राम माधव ने कहा, राम मंदिर पर जल्‍द फैसला नहीं हुआ तो अन्य विकल्पों पर विचार

नई दिल्ली। बीजेपी महासचिव राम माधव ने कहा है कि राम मंदिर विधेयक ‘विधेयक का विकल्प हमेशा से मौजूद था, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इस पर चार जनवरी को अगली बेंच के बारे में फैसला होगा। हमें आशा है कि सुप्रीम कोर्ट फास्ट ट्रैक का रास्ता अपनाएगी और इस पर जल्द फैसला देगा। राम माधव ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो हम अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे।
प्रधानमंत्री पद के लिए लाइन में लगे हैं छह लोग
राम माधव ने महागठबंधन पर कहा कि अगर तीन राज्यों में हालिया जीत के कारण राहुल गांधी पीएम पद के उम्मीदवार हो सकते हैं तो महागठबंधन की कोई आवश्यकता नहीं है।
यहां तक कि स्टालिन के अलावा कोई अन्य महागठबंधन के नेता का नाम तय करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के लिए छह लोग कतार में हैं।
कांग्रेस के नेताओं को फैसला करना है कि उनका नेतृत्व फायदेमंद है या नहीं
राम माधव ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के नेता हैं और कांग्रेस के नेताओं को फैसला करना है कि उनका नेतृत्व फायदेमंद है या नहीं। हम कांग्रेस में उनके नेतृत्व पर कैसे टिप्पणी कर सकते हैं?
उन्होंने हालिया चुनाव में कांग्रेस को कुछ जगहों पर जीत दिलाई है, इसमें कोई शंका नहीं हैं।
तीन तलाक पर कानून मुस्लिम महिलाओं के लिए वरदान
तीन तलाक पर राम माधव ने कहा कि ‘लैंगिक समानता के मुद्दे पर तीन तलाक के लिए कानून पीएम मोदी का ऐतिहासिक फैसला है। मुस्लिमों समेत समाज के बड़े तबके ने इसका स्वागत किया है। मुस्लिम महिलाओं के लिए यह वरदान है। मामला संसद के सामने है, मुझे भरोसा है कि इस पर सार्थक बहस होगी।’ इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सुप्रीम कोर्ट से राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह करने की मांग की।
रविशंकर प्रसाद मंगलवार को अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की 15वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब सबरीमाला मामले में जल्द फैसला आ सकता है, तो सालों से अटके इस मामले में क्यों नहीं?
प्रसाद ने कहा कि मैं कानून मंत्री के नाते नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से मामले पर जल्द फैसला देने की अपील करता हूं। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एआर मसूदी भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा, “इस मामले में इतने सबूत हैं कि अच्छी बात हो सकती है। लेकिन लोग मेरे पास आते हैं और पूछते हैं कि समलैंगिकता पर 6 महीने में, सबरीमाला पर 5-6 महीने में, अर्बन नक्सल पर 2 महीने में फैसला हो जाता है। हमारे रामलला का विवाद 70 सालों से कोर्ट में अटका है। 10 साल से सुप्रीम कोर्ट के पास है, इसमें सुनवाई क्यों नहीं होती?”
कानून मंत्री ने कहा , ”हम बाबर को क्यों पूजें, उसकी इबादत नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने संविधान की प्रति को दिखाते हुए कहा कि इसमें राम, कृष्ण और अकबर का भी जिक्र है, लेकिन बाबर का नहीं। उन्होंने कहा कि भारत में इस तरह की बात कर दो तो नया विवाद खड़ा हो जाता है।
-एजेंसियां

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