फिलिस्तीन के रमल्ला पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, अराफत के मकबरे पर भी जाएंगे

Prime Minister Modi arrives in Palestine
फिलिस्तीन के रमल्ला पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी

रमल्ला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलिस्तीन के रमल्ला पहुंच गए हैं। पीएम के तीन देशों के दौरे में यह दूसरा पड़ाव है। अपने इस दौरे में पीएम फिलिस्तीन के राष्ट्रपति अब्बास से मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार यात्रा के दौरान पीएम ‘परस्पर हित के विषयों पर’ इन देशों के नेतृत्व के साथ बात करेंगे।’ फिलिस्तीन में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा है। ऐसे में यह कई मायनों में महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस दौरे में पीएम मोदी राष्ट्रपति से मिलने के बाद पूर्व राष्ट्रपति यासिर अराफत के मकबरे पर भी जाएंगे और इसके बाद अराफत के संग्राहलय का दौरा भी करेंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों को लेकर बात भी होगी। इसके बाद दोनों देशों के नेता संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।
बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि यह दौरा इस बात की गलतफहमी को दूर करेगा कि मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत ने फिलिस्तीन को लेकर अपनी पॉलिसी में कुछ बदलाव लाए हैं। साल 2017 में जब पीएम मोदी इजरायल गए थे तब वह फिलिस्तीन नहीं गए थे, जिस पर काफी निराशा जताई गई थी। कूटनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम भारत की पूर्व में अपनाई गई नीति से ठीक उलट थी।
फिलिस्तीन में विशेषज्ञों ने कहा कि इजरायल के साथ भारत के बेहतर संबंधों से असल में उनके देश को फायदा पहुंच सकता है और फिलिस्तीनी नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को इजरायल के साथ शांति प्रक्रिया फिर से शुरू करने के एक अवसर के तौर पर देखता है। मोदी इस क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच रामल्ला पहुंच रहे हैं। वह फिलिस्तीन की यात्रा करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन एग्जिक्यूटिच कमेटी के सदस्य अहमद मजदलानी ने कहा कि इजरायल और भारत के बीच बेहतर संबंधों से फिलिस्तीनियों को मदद मिल सकती है। द यरुशलम पोस्ट ने मजदलानी के हवाले से कहा, ‘उनके बीच बढ़ते संबंध सकारात्मक हो सकते हैं क्योंकि अब भारत का इजरायल पर अधिक दबाव है और वह हमारे पक्ष में दबाव बना सकता है।’
रमल्ला में कई अधिकारियों से चर्चा के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि फिलिस्तीनी नेतृत्व भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा को शांति प्रक्रिया के गतिरोध को तोड़ने में मदद करने के एक अवसर के रूप में देख रहा है। हालांकि इजरायल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल अमेरिका के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगा। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘आज वैश्विक समुदाय में भारत की व्यापक स्वीकार्यता है। उसके गणतंत्र दिवस समारोह में आसियान देशों के नेताओं की भागीदारी उसके बढ़े हुए दर्जे को स्पष्ट तौर पर दर्शाती है। ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) में उसकी सदस्यता तथा कई प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उसकी दृश्यता साफ तौर पर यह दिखाती है कि आज वह एक वैश्विक खिलाड़ी है।’’
इजरायल के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों, मोदी की इजरायल यात्रा को लेकर मिलनसारिता तथा इजरायली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से ऐसा नहीं लगता कि फिलिस्तीन बेचैन है। विश्वविद्यालय के एक छात्र एमान ने कहा, ‘यहां तक कि जॉर्डन और मिस्र के भी इजरायल के साथ पूर्ण कूटनीतिक संबंध हैं तो भारत के क्यों नहीं हो सकते।’ इजरायल से भारत के बढ़ते संबंध के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने खुद कहा कि ‘किसी भी देश के पास अन्य देशों से संबंध कायम करने का अधिकार है।’
मोदी पश्चिम एशिया की अपनी यात्रा के दौरान इजरायल नहीं जाएंगे। भारत सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार फिलिस्तीन के पक्ष में वोट करता रहा है और नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उसके हालिया वोट पर स्पष्ट तौर पर ‘नाखुशी’ जताई थी, जहां 128 देशों ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी घोषित करने के अमेरिका के कदम को खारिज कर दिया था। मोदी आज फिलिस्तीन की तीन घंटे की व्यस्त यात्रा फिलिस्तीन के प्रतिष्ठित दिवंगत नेता यासीर अराफात की कब्र पर पुष्पचक्र अर्पित कर शुरू करेंगे। उनके साथ फिलिस्तीन के उनके समकक्ष रामी हमदल्ला भी होंगे। इजरायली मीडिया में इस यात्रा को प्रमुखता से जगह दी गई है।
कई खबरों में इस पर नाखुशी जताई गई है। कई इजरायली अराफात को इस क्षेत्र में कई निर्दोष नागरिकों की हत्या और हिंसा भड़काने के लिए दोषी मानते हैं। अराफात को श्रद्धांजलि देने के बाद वह कब्र के पास बने उनके संग्रहालय भी जाएंगे। वह 15 माह पहले बने यासीर अराफात के संग्रहालय में करीब 20 मिनट बिताएंगे। इस संग्रहालय में पूर्व फिलिस्तीनी नेता की जीवन गाथा बताई गई है। अराफात संग्रहालय के निदेशक मुहम्मद हलायका के अनुसार, इस संग्रहालय का दौरा करने वाले मोदी पहले प्रधानमंत्री होंगे। इसके बाद राष्ट्रपति अब्बास मोदी की अगवानी करेंगे और दोनो नेता चर्चा करेंगे, द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे, संयुक्त संवाददाता सम्मेलन करेंगे और दोपहर का भोजन करेंगे। इसके बाद मोदी अम्मान रवाना हो जाएंगे। वहां से एक दिन बाद मोदी दो दिवसीय यात्रा पर संयुक्त अरब अमीरात जाएंगे।
-एजेंसी