एकसाथ चुनाव पर भाजपा के समर्थन में आए रजनीकांत

चेन्‍नै। देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने को लेकर छिड़ी बहस के बीच अभिनेता से राजनेता बने सुपरस्‍टार रजनीकांत ने एक देश, एक चुनाव की मांग का समर्थन किया है। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले रजनीकांत ने रविवार को कहा कि वह एक देश, एक चुनाव का इस आधार पर समर्थन करते हैं क्‍योंकि इससे समय और पैसा दोनों की बचत होगी।
इससे पहले देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव करवाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को समाजवादी पार्टी (एसपी), जेडीयू और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) का साथ मिला है। वहीं डीएमके ने इसे संविधान के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
दरअसल, पिछले दिनों केंद्रीय कानून आयोग ने दो दिन की बैठक आयोजित की थी। इसमें सभी राष्ट्रीय और राज्यों की मान्यता प्राप्त पार्टियों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था।
इसमें एक साथ चुनाव करवाने पर उनकी क्या राय है यह पूछा जा रहा था। केंद्रीय कानून आयोग में एसपी का पक्ष रखने के बाद रामगोपाल यादव ने कहा, ‘समाजवादी पार्टी एक साथ चुनाव करवाने के पक्ष में है। यह 2019 से ही शुरू होना चाहिए। साथ ही अगर राजनेता पार्टी बदलता है या हॉर्स ट्रेडिंग में संलिप्त पाया जाता है तो राज्यपाल को उन पर एक हफ्ते के अंदर ऐक्शन लेने का अधिकार होना चाहिए।’
वहीं तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) ने भी एक चुनाव पर सहमति दी है। पार्टी के चेयरमैन के चंद्रशेखर राव ने केंद्रीय कानून आयोग को पत्र लिखकर कहा, ‘हम लोग एकसाथ चुनाव करवाने के पक्ष में है।’ जनता दल यूनाइटेड ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में साफ किया कि वह ‘एक देश-एक चुनाव’ के मुद्दे पर बीजेपी के साथ है। ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ पर आंध्र प्रदेश की टीडीपी पार्टी ने कहा कि अगर चुनाव अपने तय वक्त पर 2019 में होते हैं तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है।
हालांकि, उन्होंने बैलट पेपर से चुनाव करवाने पर भी जोर दिया। टीडीपी ने कहा कि चुनाव आयोग के पास उतनी ईवीएम मशीन नहीं हैं, जितनी की साथ चुनाव करवाने के लिए जरूरी हैं। ऐसे में नई ईवीएम मशीन बनाने के लिए काफी वक्त और पैसा लगने की भी बात कही गई है। दूसरी तरफ मीटिंग में पहुंचे डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने बीजेपी के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने इसे संविधान के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
बता दें, ‘एक देश-एक चुनाव’ के यूपी फॉम्युले पर अमल करने के लिए अगले लोकसभा चुनाव के साथ 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव करवाने होंगे। इनमें 10 राज्यों का कार्यकाल तो 2019 में ही पूरा हो रहा है, लेकिन बाकी दस राज्यों के आगे के कार्यकाल की ‘बलि’ लेनी पड़ेगी। कुछ राज्य सरकारों को इस फॉम्युले पर दो साल पहले ही अलविदा करना पड़ सकता है। हालांकि, इसके लिए संविधान संशोधन करना होगा, जो आम सहमति के बिना आसान नहीं होगा।
-एजेंसी

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