Rape हुआ! अपराध हुआ! जिम्मेदार कौन?

आगरा । जैसा कि आप जानते हैं देश मे प्रतिदिन Rape की घटनाएं कहीं न कहीं होती रहती हैं ये थमने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं । Rape की घटनाओं पर लोगों के अलग अलग मत हैं ।
●एक व्यक्ति ने कहा- लड़कियों के जींस पैंट और छोटे कपड़े।
●दूसरे व्यक्ति ने कहा- पश्चिमी संस्कृति ।
●तीसरे व्यक्ति ने कहा- कड़े दण्ड का अभाव।
●चौथे व्यक्ति ने कहा- पोर्न वेबसाइट्स।
●पांचवें व्यक्ति ने कहा- फिल्में।
●छठवें व्यक्ति ने कहा- टीवी सीरियल देखकर बिगड़ रहे लोग।
●सातवें व्यक्ति ने कहा- लोगों में कामुक उत्तेजना बढ़ रही।
●आठवें आयुर्वेदिक व्यक्ति ने कहा- लहसुन प्याज खाने से बलात्कार हो रहे और मद्यपान द्वारा भी।
●नवें कानूनी व्यक्ति ने कहा- अपराधी निर्भय घूम रहे पुलिस का भय नहीं रहा।
●दशवें व्यक्ति ने कहा- अच्छे संस्कारों की कमी।
●ग्यारवें व्यक्ति ने कहा- आध्यात्मिकता की कमी।
●बारवें व्यक्ति ने कहा- ध्यान, योगा, कुण्डलिनी जागरण की कमी।

और भी बहुत से कारण और हल तर्कसहित प्रस्तुत किये जा रहे अनेक व्यक्तियों द्वारा।

देखिये नाना मुनि नाना मति।

न्यायधर्मसभा के संथापक एंव 111 न्यायप्रस्तावों के प्रतिपादक अरविंद अंकुर ने बताया कि समाज में मनुष्यों के लिए निजी चरित्र की स्वतंत्रता प्रतिष्ठित हुए बिना बलात्कार नहीं रुकेंगे चाहे कितने भी उपाय कर लो ।

निजी चरित्र की स्वतंत्रता प्रतिष्ठित होने से मानव समाज को निम्नलिखित प्रत्यक्ष लाभ होंगे

1◆ मनुष्यों के भावनात्मक विकास का द्वार खुलेगा।
2◆ पारिवारिक कलह समाप्त होगी।
3◆ समाज में बलात्कार एवं अन्य प्रकार के यौन अपराध में कमी आएगी।
4◆ स्त्रियों की दासता समाप्त होगी।
5◆ यौनकुंठा उत्पन्न नहीं होगी।
6◆ पारस्परिक संबंधों में मधुरता बढ़ेगी।
7◆ परस्पर सहमत पवित्र सेक्ससंबंधो में अपराधबोध समाप्त होगा।
8◆ चरित्रहनन की धूर्तता ध्वस्त हो जायेगी।
9◆ वाक् व्यवहार में गाली-गलौज में कमी आएगी।
10◆ समाज में क्षत्रियत्व की वृद्धि होगी।
11◆ राजकीय पदों पर नियुक्ति हेतु आवश्यक संवेदनशील व्यक्ति सुलभ होंगे।
12◆ समाज में पारस्परिक शत्रुता के स्थान पर मित्रता का विकास होगा।
13◆ वैवाहिक सम्बंधों में परस्पर शंका समलत होगी।
14◆ मनुष्यों में जीवन के प्रति आस्था बढ़ेगी।
15◆ जनता में औसत आयु में वृद्धि होगी।
16.◆ मनुष्यों में आत्महत्या की दर में कमी आएगी।
17◆ पति पत्नी के बीच आपसी झगड़ों में कमी आएगी।
18◆ घरेलू विवाद और बच्चों के साथ मारपीट कम होगी।
19◆ मनुष्यों में उत्साह और कर्मठता की वृद्धि होगी।
20◆ मानवता का गुणात्मक उत्थान होगा।
21◆ मनुष्यों में देवत्व का विकास होगा, ईश्वरत्व की वृद्धि होगी।
22◆ धरती पर देवसभ्यता की पुनः स्थापना का मार्ग खुलेगा।
23◆ धरती पर मानवीयता दासता की समस्त सम्भावनाओं का अंत हो जायेगा।
24◆धरती पर सत्धर्म की पुनः स्थापना एवं सत्युग की वापसी हेतु पर्याप्त संवेदनशील प्रेमपूर्ण कार्यकर्ता सुलभ हो सकेंगे।

केवल बलात्कार ही अपराध नहीं है । दूसरों के हित को किसी भी रूप में हानि/क्षति पहुचाई जाए उसे अन्याय कहते हैं।
अन्याय ही अपराध कहलाता है। बलात्कार भी लूट, चोरी, डकैती, हत्या, गबन, घोटाला, भ्रष्टाचार, घूसखोरी, अधिकारहनन, गाली गलौज इत्यादि किसी भी प्रकार से अपमान , अपकार, अपहिंसा, अपहरण, अपबन्धन आदि कृत्यों को अन्याय और अपराध माना जाता है। केवल बलात्कार ही अपराध नहीं है। क्या इन सभी अपराधों के लिए कड़ी, कठोर वीभत्स दण्ड की व्यवस्था आपको स्वीकार है। यदि हाँ तो अधिकांश राजनेता, अफसर, प्रशासक, पुलिस, राजकर्मचारी, व्यापारी, उद्योगी, व्यवसायी, किसान आदि लोगों में अधिकांश दण्डनीय सिद्ध हैं। अतः किसी एक अपराध पर ही क्रूर दण्ड क्यों ?

न्यायधर्मसभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चन्द्रसेन शर्मा ने कहा वास्तविकता में व्यवस्था को शुद्ध करने की आवश्यकता है । साँचा ठीक होने पर मूर्ति स्वतः ठीक हो जाती हैं । अन्य कोई विकल्प भी तो नहीं है । देश से अन्याय समाप्त करना है तो व्यवस्था को न्यायशील बनाना ही होगा । व्यवस्था को न्यायशील बनाने के लिए ही न्यायधर्मसभा के 111 न्यायप्रस्ताव हैं ।
-Legend News

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