उत्तर प्रदेश में 39 जातियों को ओबीसी में शामिल करने की तैयारी

लखनऊ। संसद के दोनों सदनों में ओबीसी जातियों से संबंधित संविधान संशोधन के पास होते ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सक्रिय हो गई है और आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ओबीसी वोटरों को ध्यान में रखते ही रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
इसी की मद्देनजर योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में 39 जातियों को ओबीसी में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। साल 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसी के चलते उत्तर प्रदेश के अन्य राजनीतिक दलों ने भी ओबीसी वोटरों को साधने की पैंतरेबाजी शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि संसद में काफी हंगामेदार रहे मानसून सत्र के दौरान ओबीसी संशोधन बिल के पास होने के बाद अब राज्यों के पास अपनी ओबीसी लिस्ट बनाने का अधिकार प्राप्त हो गया है।
उत्तर प्रदेश की इन जातियों को ओबीसी में किया जा सकता है शामिल
– वैश्य, जायस्वर राजपूत, भूटिया, रूहेला
– अग्रहरि, दोसर, मुस्लिम शाह, मुस्लिम कायस्थ
– हिंदू कायस्थ, कोर क्षत्रिय राजपूत, दोहर
– अयोध्यावासी वैश्य, बरनवाल, कमलापुरी वैश्य
– केसरवानी वैश्य, बगवां, भट्ट, उमर बनिया, महौर वैश्य
– हिंदू भाट, गोरिया, बॉट, पंवरिया, उमरिया, नोवाना, मुस्लिम भट
ओबीसी में इन जातियों को शामिल करने के लिए होगा सर्वे
– खार राजपूत, पोरवाल, विश्नोई
– पुरुवर, कुंदर खराड़ी, बिनौधिया वैश्य
– माननीय वैश्य, गुलहरे वैश्य, गढ़ैया, राधेड़ी, पिठबाज
ओबीसी वर्ग में जातियां बढ़ने से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
उत्तर प्रदेश में यदि राज्य सरकार 39 और जातियों को ओबीसी में शामिल करने का अंतिम फैसला कर लेती है तो ओबीसी वर्ग में प्रतिस्पर्धा और बढ़ जाएगी। दरअसल पिछड़ा वर्ग को फिलहाल राज्य में सिर्फ 27 प्रतिशत ही आरक्षण है। योगी सरकार ने ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए कई जातियों को ओबीसी में शामिल करने का मास्टर स्ट्रोक खेला है। सपा व अन्य राजनीतिक दलों के लिए कई पिछड़ी जातियां बेस वोटर के रूप में शामिल रही है, लेकिन यदि योगी सरकार 39 जातियों को ओबीसी में शामिल करती है तो सपा सहित अन्य राजनीतिक दलों का जनाधार खिसक सकता है।
-एजेंसियां

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