यहां राम करते हैं राज, नहीं दी जाती CM-PM को भी सलामी

यहां राम करते हैं राज, नहीं दी जाती सीएम और पीएम को भी सलामी
यहां राम करते हैं राज, नहीं दी जाती सीएम और पीएम को भी सलामी

अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास हो गया है। पूरे देश में भगवान राम की पूजा होती है लेकिन एमपी के टीकमगढ़ जिले में स्थित ओरछा में भगवान राम का शासन चलता है। भगवान यहां के राजा हैं। इन्हें चारों पहर पुलिस गॉर्ड ऑफ ऑनर देती है। आइए आपको बताते हैं भगवान राम यहां के राजा कैसे बने।
टीकमगढ़ जिले में स्थित ओरछा में रामराजा का दरबार है। कोरोना महामारी की वजह भक्तों की भीड़ भले ही कम है लेकिन अयोध्या में राम मंदिर पूजन को लेकर यहां भी उत्साह है। रामराजा के दरबार को अद्भुत तरीके से सजाया गया है। इसकी दिव्यता देख आंखें चौंधिया जाएंगी। रामराजा का शासन यहां करीब 400 वर्षों से चला आ रहा है। मान्यता के अनुसार यहां पीएम और सीएम या कोई भी उच्चाधिकारी को सलामी नहीं दी जाती है। इसके पीछे भी कई पौराणिक कथाएं हैं। अभी भी भगवान राम शयन के लिए आयोध्या ही चले जाते हैं।
रामराजा का है दरबार
भोपाल से करीब 350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ओरछा में राजा राम का दरबार है। ओरछा को मिनी अयोध्या के नाम से भी जाना जाता है। यूपी के अयोध्या से ही आकर रामलला यहां विराजमान हुए थे। भगवान राम का यह दरबार बेतवा नदी के किनारे स्थित है। यहां उन्हें राजा राम सरकार भी कहा जाता है। विदेशी पर्यटक भी यहां बड़ी संख्या में आते हैं। यहां भगवान का कोई मंदिर नहीं है, वह महल में विराजमान हैं।
प्रदेश के हैं राजा
राम मंदिर भूमि पूजन से पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि राम राजा की जय! ओरछा में श्री राम राजा विराजते हैं, ये ही राजा हैं प्रदेश के। सीएम के आदेश पर 4-5 अगस्त को मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया था। साथ ही विशेष रूप से यहां पूजा-अर्चना भी कई गई है। सीएम ने लोगों से अपील की थी कि ओरछावासी घर पर ही रह कर रामराजा की आराधाना कर दीपोत्सव मनाएं।
भगवान राम का शासन चलता है यहां
ओरछा में रामराजा का शासन चलता है। ऐसी परंपरा है कि यहां किसी भी वीवीआईपी को सलामी नहीं दी जाती है। ओरछा में प्रवेश करते ही वह भगवान राम के राज्य में आ जाते हैं। पीएम और सीएम को ओरछा में सलामी नहीं मिलती है।
चारों पहर गॉर्ड ऑफ ऑनर
यहां रामराजा को सलामी देने के पुलिस के जवान तैनात हैं। उनकी सैलरी सरकार देती है। वह रामराजा को चारों पहर की सलामी देते हैं। सरकार उन पुलिस जवानों की सैलरी पर 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करती है। मंदिर की जिम्मेदारी सरकार के लोग ही संभालते हैं। नायब तहसीलदार इसके व्यवस्थापक होते हैं।
राजा की पत्नी थी भगवान की भक्त
दरअसल, 1554 से लेकर 1594 तक ओरछा में राजा मधुकर शाह का राज था। उनकी पत्नी रानी कुंवर गणेश भगवान राम की परम भक्त थीं जबकि राजा मधुकर शाह भगवान श्रीकृष्ण के भक्त थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम खुद ही रानी के सपने में आकर यहां के राजा कहलवाने की इच्छा जाहिर की थी।
ओरछा लेकर आओ
राजा मधुकर शाह ने एक बार रानी से वृंदावन चलने को कहा, लेकिन रानी ने जाने से मना कर दिया। इसे लेकर दोनों में बहस हो गई। उसके बाद राजा ने रानी को चुनौती दी कि अगर राम भगवान हैं तो उन्हें ओरछा लाकर दिखाओ। उसके बाद रानी कुंवर गणेशी अयोध्या चली गईं।
भगवान राम गोद में बैठे हुए थे
कथाओं के अनुसार रानी कुंवर गणेशी सरयू किनारे बैठ कर भगवान राम को प्रसन्न करने के लिए तपस्या करने लगी। भगवान राम ने करीब एक महीने तक दर्शन नहीं दिए तो रानी कुंवर गणेशी ने सरयू नदी में छलांग लगा दी। उसके बाद वह बेहोश हो गईं। जब आंखें खोली तो भगवान राम उन्हें गोद में बैठे प्रतीत हुए। उसके बाद रानी ने उनसे ओरछा चलने की अपील की।
भगवान राम ने रखीं 3 शर्त
भगवान राम रानी कुंवर गणेशी के साथ ओरछा चलने के लिए तैयार हो गए लेकिन उन्होंने 3 शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि वह पुष्‍य नक्षत्र में ही ओरछा के लिए प्रस्थान करेंगे। दूसरी शर्त यह थी कि एक बार जहां बैठेंगी, वहीं स्थापित हो जाएंगे। तीसरा कि वह ओरछा के राजा कहलाएंगे और वहां शासन चलेगा।
चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया
रानी उन शर्तों को मानकर ओरछा लौट आईं और यहां तैयारी शुरू कर दी। इस बीच राजा मधुकर शाह ने यहां चतुर्भुज मंदिर का निर्माण करवाया। इसी मंदिर प्रभु श्रीराम को स्थापित किया जाना था।
रसोई में विराजमान हैं राम
दरअसल, रानी कुंवर गणेश ने भगवान राम को रसोई में रखा दिया। मंदिर निर्माण के बाद जब रसोई से उन्हें उठा कर मंदिर में स्थापित की जाने की कोशिश की गई तो भगवान वहां से नहीं उठे। मंदिर आज भी सूना है और भगवान रसोई में ही विराजमान हैं।
शयन के लिए जाते हैं अयोध्या
प्रभु श्रीराम ओरछा के राजा और अयोध्या के भगवान हैं। वह दिन में ओरछा वास करते हैं और रात में शयन के लिए अयोध्या चले जाते हैं।
-एजेंसियां

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