पुण्‍यतिथि: हिन्दी भाषा की लब्ध प्रतिष्ठित रचनाकार प्रभा खेतान

प्रतिष्ठित उपन्यासकार, कवयित्री, नारीवादी चिंतक तथा समाज सेविका प्रभा खेतान की आज पुण्‍यतिथि है। 01 नवंबर 1942 को जन्‍मी प्रभा खेतान की मृत्‍यु 20 सितंबर के दिन 2009 में हुई थी।
प्रभा खेतान फाउन्डेशन की संस्थापक अध्यक्ष, नारी विषयक कार्यों में सक्रिय रूप से भागीदार, फिगरेट नामक महिला स्वास्थ्य केन्द्र की संस्थापक, 1966 से 1976 तक चमड़े तथा सिले-सिलाए वस्त्रों की निर्यातक और अपनी कंपनी ‘न्यू होराईजन लिमिटेड’ की प्रबंध निदेशिका प्रभा खेतान को कलकत्ता चैंबर ऑफ़ कॉमर्स की एकमात्र महिला अध्यक्ष होने का गौरव भी प्राप्त था। वे केन्द्रीय हिन्दी संस्थान की सदस्य थीं।
कोलकाता विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि लेने वाली प्रभा ने “ज्यां पॉल सार्त्र के अस्तित्त्ववाद” पर पीएचडी की थी। उन्होंने 12 वर्ष की उम्र से ही अपनी साहित्य यात्रा की शुरूआत कर दी। उनकी पहली रचना (कविता) जब ‘सुप्रभात’ में छपी थी, तब वे सातवीं कक्षा की छात्रा थीं। 1980-1981 से वे पूर्णकालिक साहित्यिक सेवा में लग गईं। सीने में तकलीफ के बाद कोलकाता के आमरी अस्पताल में उनका उपचार चला तथा हुई बाईपास सर्जरी के दौरान प्रभा खेतान को असामयिक निधन हुआ।
उल्लेखनीय योगदान
फ्रांसीसी रचनाकार सिमोन द बोउवा की पुस्तक ‘दि सेकेंड सेक्स’ के अनुवाद ‘स्त्री उपेक्षिता’ ने उन्हें काफ़ी चर्चित किया। इसके अतिरिक्त उनकी कई पुस्तकें जैसे बाज़ार बीच बाज़ार के ख़िलाफ़ और उपनिवेश में स्त्री जैसी रचनाओं ने उनकी नारीवादी छवि को स्थापित किया। अपने जीवन के अनछुए पहलुओं को उजागर करने वाली आत्मकथा ‘अन्या से अनन्या’ लिखकर सौम्य और शालीन प्रभा खेतान ने साहित्य जगत को चौंका दिया। डॉ. प्रभा खेतान के साहित्य में स्त्री यंत्रणा को आसानी से देखा जा सकता है। बंगाली स्त्रियों के बहाने इन्होंने स्त्री जीवन में काफ़ी बारीकी से झांकने का बखूबी प्रयास किया। आपने कई निबन्ध भी लिखे। डॉ. प्रभा खेतान को जहाँ स्त्रीवादी चिन्तक होने का गौरव प्राप्त हुआ वहीं वे स्त्री चेतना के कार्यों में सक्रिय रूप से भी आप हिस्सा लेती रहीं। उन्हें ‘प्रतिभाशाली महिला पुरस्कार’ और टॉप पर्सनैलिटी अवार्ड’ भी प्रदान किया गया। साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिये केन्द्रीय हिन्दी संस्थान का ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार’ तत्‍कालीन राष्ट्रपति ने उन्हें अपने हाथों से प्रदान किया।
-एजेंसियां

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