राजा भैया ने किया नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान

लखनऊ। प्रतापगढ़ के कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने शुक्रवार को नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान किया। हालांकि पार्टी का नाम अभी तय नहीं है। शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राजा भैया ने बताया कि चुनाव आयोग को तीन नाम भेजे गए हैं। हालांकि चर्चा है कि राजा भैया अपने दल का नाम ‘जनसत्ता पार्टी’ रखेंगे। उधर, राजा भैया ने प्रेस वार्ता में एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर सवाल भी खड़े किए।
पार्टी गठन की जानकारी देने के लिए बुलाए गए प्रेस वार्ता में राजा भैया ने आरक्षण के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया। राजा भैया ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण लोगों को हतोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि योग्यता के आधार पर आरक्षण होना चाहिए।
एससी-एसटी ऐक्ट पर केंद्र को घेरते हुए राजा भैया ने कहा कि यह कदम न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले में पहले विवेचना और उसके बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए।
30 नवम्बर को करेंगे रैली
इस दौरान राजा भैया ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान एससी-एसटी ऐक्ट और आरक्षण में प्रमोशन का विरोध उनकी पार्टी का मुख्य मुद्दा होगा। प्रेस वार्ता में राजा भैया ने 30 नवम्बर को लखनऊ के रमाबाई मैदान में रैली आयोजित करने की भी जानकारी दी। माना जा रहा है कि इसी रैली के जरिए राजा भैया 2019 लोकसभा चुनाव का आगाज भी करेंगे।
बीजेपी का इशारा तो नहीं!
चर्चा यह भी है कि राजा भैया द्वारा नई पार्टी के गठन के पीछे बीजेपी के शीर्ष नेताओं का ही इशारा है। तर्क है कि राजा राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। वर्तमान में बीजेपी से पंगा लेना उनके लिए हितकर नहीं है। ऐसे में नई पार्टी का गठन कर जहां बीजेपी से नाराज वोट बैंक को थाम सकते हैं, वहीं ऐसे नेताओं को भी लामबंद कर सकते हैं जो एसपी और बीएसपी से नाराज चल रहे हैं। चुनाव के बाद वह प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी के साथ जा सकते हैं। बीजेपी की पूरी कार्य योजना एसपी-बीएसपी के महागठबंधन की काट के लिए चल रही है। ऐसे में राजा भैया की पार्टी से मैदान में उतरे प्रत्याशी कई सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों की राह आसान कर सकते हैं।
यह भी जानें
1- राजा भैया अब तक भले ही कुंडा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हों, लेकिन लेकिन यूपी की करीब 24 से अधिक सीटों पर उनका दखल रहा है।
2- राजा भैया पहली बार दलीय राजनीति में भले ही उतर रहे हों लेकिन बीजेपी और एसपी से उनके नजदीकी रिश्ते रहे हैं। वह कभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए।
3- राज्यसभा चुनाव के दौरान एसपी-बीएसपी के उम्मीदवार के खिलाफ वोट देने के बाद से यह तल्खी बढ़ गई है।
-एजेंसियां

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