भक्‍तों को अभिभूत करने के लिए जन्‍मभूमि तैयार, श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी महोत्‍सव 3 सितंबर को

मथुरा। मथुरापुरी का महिमागान श्रीमद्भागवत, महाभारत, गर्ग संहिता, अष्‍टादश पुराण सहित अनेकानेक उत्कीर्ण संस्कृत अभिलेखों में किया गया है, भगवान श्रीकृष्‍ण की उसी पवित्र प्राकट्य भूमि पर पूर्णावतार, रसावतार, प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म महोत्सव शास्त्रीय मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुसार 03 सितम्बर 2018 सोमवार को भाद्रपद कृष्‍ण अष्‍टमी पर मनाया जा रहा है।

इस संबंध में श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि न्यास के सचिव कपिल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रीकृष्‍ण-जन्मभूमि के संपूर्ण परिसर को अद्भुत कलात्मकरूप से सजाया जा रहा है। इस अवसर की महत्ता, जन्मभूमि की गरिमा एवं भक्तों की भावनाओं के अनुरूप जन्मभूमि की नयनाभिराम साज-सज्जा को देखकर श्रद्धालुगण अभिभूत हो उठेंगे। जन्मभूमि के संपूर्ण प्रांगण, भवनों एवं देवालयों को ब्रज के भावुक भक्त सज्जाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न भागों से पधारे कारीगर अद्भुत स्वरूप प्रदान करने के लिए दिन-रात साज-सज्जा एवं विद्युत सजावट के कार्यों में लगे हुए हैं। जन्मभूमि के अंदर अथवा परिसर के बाहर से श्रद्धालुगण जिस दिशा से भी श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि के दर्शन करेंगे, वहीं से उनको जन्मभूमि की नयनाभिराम छटा के दर्शन प्राप्त हों, ऐसा संस्थान का प्रयास है।

जन्मभूमि परिसर में स्थित श्रीकेशवदेव मंदिर में विविध प्रकार के पुष्‍प,-पत्र एवं वस्त्रों से निर्मित भव्य बंगले में ठाकुरजी विराजमान होंगे। भगवान की प्राकट्य भूमि एवं कारागार के रूप में प्रसिद्ध गर्भगृह की सज्जा चित्ताकर्षक होगी। मंदिर के प्राचीन वास्तु के अनुरूप गर्भगृह के भीतरी भाग को सजाया जायेगा। पुष्‍प, रत्न प्रतिकृति के अद्भुत संयोजन से गर्भगृह के मूल स्वरूप में बिना कोई परिवर्तन किये दिव्य स्वरूप प्रदान किया जायेगा। साथ ही पर्व के अनुकूल प्रकाश का संयोजन भी गर्भगृह की भव्यता एवं दिव्यता में वृद्धि करेगा।

भागवत भवन मंदिर की साज-सज्जा व्यवस्था श्री हेमन्त मुकुट वाले, श्रीकेशवदेव मंदिर प्रांगण साज-सज्जा में श्री अनिल भाई ड्रेस वाले विशेष योगदान दे रहे हैं तथा विद्युत सजावट में भागवत भवन मंदिर प्रांगण में आगरा के श्री राजेश सिन्हा, श्रीकेशवदेव मंदिर प्रांगण में अलीगढ़ के श्री सोमेन्द्र गुप्ता एवं बाह्य क्षेत्र में मथुरा के श्री निरंजन प्रसाद गुप्ता का निरन्तर सहयोग मिल रहा है।

इस पवित्र अवसर पर ठाकुरजी रेशम, जरी एवं रत्न प्रतिकृति के सुन्दर संयोजन से बनी ‘कमलाकृति’ पोशाक धारण करेंगे। श्रीकृष्‍ण-जन्माष्‍टमी 03 सितम्बर सोमवार को प्रातः मंगला-दर्शन से पूर्व भगवान इसी पोशाक को धारण कर दर्शन देंगे। इस वर्ष ठाकुरजी को रेशम एवं रत्न प्रतिकृति जड़ित पोशाक धारण करायी जायेगी। पोशाक में रत्न एवं रेशम उपयोग करते हुये कमल पुष्‍प, पत्ती, लता-पता आदि की जड़ाई की गयी है। रेशम एवं रत्न प्रतिकृति के प्रयोग करते समय यह ध्यान रखा गया है कि भक्तों को सभी आकृतियां स्पष्‍ट रूप से दृष्‍टव्य हों।

जन्माष्‍टमी की पूर्व संध्या 02सितम्बर रविवार को सांय 6ः00 बजे श्रीकेशवदेव मंदिर से संत एवं भक्तजन ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे, के मध्य भगवान श्री राधाकृष्‍ण की दिव्य पोशाक अर्पित करने के लिए संकीर्तन करते हुये जायेंगे। पोशाक, मुकुट, श्रंगार, दिव्य मोर्छलासन, कामधेनु गाय की प्रतिकृति एवं दिव्य रजत कमल के विशेष दर्शन होंगे। इस वर्ष सुन्दर जरी, रेशम एवं रत्न प्रतिकृतियों के संयोजन से दिव्य ‘ब्रजरत्न’ मुकुट, जन्माष्‍टमी के पवित्र दिन ठाकुरजी धारण करेंगे।

03 सितम्बर सोमवार को ही प्रातः दिव्य शहनाई एवं नगाड़ों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन होंगे। तदोपरान्त भगवान का पंचामृत अभिषेक किया जायेगा एवं भगवान के पवित्र स्त्रोतों का पाठ एवं पुष्‍पार्चन होगा। प्रातः 10ः00 बजे श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष श्रीनृत्यगोपाल दास महाराज एवं कार्ष्‍णि गुरूशरणानन्द महाराज के भावमय सानिध्य में दिव्य पुष्‍पांजलि का कार्यक्रम श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि के सिद्ध लीलामंच पर संपन्न होगा।

जन्म महाभिषेक का मुख्य एवं अलौकिक कार्यक्रम रात्रि 11ः00 बजे श्रीगणेश-नवग्रह आदि पूजन से शुरू होगा। रात्रि 12ः00 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ संपूर्ण मंदिर परिसर में बज उठेंगे ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे और मृदंग एवं हरिबोल एवं करतल ध्वनि के साथ नाच उठेंगे असंख्य भक्तजन, संत एवं भगवान के जन्म की महाआरती शुरू होगी जो रात्रि 12ः10 बजे तक चलेगी। ढोल एवं मृदंग अभिशेक स्थल पर तो बजेंगे ही साथ-ही-साथ सपूर्ण मंदिर परिसर में स्थान-स्थान पर भी इनका वादन होगा। तदोपरान्त केसर आदि सुगन्धित द्रव्यों से लिपटे हुये भगवान श्रीकृष्‍ण के चल विग्रह मोर्छलासन में विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे।

ठाकुरजी के श्रीविग्रह का दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों से दिव्य महाअभिषेक किया जायेगा। जन्माभिषेक के उपरान्त इस महाप्रसाद का वितरण जन्मभूमि के निकास द्वार के दोनों ओर वृहद मात्रा में किया जायेगा।

भगवान का जन्म महाभिषेक रात्रि 12ः15 बजे से रात्रि 12ः30 बजे तक चलेगा। तदोपरान्त 12ः40 से 12ः50 तक श्रृंंगार आरती के दर्शन होंगे। जन्म के दर्शन रात्रि 1ः30 बजे तक खुले रहेंगे।

इस वर्ष श्रीकृष्‍ण जन्माष्‍टमी के अवसर पर श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि से पर्यावरण की रक्षा के लिए आग्रह, एक संकल्प के रूप में प्रचारित एवं प्रसारित किया जायेगा।

इस नयनाभिराम दृश्‍य को विभिन्न टीवी चैनल्‍स पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम में सजीवता के साथ दिखाया जा सके इसके लिए अभिषेक स्थल पर बनाये जा रहे मंच को भी विशेष स्वरूप प्रदान किया जायेगा।

श्रीकृष्‍ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य श्री गोपेश्‍वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि लड्डू गोपाल को जन्माष्‍टमी पर लगभग सवा-सौ मन लड्डुओं एवं मेवा-पाग का भोग लगाया जायेगा। भगवान के भोग के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वादिष्‍ट लड्डुओं को कुशल कारीगर एवं भक्तगण रात-दिन भाव और श्रद्धा के साथ बना रहे हैं। भगवान को मुख्यतः मेवे, कूटू, गोंद, एवं मिंगी के लड्डुओं का भोग लगाया जायेगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जन्मभूमि के सभी संपर्क मार्गो पर जूताघर एवं सामान घर की व्यवस्था की गयी है, सभी आवश्‍यक स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो श्रृद्धालु मंदिर में भीड़- भाड़ के कारण प्रवेश न कर पायेंगे उनके लिए सीसी स्क्रीन मंदिर के प्रांगण एवं मंदिर परिसर से बाहर लगायी जायेंगी। जन्मभूमि के निकट खुले स्थानों पर तिरपाल आदि की व्यवस्था की गयी है, जिससे दूर से आने वाले श्रृद्धालुजन विश्राम कर सकें, श्रृद्धालुओं के सुगम प्रवेश को दृष्‍टिगत रखते हुये लाउडस्पीकर के माध्यम से निर्देश दिये जायेंगे, साथ ही बैरीकेडिंग इस प्रकार से की जा रही है कि जिससे कि श्रद्धालु कम से कम समय में दर्शन प्राप्त कर सकें। जन्माष्‍टमी के दिन श्रृद्धालुओं का प्रवेश गोविन्द नगर द्वार (गेट नं0-3) से होगा एवं निकास मुख्य द्वार (गेट नं0-1) से होगा।

गोपेश्‍वर चतुर्वेदी ने अनुरोध किया है कि श्रद्धालु जन्मभूमि के लिए प्रस्थान करते समय अपने आवश्‍यक सामान जैसे मोबाइल फोन, कैमरा, रिमोट की रिंग, थैला, माचिस, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू ,चाकू, ब्लेड आदि अन्य कोई भी इलैक्ट्रोनिक सामान अपने साथ न ले जायें। इन्हें या तो अपने वाहन में, अपने ठहरने के स्थान पर छोड़ कर आयें अथवा मार्ग में बने सामान घर में जमा कर रसीद/कूपन अवश्‍य प्राप्त कर लें। साथ ही प्रशासन से अनुरोध किया है कि जहाॅं भी यथाआवश्‍यक सड़कों, नालियों की सफाई एवं मरम्मत आदि के कार्योंं को प्राथमिकता के आधार पर संपन्न करायें, जिससे श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।

श्री चतुर्वेदी ने पुलिस-प्रशासन, नगर निगम एवं अन्य संबंधित विभागों से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निष्चित किये गये कार्य शीघ्र अति शीघ्र संपन्न कराने का अनुरोध किया है। सड़कों की मरम्मत, पर्याप्त विद्युत व्यवस्था, पार्किंग आदि की व्यवस्थाएं शीघ्र अति शीघ्र हो जायें। यह उत्सव की गरिमा एवं श्रद्धालुओं के हित में है।

इस वर्ष लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रवेष द्वारों पर लगवायी जाने वाली बल्लियों की बैरीकेडिंग के स्थान पर अपर पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) के सुझाव पर लोहे की बैरीकेडिंग श्रीकृष्‍ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान द्वारा करायी जा रही है।

श्री चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीकृष्‍ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान विगत वर्षों की भाॅंति पाॅंच स्थानों पर जूताघर- सामानघर का संचालन करेगा। यह सामान घर 1-श्रीजी बाबा आश्रम के निकट, 2-रूपम सिनेमा 3-श्रीकृष्‍ण पार्क (श्रीगर्तेश्‍वर मंदिर के निकट) 4-श्रीगर्तेश्‍वर मंदिर के निकट 5-राधिका गेस्ट हाउस (पतंजलि स्टोर के निकट) पर बनाये जायेंगे। प्रत्येक सामान घर, जूता घर के साथ आपात कालीन स्थिति में श्रद्धालुओं को प्राथमिक चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी, मथुरा के सहयोग से व्यवस्थाएं सुनिश्‍चित की जायेंगी।

श्रद्धालुओं की सुविधा, सामान घर-जूता घर के सुचारू संचालन एवं श्रद्धालुओं के परिसर में सुगम एवं निर्बाध प्रवेष को दृष्‍टिगत रखते हुये संस्थान द्वारा गोविन्द नगर थाने के समीप संस्थान के गौ चिकित्सालय (महाविद्या चैराहा के निकट) में सेवा नियंत्रण कक्ष बनाया जायेगा। जहां संस्थान के अधिकारी श्रद्धालुओं की आवश्‍यकता अनुसार सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे।

श्री चतुर्वेदी ने बताया कि संस्थान द्वारा परिजनों से बिछुड़े हुये लोगों को मिलाने के लिए परिसर के चारों तरफ खोया-पाया सूचना केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जन्मभूमि द्वारा स्थापित किये जा रहे प्रत्येक जूताघर-सामानघर के साथ ही खोया-पाया सूचना केन्द्र भी स्थापित होंगे, जिससे परिवार से बिछुड़े लोग इधर-उधर नहीं भटकेंगे और शीघ्र ही उनको परिवार से मिलाने की व्यवस्थाएं सुनिश्‍चित की जायेंगी।

उन्होंने आगे कहा कि संस्थान द्वारा 10अगस्त 2018 को माननीय जिलाधिकारी महोदय को प्रेषित पत्र में जन्माष्‍टमी महोत्सव संबंधी संपर्क मार्गोंं के निर्माण, श्रद्धालुओं हेतु वाहन पार्किंग, निर्वाध विद्युतापूर्ति, मोबाइल शौचालयों की उपलब्धता, पशुवध, मांस की दुकानों व शराब की दुकानों की बन्दी आदि जिन समस्याओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है उन पर कोई कार्यवाही आरंभ न होना निराशाजनक है। उन्होंने अपेक्षा की कि श्रद्धालुओं की सुविधा व धार्मिक श्रद्धा के दृष्‍टिगत प्रशासन सभी अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास अवश्‍य करेगा।

प्रेस वार्ता में संयुक्त मुख्य अधिशाषी राजीव श्रीवास्तव, ओएसडी गिर्राज शरण गौतम, विजय बहादुर सिंह, अनुराग पाठक, नारायन राय, रणधीर कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

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