गौरक्षा आन्दोलन के शहीद सन्तों को राम कारसेवा समिति ने दी श्रद्धांजलि

7 नव. गौरक्षा दिवस के अवसर पर राम कार सेवा समिति द्वारा आयोजित गौरक्षा आन्दोलन पर गोष्‍ठी

मथुरा। 7 नवम्बर 1966 भारत के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब स्वतंत्र भारत में प्रधानमंत्री के आदेश पर गौरक्षा कानून की मांग कर रहे सन्तों पर संसद के सामने ही बिना कोई चेतावनी दिये ही अंधाधुंध फायरिंग कर हजारों सन्तों व गौभक्तों की हत्या करदी गयी और उनके शवों को गायब भी कर दिया गया था।

संसद-भवन के सामने आयोजित देश भर से आये गौभक्तों के उस जनसमुद्र का नेतृत्व प्रसिद्ध सन्त प्रभुदत्त ब्रह्मचारी कर रहे थे और तत्कालीन जनसंघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी अपना संबोधित कर रहे थे कि तभी सन्तों के आक्रोश से भयभीत प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के निर्देश पर दिल्ली पुलिस के जवानों बिना किसी चेतावनी या घोशणा के फायरिंग आरंभ करदी, जिसमें रैली में लायी गयीं कई गायों सहित सैकड़ों सन्त सहित हजारों लोग मारे गये ।

उक्त संस्मरण 7 नव. गौरक्षा दिवस के अवसर पर राम कार सेवा समिति द्वारा आयोजित गोष्‍ठी में सुनाते हुये समिति के संरक्षक गोपेष्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि खेद है कि उक्त घटना के 42 वर्श व गौहत्या निशेध कानून बनने के बाद भी भारत निर्यातक देशों की सूची  में अग्रणी हो गया है । श्रीचतुर्वेदी ने गोपाल की जन्मभूमि के निकट आये दिन हो रहे गौवंश के कत्ल को रोक पाने में असफल प्रशासनतंत्र की निन्दा करते हुये समाज से इस कलंक को धो डालने के लिये एक जुट हो जाने की अपील भी की ।

इससे पूर्व सभी उपस्थितजन ने गौमाता के चित्र पर पुष्‍पार्पण कर 7 नव. 1966 को संसद के समक्ष हुई फायरिंग में शहीद हुये गौभक्तों को भावभनी श्रद्धांजलि अर्पित की ।

इस अवसर पर समिति के संरक्षक गोपेष्वरनाथ चतुर्वेदी, संयोजक आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ,सहसंयोजक विजय बहादुर सिंह, देवेन्द्र सिंह राठौर, हिन्दू हैल्प लाईन के प्रान्त संयोजक चौ. प्रेम सिंह, ओमप्रकाश सिंह, अमरकान्त मिश्र, योगेश आबा, पंकज पण्डित, उमेश गर्ग,नरेश शर्मा,डा.रमन टण्डन, बनवारीलाल शर्मा आदि की उपस्थिति  रही ।

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