पब्लिक हेल्थ सर्वे, ग्रामीण इलाकों में भी अब पांव पसारने लगे हैं जंक फूड

नई दिल्‍ली। इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ के सर्वे के अनुसार, जंक फूड न केवल शहरों बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी अब पांव पसारने लगे हैं। 2018 में आई क्लिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 35 फीसदी भारतीय सप्ताह से भी कम समय में एक बार फास्ट फूड जरूर खाते हैं। खानपान की आदतें भी बीते कुछ वर्षों में तेजी से बदली है। जंक फूड में जरूरी पोषण तत्वों की कमी से मोटापा बढ़ता है। कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा और लीवर व खाना पचाने वाले अन्य पाचन अंगों को जंक फूड को पचाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा और हॉर्मोनल स्राव की जरूरत होती है, क्योंकि इन खाद्य पदार्थों में काबोर्हाइड्रेट और वसा की उच्च मात्रा होती है।
तेजी से बदलती यह जीवनशैली और शहरी लाइफस्टाइल कम नींद का प्रमुख कारण है। काम का बोझ, शिक्षा का दबाव, रिश्तों में आती खटास, तनाव और अन्य समस्याओं के कारण लोगों को नींद नहीं आती है। युवा ज्यादातर समय मूवी देखने और रात में पार्टी करने में बिताते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, नींद की कमी से तनाव के हॉर्मोन रिलीज होते हैं। कम नींद से हृदय रोग और मोटापे का खतरा बना रहता है। नींद न आने की वजह से शरीर को और भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में वसा का संचय होता है, जिससे डायबीटीज का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।
-एजेंसियां

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