जुनूनी हैं राम जन्मभूमि फिल्‍म के डायरेक्टर Sanoj mishra

Sanoj mishra के खिलाफ फिल्म निर्माता वसीम रिजवी की फिल्म राम जन्मभूमि के निदेशक के रूप में काम करने पर फतवा जारी 

अपने काम को अपने जज्बात और जुनून से जोड़कर जी-तोड़ मेहनत करने वाले और काफी ख्याति हासिल करने के बावजूद अपनी मिलनसारिता बनाए रखने यानी जमीन पर चलने वाली शख्सियत हैं Sanoj mishra फिल्म डायरेक्टर। जिनके खिलाफ फिल्म निर्माता वसीम रिजवी की फिल्म राम जन्मभूमि के निदेशक के रूप में काम करने पर फतवा जारी किया गया। सनोज एक रचनात्मक फिल्मकार हैं।

उनकी फिल्मों के विषय समसामयिक होते हैं। अपनी जिंदगी और फिल्मी सफर के विषय में अनिल शर्मा से सनोज मिश्रा ने गुफ्तगू की।
सनोज के बारे में लिखते समय बड़ा डर भी लगता है और खुशी भी होती है कि इतने जुझारू, कर्मठ, मेहनती और ख्याति प्राप्त फिल्म डायरेक्टर से हुई मुलाकातों में ऐसा कभी नहीं लगा कि किसी महान शख्सियत से मुलाकात हो रही है। अपनी जिंदगी के विषय सनोज ने बताया जब मुंबई पहुंचे तो न कोई जानने वाला था, न मदद करने वाला। वह ढाबे पर खाते थे। यह सच है कि मैंने ग्रेजुएट होने के बावजूद सिनेमा में आने के लिए स्पॉट ब्वाय के रूप में काम किया।
बांबे वीटी स्टेशन के प्लेटफार्म पर सोते थे, फिर काम की तलाश में निकल जाते थे। सनोज ने काफी गरीबी में अपना कॅरियर शुरू किया था और अपनी मेहनत व लगन के बल पर लेजेंड्री एक्टर तक का सफर तय किया था।
अपनी मेहनत और लगन से सनोज ने भोजपुरी में शुरूआत की और अनूप जलोटा के साथ पहली भोजपुरी फिल्म द ग्रेट हीरो हीरालाल की। फिल्म ने सनोज को नई पहचान दी और वह भोजपुरी फिल्म इंड. के नामी शख्सियत बन गए। साल 2007से 2016 तक लगातार फिल्में की हैं। चूंकि भोजपुरी फिल्मों का अपना एक सीमित दायरा है इसलिए मैने बॉलीवुड सिनेमा की तरफ रुख किया। अभी तक बॉलीवुड की मेरी दो फिल्में आ चुकी हैं। अपनी शिक्षा के विषय में सनोज ने बताया कि इंटर तक की पढ़ाई मैंने अपने गांव ढकवा जो कि शिवगढ में पड़ता है। वहीं बरखंडी विद्यालय है, वहां से की और ग्रेजुएशन लखनऊ के शिया कॉलेज से किया है।

गांधीगिरी-ओमपुरी
अपनी हिन्दी फिल्म गांधीगिरी और इस फिल्म के कलाकार ओम पुरी के विषय में सनोज ने बताया फिल्म गांधीगीरी ने मुझे पहचान दिलाई और एक निर्देशक के तौर पर स्थापित किया। इस फिल्म में ओमपुरी जी ने कार्य किया। यह उनकी मेरे साथ आखरी फिल्म थी। वह बहुत अच्छे इंसान थे और हमेशा हमारे दिल में जिंदा रहेंगे। ओमपुरी के विषय में सनोज ने बताया कि वह बहुत डेडीकेट होकर कार्य करते थे। दूसरी बात यह कि बुलंदियों पर पहुंच जाने के बाद भी आपको अपनी जमीन, अपने लोगों को नहीं भूलना है, उन्हें पूरा सम्मान कैसे देना है। यह सीखा। वह बहुत बड़े कलाकार थे फिर भी वह टीम के छोटे छोटे मेम्बर का भी बहुत सम्मान करते थे।

एकतरफा प्यार
औपचारिकता से हुई शुरूआत जब दोस्ती तक जा पहुंची तो सनोज ने अपने एकतरफा प्यार की बात भी बता दी जिसके विषय में मैं सवाल पूछ लूंगा ऐसी सनोज को उम्मीद नहीं थी। अपने एकतरफा प्यार के विषय में बताने से पहले सनोज ने हंसी का जोरदार ठहाका लगाया और बताया कि जब मैं अपने कॉलेज में पढ़ता था तो मुझे एक लड़की से वन साइडेड लव हो गया था। मैं उसे बहुत चाहता था लेकिन चूंकि दोनों की कास्ट अलग-अलग थी और भी अन्य कई फैक्टर थे, जिस वजह से हमारा मिलन मुश्किल था। मैने सोचा कि अगर मैं इन सभी फैक्टर्स को तोड़ पाऊं तो हम मिल सकते हैं और उसके लिए सिनेमा मुझे मुफीद लगा। बस वही जुनून मुझे यहां तक ले आया। आत्मविश्वास तो मुझ में बिल्कुल था ही नहीं, मैं तो गांव का एक सीधा सादा लड़का था। किसी से बात करने में मेरे हाथ पैर कांपने लगते थे। उस वन साइड लव ने मेरे लिए एनर्जी का कार्य किया और फिर मैं अपने आपको साबित करने के लिए सिनेमा में रम गया।

मुझे मरा मान चुका था मेरा परिवार
गमगीन आंखों से अपनी जिंदगी के गंभीर हादसे को बयां करते सनोज ने बताया कि उस हादसे ने पत्नी और बेटी को काफी दुख दिया। मुम्बई जाने के बाद एक बार मैं जब वापस अपने घर आया तो फिर घर वालों ने मुझे वापस नहीं जाने दिया और मेरी शादी करवा दी। लेकिन मेरे अंदर तो फिल्मों में जाने और नाम कमाने का जुनून सवार था। कुछ दिन मैं घर पर रहा और फिर एक दिन बिना किसी से बताए मुम्बई निकल गया। उसके बाद लगातार 10 सालों तक मैने घर की तरफ मुड़कर नहीं देखा। इस दौरान मेरे घर वालों ने मुझे बहुत तलाश किया और जब मेरा कहीं पता नहीं चला तो उन्होंने स्थानीय थाने में मेरी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई। रिपोर्ट लिखाने के लगभग दो महीने बाद पानी में एक लाश मिली तो पुलिस वालों ने मेरे घर वालों को भी सिनाख्त के लिए बुलाया। चूंकि लाश इतनी खराब हो चुकी थी कि पहचानना मुश्किल था लेकिन उसका हुलिया लगभग मेरे जैसा था। मेरे घर वाले उसे घर ले आए और उसका अंतिम संस्कार कर दिया। लगातार 10 वर्षों तक मेरी पत्नी ने एक विधवा की जिंदगी जी। मेरी बेटी को लोग अनाथ कहने लगे थे। मैं अपने घर वालों के लिए इस दुनिया से बहुत दूर जा चुका था। फिर धीरे धीरे लोगों को पता चला। अब मैं बराबर अपने घर जाता हूं। कभी कभी सोचता हूं तो बड़ा अजीब लगता है और दुख भी होता है।
जिंदगी और करियर के संघर्ष भरे सफर के बावजूद सनोज की व्यवहारिकता और मिलनारिता ने अनेक लोगों को अपने करीब पाया है। स्पाट ब्वाय से लेकर दर्शकवर्ग तक सनोज के करीब पाया जाता है।

-अनिल शर्मा

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