Bishop की गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज पुलिस की आगरा में दबिश

आगरा। 100 अरब की धोखाधड़ी कर जमीन बेचने के आरोप में दर्ज मामले में नामजद सेंट पॉल चर्च के Bishop पीपी हाबिल समेत दो आरोपियों की तलाश में प्रयागराज पुलिस ने आगरा में दबिश दी हालांकि पकड़े जाने से पहले ही Bishop भाग निकला। इसके बाद पुलिस टीम लौट गई।
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप पीटर बलदेव समेत 16 लोगों पर प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मुकदमा चर्च ऑफ इंडिया पाकिस्तान, बर्मा एंड सिलोन(सीआईपीबीसी) की लखनऊ डायोसिस के बिशप जॉन अगस्टिन की ओर से दर्ज कराई गई है।

प्रयागराज पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल शुरू की तो पता चला कि मामले में नामजद पीपी हाबिल सेंट पॉल चर्च आगरा का बिशप जबकि, राजीव चंद सचिव है। इसके बाद उनकी तलाश में पुलिस टीम ने गुरुवार को आगरा में दबिश दी। सूत्रों की मानें तो पुलिस के पहुंचने से पहले ही भनक लग जाने से आरोपी भाग निकले।

ये  है  मामला 
वादी का आरोप है कि 1970 में चर्च ऑफ इंडिया के कुछ बिशप ने चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया व इसके अधीन चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन का गठन किया। फिर मेट्रोपोलियन की जगह बिशप ऑफ कलकत्ता की फर्जी नियुक्ति कर दी।

आरोप है कि इन्हीं लोगेां ने 1991 में फर्जी पदाधिकारी बनकर इंडियन चर्च ऑफ ट्रस्टीज की देश भर में फैली 100 अरब की संपत्ति चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन के नाम कर दी।

आरोप यह भी है कि बिशप पीटर बलदेव, पीसी सिंह, पीपी मरांडी, पीके समंतोराय, जनरल सेक्रेटरी एलवन मसीह, जयंत अग्रवाल, पल दुपहरे, पीपी हाबिल, सुरेश जैकब, राजीव चंद, एआर स्टीफन, एचआर माल, मार्विन मैसी, प्रेस मसीह, अशोक विश्वास, प्रबल दत्ता, शशि प्रकाश आदि ने डायोसिस ऑफ लखनऊ, 25 महात्मा गांधी मार्ग सिविल लाइंस की अरबों रुपये की संपत्ति जालसाजी कर दूसरी संस्थाओं को हस्तांतरित कर दी। इसमें से 100 अरब की संपत्ति बेचकर रकम आपस में बांट ली।

– एजेंसी

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