राफेल सौदा: Dassault सीईओ ने कहा, रिलायंस के साथ ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट में मोदी सरकार की कोई भूमिका नहीं

पैरिस। भारत में राफेल सौदे को लेकर जारी राजनीतिक घमासान और आरोप-प्रत्यारोप के बीच फ्रांस की कंपनी Dassault के सीईओ एरिक ट्रेपियर ने कहा कि रिलायंस का इसमें सिर्फ 10 फीसदी ऑफसेट निवेश ही है।
उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि कई खरब के इस डील में भारतीय कंपनी ऑफसेट डील में अल्प भागीदार है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी इस वक्त 100 अन्य कंपनियों के साथ बातचीत की प्रक्रिया में है। इनमें से 30 के साथ हमने पार्टनरशिप की पुष्टि भी कर दी है।
ऑफसेट डील के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में जिसे ऑफसेट कहा जाता है फ्रांस में उसके लिए कंपनसैशन प्रयोग होता है। रिलायंस के साथ ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट का आधार भारत के संदर्भ में कंपनी के कर्मचारी, ट्रेड यूनियन आदि भी आते हैं। Dassault सीईओ ने कंपनी चुनाव पर कहा कि भारतीय नियमों के अनुसार हमने ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, लेकिन कंपनी का चुनाव हमारा था।
क्या है ऑफसेट डील
ट्रिपएर ने कहा कि रिलायंस के साथ हुई ऑफसेट डील भारतीय नियमों के दायरे में है। उन्होंने कहा, ‘ऑफसेट डील साइन भारतीय नियमों की बाध्यता के तहत की गई। भारत में ऑफसेट डील साइन करना हमारी कानूनन अनिवार्य था और इसके तहत हमें यह अधिकार मिला कि हम डील के लिए अपने भारतीय पार्टनर का चयन कर सकें।’
देश में इस मुद्दे पर हो रही भारी राजनीतिक के बीच रक्षा मंत्री फ्रांस के दौरे पर हैं। पैरिस में रक्षा मंत्री ने फिर से स्पष्ट कहा कि मोदी सरकार की दसॉ एविएशन और अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप के साथ गठजोड़ में किसी तरह की कोई भूमिका नहीं थी। दसॉ एविएशन के सीईओ ने भी इसी लीक पर बात करते हुए कहा कि यह हमारा फैसला था कि हमने रिलायंस के साथ समझौता किया।
ट्रिपिएर ने राजनीतिक पक्षों पर बात न करते हुए अपनी कंपनी की नीतियों का हवाला देकर कहा, ‘रिलायंस के साथ कॉन्ट्रैक्ट दसॉ का फैसला था। ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत ही हमने नागपुर में ब्रांच लगाने का फैसला किया। हम इस वक्त भी 100 से अधिक कंपनियों के साथ वार्ता के स्तर पर हैं।’
-एजेंसियां

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