राजीव एकेडमी में e-waste पर विचार गोष्ठी में हुआ मंथन

मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टैक्नोलौजी एण्ड मैनेजमेंट में आयोजित विचार गोष्ठी में भारत में e-waste (इलैक्ट्रोनिक कचरे) से बढ़ रहे पर्यावरण खतरे से सावधान करने के लिए विचार व्यक्त किये। विचार गोष्ठी में बीबीए और बीईकॉम के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।

विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में जूना टैक्नोलॉजी की निदेशक श्रीमती स्वाती गांगुली ने e-waste के नुकसान से अवगत कराया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ई-कचरे के निस्तारण के बारे में छात्र-छात्राओं में जन-जाग्रति के लिए आह्वान किया।

ई-कचरे के खतरों के प्रति जन-जाग्रति विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ई-कचरा पर्यावरण को अपनी गिरफ्त में ले लेगा जिससे वातावरण में जहरीली गैसें घुल कर पूरी आबादी के श्वांस सम्बन्धी रोगों में बढ़ोत्तरी करेंगी।

उन्होंने ई-कचरे से सावधान करते हुए कहा कि पूरे देश के पर्यावरण के साथ-साथ ई-कचरे से जनसाधारण की सेहत खराब हो रही है। इसके प्रभाव से गुर्दे, यकृत और ह्दय रोगियों की लगातार संख्या बढ़ती ही जा रही है। हवा में घुलते जहर से निश्चित रूप से मनुष्य के जीवन को खतरा पैदा हो गया है।

उन्होंने कहा कि टी.बी. मोबाइल, कैमरे लैपटॉप, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और कम्प्यूटर आदि का सबसे अधिक कचरा निकलता है। जो पर्यावरण के लिए खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में ई-कचरा को डम्प करके इसके निस्तारण करने के प्रति जन साधारण में जाग्रति कम है, जबकि विदेशों में ई-कचरे के डिस्पोजल के लिए वैज्ञानिक व्यवस्थाएं हैं। वहां नियमतः कचरे को चाहे जहां नहीं फेंक सकते। यदि उपकरण खराब हो जाते हैं, तो उपकरण को संबंधित कम्पनी को ही भेज दिया जाता है वहीं उसे डिस्पोजल करती है।

हालांकि भारत में वर्ष 2011 में ई-कचरे के मैनेजमेंट व हैन्डलिंग के लिए नियम बनाये गये हैं परन्तु उन्हें आज तक लागू नहीं किया जा सका है। फलस्वरूप आज भी चाहे जहां ई-कचरा फेंका जा रहा है।

छात्र-छात्राओं को ई-कचरे के खतरों से समाज में जनजाग्रति लाने के लिए आह्वान करते हुए उन्होंने देश विदेश के आंकड़े प्रस्तुत करते किये। उन्होंने कहा कि विश्व में प्रतिवर्ष 200 से 500 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट निकलता है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में भारत में भी इस कचरे की कुल मात्रा 1.47 लाख मीट्रिक टन थी। जो अब बढ़कर पांच गुनी हो गयी है।

इस अवसर पर निदेशक डा. अमर कुमार सक्सैना ने कहा कि हमने आईटी के क्षेत्र में जो प्रगति की है वह बिल्कुल सही दिशा है, लेकिन उसके (बेस्ट) कचरे से मानवता प्रभावित न हो, इसके विषय में भी सोचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सागर में विभिन्न प्रकार के ई-कचरे को फैंकने से जल जीवों के अस्तित्व पर खतरा बना है।

विश्व स्तर पर ई-कचरे के निस्तारण पर ध्यान दिया जा रहा है अब भारत सरकार और साथ ही भारत के नागरिकों को भी इसके खतरों से बचाव के लिए इस समस्या का शीघ्र समाधान करना चाहिए।

आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. राम किशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि राजीव एकेडमी फोर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में छात्र-छात्राओं में ई-वेस्ट के प्रति जागरुकता उतनी ही जरुरी है जितनी कि आम जन मानस में। वे खुद जागरुक होकर दूसरों को भी जागरुक कर सकेंगे। इससे ई-वेस्ट के निस्तारण के सरल, सुरक्षित और सस्ते तरीकों की खोज किया जाना भी अपरिहार्य है।

इस अवसर पर अनन्या उपाध्याय, अंजली शर्मा, द्रुतिका सक्सैना, जान्हवी गर्ग, खुशबू सिंघल, मुस्कान चैधरी, नेहा कुमारी, शिवानी पाण्डेय, श्रेया गोस्वामी, दिव्यांशी चैहान, अंकुर अग्रवाल, अंशुल गुप्ता, चिन्मय अग्रवाल, रितिक भार्गव, कार्तिकेय सिंह, निर्मेश शर्मा, मोहित कुमार दीक्षित, विशाल उपाध्याय, कुणाल गौतम, मोहित चन्दानी, श्याम सुन्दर आदि ने सारगर्भित विचार व्यक्त किये।

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