आतंकवाद से निपटने के लिए जटायू का उदाहरण दिया प्रधानमंत्री मोदी ने

Prime Minister Modi gave examples of Jatayu to deal with terrorism
आतंकवाद से निपटने के लिए जटायू का उदाहरण दिया प्रधानमंत्री मोदी ने

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में आतंकवाद से सख्ती से निपटने के लिए जटायू का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व आतंकवाद के कारण त्रस्त है। आतंकवाद ने मानवता को ललकारा है लेकिन पुराणों की घटनाओं का अगर आज के संदर्भ में विश्लेषण करने का प्रयास करें तो मैं कहूंगा कि आतंक के खिलाफ सबसे पहली लड़ाई जटायू ने लड़ी थी।
PM रविवार को दिल्ली में उगादी मिलन कार्यक्रम में जनता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जटायू के संघर्ष की कहानी का नाट्य मंचन किया गया था। यह मंचन देखकर ही मोदी बोले कि अभ्यंकर का संदेश जटायू ने दिया था। बाहुबली रावण के खिलाफ जटायू ने एक नारी की रक्षा के लिए जीवन की बाजी लगा दी थी। इस नाटक का मंचन अभयम का संदेश देता है। आंतक के खिलाफ मानवता के लिए जीने का संदेश देता है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने हर राज्य की कला और संस्कृति को जानने-समझने के महत्व पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने उस योजना के विषय में बताया जिसके तहत विभिन्न राज्य MoU साइन कर रहे हैं ताकि स्कूली बच्चों को दूसरे राज्यों के विषय में जानकारी दी जा सके। उन्होंने हरियाणा और तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि इन 2 राज्यों के साथ कुछ और राज्यों ने भी यह समझौता किया है। इसके तहत सालभर इन राज्यों के बच्चों को एक-दूसरे की कला-संस्कृति और दूसरे पहलुओं के विषय में जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसके तहत हरियाणा के स्कूलों में तेलगू भाषा के 100 वाक्य और 5 तेलगू गीत सिखाए जाएंगे। हरियाणा में तेलगू फिल्म फेस्टिवल होगा। क्विज कॉम्पिटिशन होगा, फूड फेस्टिवल होगा। और भी कई कार्यक्रम होंगे जिनका मकसद बच्चों को तेलंगाना के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना होगा। हरियाणा से जुड़ी ऐसी ही ऐक्टिविटीज तेलंगाना में भी आयोजित की जाएंगी। हर साल राज्य बदलते जाएंगे।
PM ने कहा कि अगर निरंतर यह प्रक्रिया चलती रहे तो अगली पीढ़ी देश के अलग-अलग इलाकों की बारिकियों से भली-भांति जुड़ी होगी। सबका अपना महत्व है, सामर्थ्य और सौंदर्य है। इसको जानने-समझने और हो सके तो जीने का प्रयास किया जाना चाहिए। आखिर में उन्होंने देश के सभी नागरिकों को उगादी और नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पहचान के शब्द अलग होंगे, परंपरा अलग होगी लेकिन भाव, संस्कार एक ही रहते हैं।
-एजेंसी

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