राजीव एकेडमी के विद्यार्थी Yakult की इण्डस्ट्रियल विजिट से वापस लौटे

मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नालॉजी एण्ड मैनेजमेंट के एमबीए के विद्यार्थियों के एक दल ने सोनीपत स्थित Yakult कम्पनी में इण्डस्ट्रियल विजिट किया। विद्यार्थियों ने अपने विजिट में भोजन में द्रव रूप में लिए जाने वाले रोग प्रतिरोधी खाद्य पदार्थों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

Yakult कम्पनी की पीआरओ यामिनी ने विद्यार्थियों को बताया कि हम सभी की रसोई में ऐसे पदार्थ होने चाहिए कि जो प्रतिदिन हमें तरोताजा बनाए रखें। जो हमारे शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करें। Yakult कम्पनी इसी दशा में निरन्तर प्रयासरत रह कर आगे बढ़ रही है। कम्पनी ऐसे कई प्रकार के लिक्विड फूड तैयार कर रही है। जिससे घर गृहस्थी का स्वास्थ्य मजबूत बना रहे। रोग-प्रतिरोधी लिक्विड फूड बच्चों, महिलाओं व वृद्धों को स्वस्थ रखेंगे। जिससे स्वस्थ भारत का सपना साकार हो सकेगा।
सभी विद्यार्थियों ने याकुल्ट कम्पनी के फूड प्लाण्टों का बारीकी से अवलोकन किया। रोग प्रतिरोधक बैक्टीरिया निर्माण व उसके प्रबंधन पक्ष की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त की। कम्पनी के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को प्रोबोयोटिक पदार्थों के महत्व और मानव स्वास्थ में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को समझाया। उन्होंने कहा कि सिरोटा नामक एक जापानी वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम इसका अविष्कार किया था। इसलिए इसे सिरोटा प्रोबायोटिक के नाम से भी जाना जाता है। यह बैक्टीरिया दही जैसा खाने योग्य पदार्थ होता है, जो हमारी आंतों में पनपने वाले विषाणुओं का सफाया कर देता है। जिससे हम पूर्णतः स्वस्थ बने रहते हैं। विद्यार्थियों ने अधिकारियों से याकुल्ट उत्पादों की मार्केटिंग के बारे में भी विस्तार से जानकारी ली। इस सम्बन्ध में याकुल्ट के बारे में उन्होंने बताया कि याकुल्ट लेडी नामक एक कंसेप्ट है। जिससे मार्केटिंग की जाती है। विशेष रूप से यह महिलाओं के लिए है। अधिकारियों ने याकुल्ट मार्केटिंग के तीन अन्य सिद्धान्तों के बारे में भी जानकारी दी।
आरके ग्रुप के चेयरमैन डा. राम किशोर अग्रवाल ने इण्डस्ट्रियल विजिट को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्राचीन भारत में गुरूकुलों के अध्येता छात्र लम्बे समय तक विशेष ज्ञान की खोज में लम्बी-लम्बी यात्राओं के लिए निकलते थे। वाइस चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने कहा कि इण्डस्ट्रियल विजिट से विद्यार्थियों का व्यावहारिक ज्ञान मजबूत होता है साथ ही कई अनसुलझे प्रश्नों का समाधान भी प्राप्त होता है। एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि उत्तम व्यावहारिक ज्ञान, घर से दूर जाकर स्वतंत्र रूप से पूछे प्रश्नों पर आधारित होता है, जो जितने गूढ़ प्रश्न पूछ सकता है। उसका ज्ञानपक्ष उतना ही मजबूत होता जाता है।
निदेशक डा. अमर कुमार सक्सैना ने कहा कि इण्डस्ट्रियल विजिट व्यावहारिक ज्ञान प्राप्ति की विधा (शाखा) है। जो ज्ञान प्राप्ति की निरन्तरता और ज्ञान की भूख और बढ़ा देने वाली है। इसलिए ऐसा विद्यार्थी पूरे आत्मविश्वास के साथ सामने वाले व्यक्ति/अधिकारी द्वारा किये प्रश्नों का सटीक उत्तर देने में समर्थ होता है।

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