Promise Day विशेष: मैं उसके वादे का अब भी यक़ीन करता हूँ

Promise Day को साकार करते कुछ शेर नामचीन शायरों ने लिखे हैं। अपनी-अपनी सोच और अपने-अपने इरादों को जाहिर करने वाले इन शेरों से शायरों की कैफियत का अंदाज लगाना आसान है।

आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए’तिबार किया
– गुलज़ार

एक इक बात में सच्चाई है उस की लेकिन
अपने वादों से मुकर जाने को जी चाहता है
– कफ़ील आज़र अमरोहवी

न कोई वा’दा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था
– फ़िराक़ गोरखपुरी
इक़रार-ए-मोहब्बत तो बड़ी बात है लेकिन
इंकार-ए-मोहब्बत की अदा और ही कुछ है
-अख़तर मुस्लिमी

ये दिन तो सर्फ़ आप के वादों में हो गए
अब दिन नया निकालिए इक़रार के लिए
– निज़ाम रामपुरी

तेरी मजबूरियाँ दुरुस्त मगर
तू ने वादा किया था याद तो कर
– नासिर काज़मी
इक़रार है कि दिल से तुम्हें चाहते हैं हम
कुछ इस गुनाह की भी सज़ा है तुम्हारे पास
-हसरत मोहानी

अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी
रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर
– जौन एलिया

तिरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए’तिबार होता
– मिर्ज़ा ग़ालिब
ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया
झूटी क़सम से आप का ईमान तो गया
– दाग़ देहलवी

तिरे वा’दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए
– फ़ना निज़ामी कानपुरी
फिर बैठे बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लिया
फिर उठ खड़ा हुआ वही रोग इंतिज़ार का
– अमीर मीनाई

मैं उस के वादे का अब भी यक़ीन करता हूँ
हज़ार बार जिसे आज़मा लिया मैं ने
– मख़मूर सईदी
सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का
जब उस ने वादा किया हम ने ए’तिबार किया
– जोश मलीहाबादी

तेरे वादे को कभी झूट नहीं समझूँगा
आज की रात भी दरवाज़ा खुला रक्खूँगा
– शहरयार

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