सरकार के खजाने को खाली करने वाला प्रोजेक्‍ट है जेवर international airport

आगरा। गौतम बुद्ध नगर की जेवर तहसील में बनाये जा रहे नौयडा international airport को बनाये जाने के लिये के लिये कोई भी निजीक्षेत्र का निवेशक आगे आने की हिम्‍मत नहीं दिखा सका। ग्रीनफील्‍ड प्रोजेक्‍ट के पब्‍लिक प्राईवेट फंडिंग के रूप में इसे बनाये जाने के प्रयास शुरू किये गये थे।

उम्‍मीद जतायी गयी थी कि प्रोजेक्‍ट की घोषणा होते ही निवेशक दौड़ेे चले आयेंगे किन्‍तु निवेश व्‍यवसाय क्षेत्र में व्‍यवसायिक संभावनाओं से शून्‍य केवल राजनैैतिक महत्‍वकांक्षा वाला प्रोजेक्‍ट माना जाने से कोई भी देशी या विदेशी निवेशक आगे आने की हिम्‍मत नहीं दिखा सका।

अब यह प्रोजेक्‍ट उ प्र सरकार के खजाने को खाली करने वाला प्रोजेक्‍ट बनकर रह गया है यानि उ प्र सरकार को ही अपने पैसे से जमीन खरीदनी है और स्‍वयं ही बनवाने का भी खर्चा उठाना है।

इस प्रोजेक्‍ट को अंजाम दिये जाने के लिये पूर्व में हो चुकी तमाम अनियमित्‍ताओं के बाद अब ताजी अनियमितता मुखौटा कंपनी (शैल कंपनी ) नौयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लि के रूप में बनाये जाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

सिविल सोसायटी आगरा ने सेबी (SEBI) के चेयरमैन को पत्र लिख कर इसका पंजीकरण स्‍थगित कर सुनिश्‍चित करने को अनुरोध किया है यह कंपनी जिस कारोबार को करने जा रही है( इंटरनेशनल एयरपापेर्ट आप्रेशन) उसके लिये आधार भूत सुविधाओं से संपन्‍न है या नहीं। क्‍योंं कि हमारी जानकारी के अनुसार कंपनी के मुख्‍य निवेशक नौयडा डव्‍लप मेंट अथार्टी ,ग्रेटर नौयडा डव्‍लपमेंट अथार्टी ,यमुना एक्‍सप्रेस वे अथार्टी और उत्‍तर प्रदेश सरकार को मिलकर 4065 करोड रुपये की राशि का निवेश केवल 1441.1468 हेक्‍टेयर जमीन को अधिग्रहित करने के लिये करना होगा। इस राशि का भी एक बडा भाग उन तमाम न्रिष्‍क्रिय कंपनियों को जायेगा जिन्‍होंने किसानों से अपने नाम बैनामे करवा रखे हैं।

कंपनी की साझेदार या निवेशक कंपनियों में से नौयडा डव्‍लपमेंट अथार्टी और यू पी सरकार को क्रमश: 1500 करोड ,जबकि ग्रेटर नौयडा डव्‍लपमेंट अथार्टी और यमुना एक्‍सप्रेस वे अथार्टी को क्रमश: 500-500 करोड का निवेश करना होगा। इन निवेशों के आधार पर उ प्र सरकार व नौयडा डव्‍लपमेंट अथार्टी 37.5 प्रतिशत के तथा यमुना एक्‍सप्रेस वे अथार्टी तथा ग्रेटर नौयडा डव्‍पलमेट अथार्टी क्रमश: 12-12 प्रतिशत के भागीदार होंगे।

तीनो डव्‍लपमेट अथार्टी अपने को स्‍थापित किये जाने के नियमों और घोषणाओं के अनुसार किसी कार्मर्शियल कंपनी में निवेश या भागीदार नहीं बन सकतीं। ये तीनों ही मुनाफे में चलने वाली कंपनियां नहीं हैं और सरकार संरक्षित अथार्टी होने के कारण टैक्‍स के दायरे में भी नहीं हैं।नौयडा डव्‍पपमेट अथार्टी के अलावा बाकी दोनो अथार्टियां बेहद घाटे में हैं, इनके विरूद्ध अनेक वित्‍तीय व प्रशासनिक अनियमित्‍ताओं के मामलों में जांच विचाराधीन है।

यू पी सरकार भी माली रूप से इस घाटे के प्रोजेक्‍ट में निवेश करने की स्‍थिति में नहीं है। वैसे भी तीनोंं ही अथाट्रियों और यू पी सरकार ने निवेश का फैसला जनअपेक्षाओं के अनुरूप नहीं लिया है। क्‍योंं कि विशुद्ध संभावना शून्‍य प्राजेक्‍ट में पैसा लगाये जाने को उ प्र की जनता शायद ही तैयार हो।

इस कंपनी को जमीन की खरीद व मुआवजे के अलावा इन्‍दिरागांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की संचालक कंपनी को भरपूर मुआवजा/जुर्माना भी देना होगा।  एयरपोर्ट इन्‍दिरागांधी international airport(टम्रिनल -3) से 150 कि मी एरियल डिस्‍टैस से कम है। इस प्रकार के मामलों में नये एयरपोर्ट संचालकों को पुराने एयरपोर्ट संचालक को जुर्माना/ मुआबजा देना होता है। मोजूदा सरकार के कार्यकाल में ही यह कानून संसद में पास हुआ है। यह किना होगा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।वैसे पब्‍लिक के पैसे से सरकार का जानबूझ कर जुर्माना या क्षतिपूर्त की भरपायी करने का एवियेशन सैक्‍टर जैसे कामर्शियल क्षेत्र में अपने आप में पहला उदहारण होगा।

रजिस्‍ट्रार आफ कंपनीज कानपुर के कार्यालय को ,मिनिस्‍ट्री आफ कार्पोरेट अफयर नई दिल्‍ली को इस कंपनी को जनहित में पंजीकृत न करने के अनुरोध सहित पत्र लिखे हैं। उ प्र सरकार के मुख्‍य सचिव को भी पत्र लिखकर आग्रह किया है कि जनअपेक्षाओं के प्रतिकूल बनायी जा रही नौयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लि में प्रदेश की जनता के कर से होने वाली आये को निवेश करने के निर्णय पर पुनर्विचार कर सरकार की कंपनी से भागीदारी का निर्णय वापस लें।

चूंकि ग्रेटर नौयडा डव्‍ल्‍पमेट अथार्टी, नौयडा डव्‍लपमेट अथार्टी तथा यमुना एक्‍सप्रेस वे इंडस्‍ट्रियल डव्‍लपमेंट अथार्टी में भारी वित्‍तीय और जमीन घोटाले हुए हैं और इनके कई बडे अधिकारी उनमें संलिप्‍त हैं । इनमें से कुछ की जांच सी बी आई के द्वारा भी की जा रही है। इस लिये कंपनी को बनाये जाने की सूचना तथा निगरानी रखने का अनुरोध सी बी आई से भी किया है। इन जांचों को यूपी सरकार के द्वारा खुद ही करने के आदेश दिये हुए हैं, कुछ में अदालती आदेश भी हैं।

पुन: सिविल सोसायटी आगरा भारत सरकार से आग्रह करती है कि अपने शैलकंपनियों के विरुद्ध शुरू किये गये अभियान को सार्थकता प्रदान करने के लिये एक और नयी कंपनी को कारोबार मे आने से पहले जांचें ।एविऐशन क्षेत्र में आने वाली इस कंपनी के पास न तो अपनी जमीन है और नहीं धन । जिन स्‍त्रोतों से निवेश जुटाये जाने की बात की गयी है वे सीधे जनता के टैक्‍स से जुडे हुए हैं। जो क विकास के काम के नाम पर जनता से वसूला जाता है न कि कंपनी बनाये जाने के लिये ।वैसे भी जो निवेश इस एवियेशन कंपनी मे किया जाना है, इसका एक दिन का ब्‍याज ही प्रचलित दर से 2 करोड रुपये रोज का यानि साठ हजार करोड महीने का होगा। इस प्रकार जैबर में पब्‍लिक के पैसे से इंटरनेनेशनल एयरपोर्ट बनाये जाने का कृत्‍य उ प्र को एक ऐसी आर्थिक बदहाली मे पहुंचाने वाला होगा जिससे उबरपाना दैवयोग से ही संभव हो पायेगा।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा ने सेबी, चीफ़ सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश सरकार, सचिव मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स भारत सरकार, रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज उत्तर प्रदेश रीजन कानपूर, कैग दिल्ली और सीबीआई को पत्र लिख कर वास्तु स्‍थिति से अवगत कराया है और सम्बंधित विभागों से रिक्वेस्ट कि है के नए कंपनी को रजिस्टर ना किया जाये.

सीबीआई नॉएडा और ग्रेटर नॉएडा अथॉरिटी में अपनी तहकीकात कर रही है – yadav सिंह के बारे में सभी जानते हैं.

इस नई कंपनी का होने वाला बिज़नस लीगल अप्प्रोवाल्स में अटका हुआ है – एनसीआर बोर्ड का अप्रूवल नहीं है. हमने अपने पत्र के साथ सभी को एनसीआर एक्ट कि कॉपी भी भेजी है.

यह सब प्रदेश कि जनता के साथ ठगी है और जनता के पैसे का दुरूपयोग है. आज कि केंद्रीय और प्रदेश सरकार अपनी मनमानी कर के आने वाले समय का एक बड़ा घोटाला तैयार कर रही हैं.

सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा इस का विरोध करती है और यह बात आम जनता तक लाना चाहती है. हम आगरा के साथ हो रहे अन्य का भरपूर विरोध करते हैं. टायर ओप्पोर्तुनिटी को छोड़ कर सरकार जेवर में एक नए फतेहपुर सिकिरी का निर्माण कर रही है. इतिहास गवाह है के अकबर को भी आगरा वापस आना पड़ा था.

यह लड़ाई आगरा के एयरपोर्ट जो कि लीगल है और जेवर जहाँ पर इल लीगल को लीगल करने की है. जेवर में एनसीआर बोर्ड कि परमिशन नहीं ली गयी है, ना ही चक बंदी कि गयी है, उपजाऊ जमीन को तहस नहस किया जा रहा है.
शासन आदेश – नॉएडा international airport लिमिटेड पर-

http://shasanadesh.up.nic.in/GO/ViewGOPDF_list_user.aspx?id1=NTgjNiMxIzIwMTg=

http://shasanadesh.up.nic.in/ViewGOFile.aspx?qry=NDkjNiMxIzIwMTg=

http://shasanadesh.up.nic.in/ViewGOFile.aspx?qry=NDcjNiMxIzIwMTg=

सिविल सोसायटी की पत्रकार वार्ता को संबोधित करने वालों में सिविल सोसाइटी के अध्‍यक्ष डा शिरोमणि सिंह; सैकेट्री अनिल शर्मा, श्री राजीव सक्सेना, श्री अखिल महेश्वरी आदि शामिल थे।

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