संस्कृति विश्वविद्यालय में पंजाबी गीतों के नाम रही Lohri की शाम

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में रविवार की शाम Lohri उत्सव के नाम रही। इस अवसर पर पारम्परिक परिधानों में सज-धज कर छात्र-छात्राओं ने पंजाबी गीतों और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की छटा बिखेरी वहीं तिल, गुड़, मूंगफली आदि अग्नि को अर्पित कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की।

Lohri कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा के प्रो. अरविन्द कुमार वर्मा, कुलपति डा. राणा सिंह, ओ.एस.डी. मीनाक्षी शर्मा, डा. मोतीलाल मिश्रा आदि ने किया। कार्यक्रम में अंकित कुमार गुप्ता, सोनम सिंह बघेल, अनुष्का अग्रहरि, सुमन ठाकुर ने ग्रुप डांस तथा सुकृति पांडेय ने सोलो डांस प्रस्तुत कर सभी की वाहवाही लूटी।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए प्रो. अरविन्द कुमार वर्मा ने कहा कि भारत तीज-त्योहारों का देश है। हर प्रांत में अलग-अलग रूप में अलग-अलग तरीके से विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन इन सभी त्योहारों का मूल एक ही है। यही हमारी भारतीय संस्कृति का भी मूल है जो समस्त भारतवासियों को एक सूत्र में पिरोए रखता है। सभी त्योहार लोगों को उत्साह, खुशी व भाईचारे का संदेश देते हैं। इन त्योहारों की शुद्धता, पवित्रता व मूलभावना को बनाए रखने का दायित्व हम सभी पर है। ये त्योहार हमारी भारतीय संस्कृति का गौरव हैं और हमारी पहचान भी। जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में नित नए अनुसंधान एवं प्रयोगों के माध्यम से मनुष्य बहुआयामी विकास की ओर अग्रसर हुआ है बावजूद इसके मनुष्य का सर्वांगीण विकास तब तक सम्भव नहीं है जब तक कि बौद्धिक विकास के साथ-साथ उसमें भावनात्मक विकास न हो। हमारे देश के तीज-त्योहार मनुष्य के भावनात्मक विकास में सदैव सहभागी रहे हैं।

ओ.एस.डी. मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि हमारे देश में विभिन्न धर्मों एवं सम्प्रदायों के लोग निवास करते हैं तथा किसी न किसी धर्म या सम्प्रदाय से सम्बद्ध त्योहारों का क्रम निरंतर चलता रहता है। ये त्योहार मनुष्य की नीरस दिनचर्या में सुख का अरुण प्रभात लेकर आते हैं। भारतीय त्योहार प्रायः ऋतु चक्र के अनुसार आयोजित किए जाते हैं। lohri में किसानों के लिए एक विशेष संदेश समाहित है। लोहड़ी शब्द लोही से बना है। जिसका अभिप्राय है वर्षा होना, फसलों का फूटना। इस तरह यह त्योहार बुनियादी तौर पर मौसम के बदलाव तथा फसलों के बढ़ने से जुड़ा है। इस समय तक किसान हाड़ कंपाने वाली सर्दी में अपने जुताई-बुवाई जैसे सारे फसली काम कर चुके होते हैं। किसान इस त्योहार के माध्यम से सुखद आशाओं से भरी परिस्थितियों को सेलिब्रेट करते हैं। पंजाब कृषि प्रधान राज्य है वहां लोहड़ी किसानों, जमींदारों एवं मजदूरों की मेहनत का पर्याय है। इसीलिए वहां इसे सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। श्रीमती शर्मा ने कहा कि हर त्योहार हमें मिल-जुलकर रहने का संदेश देते हैं। संस्कृति विश्वविद्यालय परिवार शिक्षा के साथ ही भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं का भी हिमायती है। खुशी की बात है कि आप लोग हर तीज-त्योहार मनाते हुए हम सब एक हैं का संदेश देते हो। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में युवा तरुणाई ने जहां उमंग और उत्साह से भाग लिया वहीं विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर करमजीत सिंह, आयुषी पांडेय, जावेद जफर, प्राक्टर दिलीप सिंह, प्रशासनिक अधिकारी विवेक श्रीवास्तव आदि ने छात्र-छात्राओं की हौसलाअफजाई की। कार्यक्रम का संचालन तान्या उपाध्याय ने किया।

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