रैली फॉर रिवर्स: कावेरी कॉलिंग के तहत लगेंगे 1.1 करोड़ पौधे

‘कावेरी कॉलिंग फिलहाल एक प्रोजेक्ट के स्तर पर चल रही है, हमें इसे एक आंदोलन में रूपांतरित करने की जरूरत है,’ ईशा फाउण्डेशन के संस्थापक, सद्गुरु ने कल रैली फॉर रिवर्स (Rally for Rivers) की बोर्ड मीटिंग में बोलते हुए कहा। Rally for Rivers (RfR) बोर्ड ने RfR की दो परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने के लिए एक वर्चुअल मीटिंग आयोजित की थी। ये हैं कर्नाटक और तमिलनाडु में कावेरी कॉलिंग और महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में वाघडी नदी पुनरुद्धार परियोजना। सद्गुरु ने कहा, ‘मेरे ख्याल से कर्नाटक सरकार अपना सहयोग देने में एक मिसाल रही है। सहयोग का स्तर जबरदस्त रहा है जो जमीनी स्तर पर कार्यवाही में दिख रहा है।

कर्नाटक राज्य सरकार अपनी कृषि अरण्य प्रोत्साह योजना (KAPY) के जरिए 2020 के मानसून के दौरान लगाने के लिए 70 लाख पेड़ देगी। कावेरी कॉलिंग अभी कावेरी नदी घाटी के 9 जिलों के 54 तालुकों में  योजना को आगे बढ़ाने के लिए वन विभाग के साथ काम कर रही है। इस साझेदारी में 480 कावेरी कॉलिंग स्वयंसेवी और 270 राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हैं। इनमें जिला कलेक्टर, आईएफएस अधिकारी, फॉरेस्ट रेंज अधिकारी, ज्वाइंट डाइरेक्टर (कृषि और बागवानी), और तालुक अधिकारी (कृषि और बागवानी) शामिल हैं।

तमिलनाडु में, ईशा आउटरीच ने अपनी 36 नर्सरियों के माध्यम ने इस साल पहले ही 23 लाख पौधे तैयार कर लिए हैं

‘यह जानना आश्चर्यजनक है कि लॉकडाउन के दौरान कितना अधिक हासिल किया जा चुका है। इन चीजों को करना सचमुच ईशा की खासियत है जब बेहतर सहारे और आर्थिक मजबूती वाली परियोजनाएं भी स्थगित की जा रही हैं,’ बोर्ड के सदस्य प्रवेश शर्मा ने कहा। वे मध्य प्रदेश के भूतपूर्व कृषि सचिव और स्माल फार्मर्स एग्रि-बिजनेस कॉन्सार्टियम, भारत सरकार के एमडी हैं।

महामारी के बावजूद, पौधे तैयार करने के पहले चरण में यह परियोजना समय पर चल रही है। श्री यूरी जैन ने, जो रैली फॉर रिवर्स के अध्यक्ष हैं, बोर्ड को सूचित किया कि कावेरी कॉलिंग का 2020 का 1.1 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य अपरिवर्तित रहेगा।

बायोकॉन लिमिटेड की एग्ज़िक्यूटिव चेयरपर्सन श्रीमती किरन मजूमदार-शॉ ने टीम के ‘जबरदस्त आंकलन और प्रयास’ की सराहना की। टाटा स्टील के भूतपूर्व चेयरपर्सन श्री बी. मुथुरामन ने कहा कि कोविड दौर की सारी सीमाओं के बावजूद टीमों ने जबरदस्त काम किया है।

लाखों किसानों तक पहुंंचने की कोशिश में कावेरी कॉलिंग के स्वयंसेवी सोशल, डिजिटल, और प्रिंट मीडिया के जरिए विशाल जनसंपर्क संचालित कर रहे हैं।

RfR बोर्ड ने वाघडी नदी पुनरुद्धार परियोजना (वाघरी नदी पुनर्जीवन प्रकल्प) की प्रगति की समीक्षा भी की। इसे पिछले साल महाराष्ट्र सरकार की साझेदारी में शुरू किया गया था। ईशा स्वयंसेवी पिछले साल से वाघडी नदी की 40 किलोमीटर की लंबाई के किनारे बसे 40 गांवों में जागरूकता फैलाने और समुदायों को गतिशील करने की गतिविधियों में काम कर रहे हैं।

बोर्ड के सदस्य हैं: वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया के सीईओ और जनरल सेक्रेटेरी, श्री रवि सिंह; सुप्रीम कोर्ट के भूतपूर्व जज, न्यायधीश डॉ. अरिजीत पसायत; इसरो के भूतपूर्व अध्यक्ष, डॉ. ए.एस. किरन कुमार; टाटा स्टील के भूतपूर्व वाइस चेयरमैन, श्री मुत्थुरामन; बायोकॉन की संस्थापक, श्रीमती किरन मजूमदार-शॉ; रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, श्री प्रवेश शर्मा; कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज़ के डाइरेक्टर जनरल, चंद्रजीत बनर्जी; और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, श्री शशि शेखर, जो जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनःनवीनीकरण मंत्रालय के भूतपूर्व सचिव भी हैं।

रैली फॉर रिवर्स

सद्‌गुरु ने साल 2017 में दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरण आंदोलनों में से एक, रैली फॉर रिवर्स की शुरुआत की थी, जिसमें वे खुद गाड़ी चलाकर एक महीने में 16 भारतीय राज्यों से होकर गुजरे थे। इस अभियान में राजनेता, किसान, उद्योगपति, व्यवसायी, छात्र, नौकरीपेशा लोग और मीडिया अभूतपूर्व तरीके से साथ आये थे, और इसका समापन माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को नीति सिफारिश प्रारूप दस्तावेज सौंप कर हुआ था। ये पहल एक बहुत बड़े जनआंदोलन में बदल गई, जिसमें जीवन के हर क्षेत्र से संबंध रखने वाले 16 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने 30 दिन में अलग-अलग तरीकों से हिस्सा लिया। 6 जून 2018 में, नीति आयोग ने सभी 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया, और नदी पुनरुद्धार नीति को लागू करने की सिफारिश की।

कावेरी कॉलिंग

कावेरी कॉलिंग अभियान, जो सितम्बर 2019 में शुरु किया गया था, एक 12 साल की परियोजना है। इसका लक्ष्य कावेरी नदी घाटी के एक तिहाई क्षेत्र में, 50 लाख किसानों को अपनी खेती की जमीन पर 242 करोड़ पेड़ लगाने के लिए सशक्त बनाना है। यह अभियान पेड़-आधारित कृषि के लिए किसानों को आर्थिक लाभ के लिए ज्यादा कीमती पेड़ों को लगाने के लिए प्रोत्साहन देता है। इससे साथ ही निरावृत कावेरी घाटी का हरित-आवरण पुनः स्थापित होगा। कावेरी कॉलिंग को ईशा आउटरीच के द्वारा लागू किया जा रहा है, जो दुनिया की सबसे प्रमुख संरक्षण संस्था, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) का सदस्य है। तमिलनाडु और कर्नाटक के 8.4 करोड़ लोगों की भोजन और जल सुरक्षा पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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