Pregnancy: हाइपरटेंशन होने वाले बच्चे पर भारी पड़ सकती है

गुड़गांव। हाईपरटेंशन यानी कि हाई ब्लड प्रेशर Pregnancy की मुश्किलों को बढ़ा देता है और बच्चे पर भी खतरा बढ़ जाता है। यह ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित कर रहा है। कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी से पहले हाइपरटेंशन की शिकायत होती है तो कुछ को तब होती है जब वे पहली बार गर्भवती होती हैं।

प्रेग्नेंसी में हाइपरटेंशन के कारण प्लेसेंटा तक खून का प्रवाह कम हो जाता है। यदि खून प्लेसेंटा तक ठीक से नहीं पहुंच पाता है तो बच्चे को कम ऑक्सीजन मिल पाती है और पोषक त्तव भी उस तक ठीक से नहीं पहुंच पाते हैं। परिणामस्वरूप बच्चे की ग्रोथ धीमी हो जाएगी, जन्म के वक्त वजन बहुत कम होगा और प्रीमेच्योर बेबी का जन्म हो सकता है। बच्चों में न्यूरोडेवलपमेंट विकारों में हालिया वृद्धि के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली हाइपरटेंशन इसका मुख्य कारण हो सकती है।

डॉक्टर नुपुर गुप्ता, गायनोकोलॉजिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल, गुड़गांव
डॉक्टर नुपुर गुप्ता, गायनोकोलॉजिस्ट,
फोर्टिस हॉस्पिटल, गुड़गांव

गुड़गांव के फोर्टिस हॉस्पिटल की गायनोकोलॉजिस्ट, डॉक्टर नुपुर गुप्ता ने बताया कि, “प्रेग्नेंसी के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ से बार-बार जांच कराना जरूरी है। रुटीन शारीरिक परीक्षणों में ब्लड प्रेशर की जांच करना अनिवार्य होता है क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर को संतुलन में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाता है जिससे डिलीवरी में कोई परेशानी न आए और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ रहे।”प्रेग्नेंसी में हाईपरटेंशन को शरीर में इसके विकास के चरण के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। क्रोनिक हाईपरटेंशन प्रेग्नेंसी के 20 हफ्तों पहले विकसित होता है। इसे संतुलित करने के लिए डॉक्टर दवाई की डोज दे सकता है और रेग्यूलर ब्लड टेस्ट करने की सलाह देता है। गेस्टेशनल हाइपरटेंशन केवल प्रेग्नेंट महिलाओं में होता है। यह प्रेग्नेंसी के 20 हफ्तों बाद विकसित होता है और बच्चे के जन्म के साथ ही यह गायब हो जाता है।

डॉक्टर नुपुर गुप्ता ने आगे बताया कि, “हाईपरटेंशन के साथ प्रीक्लेम्पसिया भी विकसित हो सकती है।  यह शरीर के अन्य अंगों के डैमेज होने के संकेतों से संबंधित होती है, जैसे कि किडनी, लीवर, फेफड़े, खून और मष्तिस्क। यदि इसका इलाज न किया जाए तो यह मां और बच्चा दोनो में खतरे के जोखिम को बढ़ाता है। प्रेग्नेंसी से पहले हाइपरटेंशन से ग्रस्त महिलाओं के लिए यह जरूरी है कि वे एक भी पेरेंटल विजिट को मिस न करें क्योंकि इसमें हाइपरटेंशन के अन्य कारणों की पहचान करना, मेडिकेशन और संभावित खतरे प्रीक्लेम्पसिया के विकसित होने के खतरे के लिए काउंसलिंग शामिल होती है।

-PR News

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