प्रयागराज कुंभ में पंच दशनाम जूना के साथ Kinnar Akhada भी शाही स्नान के लिए आया

Kinnar Akhada प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि, उन्होंने कहा- ‘हम जूना अखाड़े के साथ धर्म और नीति के साथ उनके साथ चलेंगे

प्रयागराज। प्रयागराज में आज मकर संक्रांति के मौके पर पहले शाही स्नान में पहली बार पंच दशनाम जूना के साथ Kinnar Akhada भी शामिल हुआ है। शाही स्नान के लिए सबसे बड़ा अखाड़ा श्री पंच दशनाम जूना के संत, आचार्य और महामंडलेश्वर रथों, बग्गियों और गाड़ियों में सवार होकर संगम तट पहुंचे।

अखाड़ा परिषद ने मान्यता विहीन बताकर किया था विरोध

जूना अखाड़े और किन्नर अखाड़े को एक मंच पर लाने के लिए स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने भी प्रयास किया। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की मध्यस्थता के कारण दोनों अखाड़े एक मंच पर साथ आने को तैयार हो गए। मंगलवार को स्वामी वासुदेवानंद की शोभायात्रा में जूना अखाड़े के प्रमुख संतों ने जहां वासुदेवानंद सरस्वती की आरती उतारी। वहीं, किन्नर अखाड़ा प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कुछ दूर तक शोभायात्रा में शामिल हुईं। बुधवार को दोनों अखाड़ों के बीच नियम शर्तों, सनातनी संस्कार को लेकर चर्चा हुई।

बुधवार को किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर के साथ ही छह अन्य महामंडलेश्वर क्षौरकर्म (सिर मुंडवाकर) के बाद घोषित तौर पर संन्यास दीक्षा लेकर जूना अखाड़े में शामिल होंगे। ऐसा निर्णय लिया गया था। Kinnar Akhada प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि, उन्होंने कहा- ‘हम जूना अखाड़े के साथ धर्म और नीति के साथ उनके साथ चलेंगे लेकिन किन्नर अखाड़े का नाम नहीं हटाया जाएगा।

ये हुआ था फैसला

जूना अखाड़ा का हिस्सा बनने के बाद किन्नर अखाड़े के सदस्य शाही स्नान में शामिल होंगे। जूना अखाड़े के साथ ही संगम तट तक जाएंगे लेकिन स्नान नहीं करेंगे बल्कि, किन्नर अखाड़ा अपनी परंपरा के मुताबिक ही त्रिकाल संध्या करेगा जिसमें महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज ने कहा कि किन्नर अखाड़े के लिए सभी अखाड़ों के द्वारा खुले हैं, लेकिन किन्नर अखाड़े के रुप में मान्यता नहीं मिलेगी।

महामंडलेश्वर, किन्नर अखाड़े शब्द का करेंगे प्रयोग
किन्नर अखाड़े के प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि सनातन धर्म की जड़ों को मजबूत करने के लिए उन्होंने देश के सबसे बड़े और आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित जूना अखाड़े का हिस्सा बनने का फैसला लिया है। अभी बात चल रही है। उन्होंने कहा- अखाड़े से जुड़े महामंडलेश्वर और महंत अपने नाम के साथ किन्नर अखाड़े का प्रयोग करेंगे। यह निर्णय आज के समय में सनातन धर्मावलंबियों को साजिश के तहत धर्म से विमुख किए जाने को देखते हुए लिया है।

गौरतलब है कि बीते शनिवार को जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि जी महाराज के बीच यमुना बैंक रोड स्थित मौजगिरि मंदिर में हुई बैठक के बाद इस आशय का निर्णय लिया गया था। इससे पहले दोनों के बीच कचहरी में अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर भी किए गए थे।

अनुबंध पत्र के बाद दोनों अखाड़ों के संतों ने मौजगिरि मंदिर मे दर्शन पूजन करके आशीर्वाद लिया था। जूना अखाडे़ के संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि महराज ने तब कहा था कि किन्नर अखाड़े को पूरा सम्मान दिया जाएगा। किन्नर अखाड़ा शाही स्नान में शामिल होगा।

-Legend news

 

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