गोल्‍ड जीतने वाले Pranav Vardhan ने कहा- ब्रिज जुआ नहीं, शतरंज से अधिक चुनौतीपूर्ण है

नई दिल्‍ली। एशियन गेम्‍स 2018 में गोल्‍ड जीतने वाले Pranav Vardhan ने कहा कि ब्रिज ऐसा खेल है जिसमें उम्र कोई मायने नहीं रखती, ब्रिज जुआ नहीं बल्‍कि शतरंज से अधिक चुनौतीपूर्ण है, मैं मुफ्त में कोचिंग दूंगा ताकि इस खेल को पूरे देश में आमजन तक पहुंचाया जा सके।

18वेंएशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले 60 साल के प्रणब बर्धन ने इस खेल को देश में बढ़ावा देने के लिए मुफ्त में कोचिंग देने का प्रस्ताव दिया है।

बर्धन ने एचसीएल द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में कहा, ”मैं ब्रिज को कुछ वापस देना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि बच्चे और युवा इस खेल को खेलें। मैं घर वापस जा रहा हूं और सबको बताऊंगा कि मैं इस खेल में दिलचस्पी दिखाने वाले बच्चों को सुझाव और मदद करने के लिए तैयार हूं।”

Pranav Vardhan ने इसे दिमाग का खेल बताते हुए इसकी तुलना शतरंज से की। उन्होंने कहा, ”यह दिमाग का खेल है। यह शतरंज की तरह है। यह तर्क से खेला जाता है और तर्क समझने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती।”

इस मौके पर 56 साल के सरकार ने कहा, ”पिछले पांच वर्षों में इस खेल में काफी विकास हुआ है। मैं हाल ही में बच्चों की एक टीम को चैम्पियनशिप में खेलने के लिए इटली ले गया था। इसके बाद इस्रायल ने हमें आमंत्रित किया और अगस्त में हमारे बच्चों ने विश्व युवा चैम्पियनशिप में भाग लिया। एशियाई खेलों में हमारा पदक बच्चों को इस खेल के लिए प्रेरित करेगा।’’

ब्रिज जुआ नहीं, शतरंज से अधिक चुनौतीपूर्ण है
भारत के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता ब्रिज खिलाड़ियों ने कहा कि उनके खेल को जुआ नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि इसमें भाग्य नहीं कौशल के दम पर जीत दर्ज की जाती है। प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने एशियाई खेलों में ब्रिज में पुरूष युगल में स्वर्ण पदक जीता था। इस खेल को पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया था।

बर्धन ने कहा, ”यह खेल तर्क पर आधारित है. यह शतरंज की तरह माइंड गेम है लेकिन उससे अधिक चुनौतीपूर्ण है। शतरंज में दो खिलाड़ी एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। यहां आपको अपने साथी के साथ खेलना होता है जिससे आप मैच के दौरान बात नहीं कर सकते। आपको एक दूसरे की चाल को समझना होता है।”

उन्होंने कहा, ”यह निश्चित तौर पर जुआ नहीं है। हर किसी को शुरू में एक जैसे पत्ते मिलते हैं इसलिए इसमें भाग्य तो शामिल ही नहीं है। आपको परिस्थितियों के अनुसार खेलना होता है।” सरकार ने कहा कि यह युवाओं का भी खेल है और यह सोच गलत है कि केवल उम्रदराज लोग ही इसे खेलते हैं।

Pranav Vardhan ने कहा, ”सिंगापुर टीम में युवा खिलाड़ी है। कई खिलाड़ी 20 से 30 साल के हैं। यह एलीट वर्ग का खेल है। पश्चिम बंगाल में सभी वर्गों के लोग इस खेल को खेलते हैं।”

-एजेंसी

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