पेड़ों की रक्षा मानव धर्मः डा. रामकिशोर अग्रवाल

मथुरा। हमें भावी पीढ़ी को स्वच्छ और सुखमय वातावरण देने के लिए न केवल पौधरोपण करना चाहिए बल्कि उनकी देखभाल भी बेहद जरूरी है। आज पर्यावरण संतुलन गड़बड़ा गया है जिसके चलते मौसम चक्र भी अनियमित होता जा रहा है। पेड़ों की रक्षा मानव धर्म है। पर्यावरण की रक्षा के लिए सरकार तो अपना काम कर रही है परन्तु हमें भी कुछ छोटी-छोटी बातों को अमल में लाकर अपने आसपास के वातावरण को हरा-भरा बनाने का प्रयास करना चाहिए। उक्त उद्गार आर.के. एज्यूकेशन हब के चेयरमैन डा. रामकिशोर अग्रवाल ने जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस परिसर में पौधरोपण के अवसर पर छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। डा. अग्रवाल ने स्वयं पौधरोपण करने के बाद पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान देने का संकल्प दोहराया।

डा. अग्रवाल ने कहा कि प्रकृति और मनुष्य का सम्बन्ध पुराना है। पर्यावरण की स्वच्छता, निर्मलता और संतुलन से ही संसार को बचाया जा सकता है। हम अपने और अपने बच्चों के जन्मदिन पर न केवल पौधरोपण करें बल्कि दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें, इससे पर्यावरण संतुलन कायम रखने में मदद मिलेगी। डा. अग्रवाल ने जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस के छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे अपने संस्थान को हरा-भरा बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि पौधे रोप देने भर से बात नहीं बनेगी। पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी है कि हम पौधों को नियमित रूप से पानी देकर इनकी रक्षा का भी संकल्प लें।

संस्थान के निदेशक डा. एल.के. त्यागी ने कहा कि पेड़ आक्सीजन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में पौधे सबसे अधिक आक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। हम कह सकते हैं कि पेड़-पौधे मनुष्य के जीवन का आधार हैं। इस अवसर पर प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने पांच-पांच पौधे लगाने और उनकी रक्षा का संकल्प लिया।

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