राष्ट्रपति भवन ने बताया, बीजेपी के खिलाफ सेना के पूर्व अफसरों की कोई चिठ्ठी नहीं मिली

नई दिल्‍ली। राष्ट्रपति भवन ने बीजेपी के खिलाफ सेना के पूर्व अफसरों की कोई चिट्ठी मिलने से इंकार किया है।
दूसरी ओर पूर्व आर्मी चीफ रॉड्रिग्स ने कहा है कि ‘मैं नहीं जानता कि यह सब क्या है। मैं अपनी पूरी जिंदगी राजनीति से दूर रहा हूं। 42 साल तक अधिकारी के तौर पर काम करने के बाद अब ऐसा हो भी नहीं सकता। मैं हमेशा भारत को प्रथम रखा है।’
दरअसल, सेना के कथित राजनीतिक इस्तेमाल पर पूर्व सैन्य अधिकारियों की ओर से राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखे जाने का कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया। इन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 3 पूर्व सेना प्रमुखों समेत 156 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति को खत लिखा है। अब इसे लेकर सेना के पूर्व अफसरों ही कुछ और जानकारी दे रहे हैं।
पूर्व आर्मी चीफ एस.एफ रॉड्रिग्स और एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने ऐसी किसी चिट्ठी के लिए अपनी सहमति से इंकार किया है। उधर मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ ने कहा है कि उन्होंने चिट्ठी को पढ़ने के बाद अपना नाम शामिल करने पर सहमति दी थी। इसके अलावा पूर्व आर्मी चीफ शंकर रॉय चौधरी ने भी खत लिखे जाने की बात स्वीकारी है।
पूर्व आर्मी चीफ एस.एफ रॉड्रिग्स ने ऐसी किसी चिट्ठी के बारे में जानकारी से ही इंकार किया है। बता दें कि पूर्व सैन्य अधिकारियों के नाम से सर्कुलेट हो रही चिट्ठी में उनका पहला नाम बताया जा रहा था। राष्ट्रपति भवन के सूत्रों ने भी ऐसी कोई चिट्ठी मिलने से इंकार किया है।
यही नहीं, एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने भी ऐसी किसी चिट्ठी पर साइन करने की बात से इंकार किया है। पूर्व आर्मी चीफ रॉड्रिग्स ने कहा, ‘मैं नहीं जानता कि यह सब क्या है। मैं अपनी पूरी जिंदगी राजनीति से दूर रहा हूं। 42 साल तक अधिकारी के तौर पर काम करने के बाद अब ऐसा हो भी नहीं सकता। मैं हमेशा भारत को प्रथम रखा है। मैं नहीं जानता कि यह कौन फैला रहा है। यह फेक न्यूज़ का क्लासिक उदाहरण है।’ पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एम. एल नायडू ने भी कहा है कि ऐसे किसी पत्र के लिए उनकी ओर से सहमति नहीं ली गई थी और न ही मैंने ऐसा कोई पत्र लिखा है।
एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने कहा, ‘यह एडमिरल रामदास की ओर से लिखा लेटर नहीं है। इसे किसी मेजर चौधरी ने लिखा है। उन्होंने इसे लिखा है और यह वॉट्सऐप और ईमेल किया जा रहा है। ऐसे किसी भी खत के लिए मेरी सहमति नहीं ली गई थी। इस चिट्ठी में जो कुछ भी लिखा है, मैं उससे सहमति नहीं हूं। हमारी राय को गलत ढंग से पेश किया गया है।’
गौरतलब है कि कई मीडिया वेबसाइट की खबरों में यह दावा किया गया था कि पूर्व सैन्य अधिकारियों की ओर से राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर सेना के राजनीतिक इस्तेमाल और भाषणों में ‘मोदी की सेना’ जैसी टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। हालांकि अब अधिकारियों की ओर से ही चिट्ठी लिखे जाने या उस पर हस्ताक्षर किए जाने की बात से इंकार के बाद अब नया विवाद सामने आया है।
-एजेंसियां

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