प्रयागराज कुंभ: स्थगित की गई परी अखाड़े की पेशवाई

प्रयागराज। कुंभ में बुधवार को गैर-मान्यता प्राप्त परी अखाड़े की पेशवाई स्थगित कर दी गई। यह निर्णय अखाड़ा परिषद के भारी विरोध के चलते लिया गया। परी अखाड़ा को अखाड़ा परिषद से मान्यता नहीं है। इससे पहले सुबह तीन अनी अखाड़ों के चतु: संप्रदाय खालसा में धर्म ध्वजा स्थापित की गई। पर्यटन विभाग की ओर से यहां पहली बार सांस्कृतिक ग्राम का निर्माण किया गया है।
परी अखाड़ा प्रमुख ने तानाशाही का आरोप लगाया
परी अखाड़े की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने बताया,”हमने नरेंद्र गिरी की तानाशाही के चलते यह पेशवाई रद्द की है। प्रशासन उनके इशारे पर काम कर रहा है। अभी तक हमें जगह नहीं दी गई है। महिलाओं के साथ धर्मक्षेत्र में भेदभाव किया जा रहा है। उज्जैन अखाड़े में हमें लंबी लड़ाई के बाद स्थान मिला था। यहां भी हम तैयार हैं। कल मुख्यमंत्री योगी प्रयागराज आ रहे हैं। हम उनसे मुलाकात कर नरेंद्र गिरी की तानाशाही के बारे में बताएंगे।”
चतु: संप्रदाय में ध्वजारोहण
बुधवार सुबह भगवान श्रीराम और हनुमान के जयघोष के साथ वैष्णव बैरागी चतु: संप्रदाय की धर्म ध्वजा स्थापित कर दी गई। जिसमें दिगंबर, निर्मोही और निर्वाणी अखाड़े के संत, आचार्य शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन किया गया है। इसके बाद ध्वजा की स्थापना की गई। चतु: संप्रदाय के मंगला पीठाधीश्वर माधवाचार्य जी महाराज ने बताया कि अब डेढ़ माह तक छावनी में हवन, पूजन, प्रवचन व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
शिवसेना शिविर का भूमिपूजन
कुंभ मेले में शिविर लगाने के लिए शिवसेना ने संगम में बने सेक्टर 11 में शिवसेना के पदाधिकारियों ने भूमि पूजन किया। संगठन पदाधिकारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा अर्चना की। प्रदेश प्रमुख ठाकुर अनिल सिंह ने बताया कि 22 जनवरी को पूरे प्रदेश के पदाधिकारी कुंभ पहुंचेंगे। शिविर में राम मंदिर से लेकर काशी और मथुरा को लेकर चर्चा होगी। काशी और मथुरा की भी मुक्ति का मार्ग निकाला जाएगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्टूडेंट उकेर रहे पौराणिक कथाएं
इलाहाबाद विश्वविद्यालय फाइन आर्ट्स के छात्र-छात्राएं भी दिव्य-भव्य कुंभ बनाने में जुट गए हैं। यहां के स्टूडेंट संगम की रेती पर कुंभ कलश, गंगा यमुना व सरस्वती की धाराएं, हनुमान मंदिर, इविवि की इमारत, स्नान करते हुए साधु संतों की तस्वीरें उकेर रहे हैं, जो एक स्वर में पौराणिक कथाएं सुना रही हैं।
-एजेंसियां

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