए थे और जजमेंट के बाद 201 मामले सामने आए। ये संख्या जनवरी 2017 से 13 सितंबर 2018 तक हैं।’ उन्होंने कहा कि तीन तलाक के सबसे अधिक मामले यूपी में सामने आ रहे हैं। यूपी में जनवरी 2017 से जजमेंट से पहले 126 केस और जजमेंट के बाद 120 केस सामने आए हैं।
‘रोटी काली तो तीन तलाक’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक का दंश झेलना पड़ रहा है। रोटी काली तो तीन तलाक, लेट से उठी तो तलाक, विदेश से वॉट्सऐप पर तीन तलाक। उन्होंने कहा, ‘आजादी के 70 साल बाद और संविधान में मौलिक अधिकारों का जिक्र होने के बाद भी महिलाओं को तीन तलाए दिया जाना शर्मनाक है। उन्होंने कहा अध्यादेश को लाना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि इसपर कोई कानून नहीं है। जब तीन तलाक से पीड़ित कोई महिला थाने जाती थी तो पुलिस इसपर कोई कार्यवाही नहीं कर पाती थी क्योंकि इस पर कोई कानून ही नहीं था।

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